प्रौद्योगिकी और सम्प्रेषण - Technology and Communication
प्रौद्योगिकी और सम्प्रेषण - Technology and Communication
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिक (आईसीटी) ग्रुप अपेक्षित व्यवसाय मूल्य प्रदान करने के लिए एनडीडीबी (NDDB) के मुख्य आईसीटी (ICT) क्रिया-कलापों को प्रबंधित करता है। आईसीटी ग्रुप, एनडीडीबी के सभी ग्रुपों तथा डेरी सहकारिताओं द्वारा आईसीटी के प्रभावी प्रयोग करने पर केंद्रित है। देश की डेरी सहकारिताओं के आंतरिक समूहों की विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए यह ग्रुप नई प्रौद्योगिकी से संचालित समाधानों के विकास पर केंद्रित है। आईसीटी ग्रुप प्रयोक्ता समूहों को प्रशिक्षण के साथ तकनीकी मदद भी उपलब्ध कराता है।
आईसीटी ग्रुप राष्ट्रीय डेरी योजना (एनडीपी) के कार्यान्वयन में भी अहम भूमिका अदा करता है। यह परियोजनाओं तथा अंतिम कार्यान्वयन एजेंसियों की विभिन्न आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण आईटी एप्लिकेशन विकसित कर रहा है।
प्रमुख गतिविधियां:
• प्रयोक्ताओं की उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए सुरक्षित मापनीय आईटी बुनियादी ढांचों का निर्माण करना, अद्यतन करना तथा प्रबंधित करना ।
एनडीडीबी के सभी ग्रुपों की व्यवसाय प्रक्रियाओं का कंप्यूटराइजेशन करना । मानकों/विनिर्देशों को स्थापित करना तथा एनडीपी के अंतर्गत ईआईए को सभी आईटी घटकों के लिए प्राप्ति सहायता उपलब्ध कराना।
• बड़ी परियोजनाओं के लिए उद्यमपरियोजना प्रबंधन एप्लिकेशन की मदद उपलब्ध कराना । • सहकारिताओं तथा उत्पादक कंपनियों को कंप्यूटराइजेशन तथा आईटी बुनियादी ढांचे की स्थापना में तकनीकी मदद उपलब्ध कराना।
प्रमुख परियोजनाओं:
इनाफ
एनडीडीबी ने पशु उत्पादकता एवं स्वास्थ्य के लिए सूचना नेटवर्क (इनाफ), एक डेस्कटाप / नोटबुक एंड्रायड (केवल आरबीपी) आधारित फील्ड आईटी एप्लिकेशन का विकास किया है जो प्रजनन, पोषण तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधितवास्तविक आंकड़ों को किसानों के घर पर साथ ले जाना में सहायता प्रदान करता है। परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन एवं निगरानी के लिए यह किसानों, पदाधिकारियों, संघों, महासंघों तथा एनडीडीबी को उपकरण प्रदान करता है।
एनडीडीबी ने केंद्रीकृत राष्ट्रीय पोर्टल के साथ-साथ एक एकीकृत वीर्य केंद्र प्रबंधन सॉफ्टवेयर का विकास किया है जिसे इनाफ के साथ जोड़ा जाएगा। यह समाधान प्रक्रिया मानकीकरण, सुधार तथा नियंत्रण में मदद के लिए केंद्रों के मुख्य परिचालनओं को शामिल करता है।
इस समाधान को एनडीपी के भाग के रूप में सभी वीर्य केंद्रों में नियोजित किया जा रहा है।
एकीकृत एनडीपी पोर्टल
यह पोर्टल एकीकृत, प्रयोक्ता सहायक वेब आधारित प्रणाली है जो सभी हितधारकों द्वारा परियोजना में हुई प्रगति का प्रबंधन एवं निगरानी करता है। इस प्रणाली में परियोजना प्रगति निगरानी, शिकायत प्रबंधन तथा परियोजना प्राप्ति एमआईएस शामिल हैं।
आई-डीआईएस
आई-डीआईएस एक राष्ट्रीय सहकारी डेरी उद्योग डेटाबेस है
, जो सभी भागीदार संघों तथा महासंघों को एकीकृत डेरी उद्योग की सूचना उपलब्ध कराता है।
आई-डीआईएस एक मंच प्रदान करता है जिसके द्वारा सभी संघ तथा महासंघ अपने आंकड़े अन्य संघों से साझा कर सकते हैं तथा यह विभिन्न निष्पादन मापदंडों पर समकालीन अन्य संघों के साथ अपने निष्पादन की तुलना करने के लिए प्रत्येक संघ को विशेष अवसर भी उपलब्ध कराता है।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रयोग का अनुकरणीय उदाहरण: ग्रामीण ज्ञान केंद्र
बहुमाध्यम का प्रयोग कर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से जहाँ एक तरफ देश की सामाजिक संरचना में आमूल-चूल बदलाव आ रहा है,
वहीं दूसरी ओर नित नवीन जानकारियाँ प्राप्त होने से देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा जागरूक हो रहा है। फलस्वरूपप, देश के बेरोजगार अब स्वरोजगार की तरफ अग्रसर हो रहे हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र में शहरों में पलायन की दर में कमी देखी जा रही है। आज सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एवं जनमाध्यम की बदौलत सूचना विश्व एक वैश्विक ग्राम (ग्लोबल विलेज) बन गया है। बहुमाध्यमों ने लोगों तक पहुँच को इतना आसान बना दिया है कि विश्व स्तर पर प्रौद्योगिकी विकास तीव्र हो गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों का भी तकनीकी विकास तेजी से होने लगा है, ग्रामीण साक्षरता की स्थिति में इजाफा हो रहा है, विद्युत आपूर्ति की स्थिति चाहे जैसी हो लेकिन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी की सुदृढ़ पहुँच ने जबरदस्त क्रांति ला दी है।
इस प्रौद्योगिकी के उपयोग से देश में अनेक ग्रामीण केंद्र संचालित हो रहे हैं जिनसे सामाजिक संरचना में उत्थान तो आ ही रहा है साथ आधुनिक तकनीकी के प्रति आयी जागरुकता ने समाज के ढाँचे को बदल दिया है यदि ग्रामीण ज्ञान केंद्रों की कार्य प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करके उसे और सुविधा एवं साधन संपन्न बना दिया जाए तो यह अत्यंत सार्थक एवं अनुकरणीय पहल होगी। जीवन-यापन के लिये ग्रामीण ज्ञान केंद्र परियोजना को मीडिया लैब एशिया, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के कोर ग्रुप के समक्ष मार्च 2006 को प्रस्तुत किया गया। परियोजना की प्रकृति शोध अभिकल्पन और विकास (आर डी एंड डी) का अनुप्रयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु थी। परियोजना के लिये रुपये 94,05,000 की राशि मंजूर की गई।
इसका उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग के माध्यम से कृषि पद्धतियों, सामाजिक बुनियादी ढाँचे (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) और उभरते ज्ञान आधारित समाज के नए आयामों के लिये स्थानीय अधिकारियों के साथ सार्वजनिक बातचीत और एकीकृत ग्रामीण विकास के लिये रोजगार सृजन और आजीविका सुरक्षा प्रदान करना है।
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