उद्यमिता विकास क्रय्क्रमों को सफल बनाने के लिए सुझाव - Tips to make Entrepreneurship Development Programs successful

उद्यमिता विकास क्रय्क्रमों को सफल बनाने के लिए सुझाव - Tips to make Entrepreneurship Development Programs successful


उद्यमी सिर्फ पैदा नहीं होते अपितु शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अनुभव द्वारा उन्हें तैयार व विकसित किया जा सकता है। उद्यमिता विकास कार्यक्रम इस दिशा में उठाये गए निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए उनके रस्ते में अनेक तरह की समस्याएं आती हैं। इन सबका सफलता पूर्वक सामना किया जा सकता है, यदि कुछ आधारभूत बातों को ध्यान में रखा जाए। इन कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक चलने के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:


1. मॉडल / संरचना पर आधारी उद्यमिता विकास कार्यक्रमः इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए कोई पूर्व निर्धारित मॉडल उपलब्ध नहीं है। इसका कोई मानक या प्रारूप भी निर्धारित नहीं होता है।

यह इस संस्था की सोच तथा संबंधित क्षेत्र की आवश्यकता के ऊपर निर्भर करता है। इसलिए संबंधित संस्थाओं/ स्नानों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे उस क्षेत्र का गहन अध्ययन करें तथा वहां उपलब्ध अवसरों की पहचान करें। इससे उन्हें स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता तथा उनके अनुसार प्रशिक्षण की आवश्यकता का मिलान करके प्रशिक्षण मॉडल तैयार करने में सहायता मिलेगी। यह बात अवश्य ध्यान में राखी जनि चाहिए कि एक सफल मॉडल हर क्षेत्र में सफल होगा, यह आवश्यक नहीं है। आवश्यकतानुसार प्रत्येक मॉडल लोचशील तथा परिवर्तनशील होना चाहिए


2. प्रशिक्षुओं का चयन: ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए उन व्यक्तियों को चुना जाना चाहिए जो सफल व्यवसायी बनने को इच्छुक हैं तथा अपने व्यवसाय को सफलता से चलाना भी चाहते हैं ।

उद्यमिता विकास कार्यक्रमों की सफलता काफी हद तक प्रशिक्षुओं के सही चयन पर निर्भर होती है। अतः प्रतियोगियों के चयन के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली अवश्य होनी चाहिए। उनका चयन उचित स्क्रीनिंग के पश्चात ही किया जाना चाहिए। प्रशिक्षुओं/ प्रतिभागियों के गुणों का आकलन करने या उनका चयन करने केलिए विभिन्न प्रकार के परीक्षण एवं परीक्षाएँ प्रयोग में लायी जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत साक्षात्कार को सबसे अधिक प्रभावशाली तरीका माना जा सकता है । शिक्षित बेरोजगार व्यक्तियों, तकनीकी ज्ञान वाले व्यक्तियों, हस्तशिल्प के ज्ञान वाले व्यक्तियों को इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में यह अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि चुने गए व्यक्तियों में उद्यमिता के गुण अवश्य विद्यमान हों।


3. प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण: ऐसे कार्यक्रमों की सफलता प्रशिक्षकों पर निर्भर करती है। अतः इस प्रकार के प्रशिक्षकों को ही चुना जाना चाहिए जो योग्य, सक्षम एवं कार्य के प्रति समर्पण की भावना रखते हों प्रशिक्षकों को भी आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक तकनीकी, वर्तमान नीतियों एवं वर्तमान वातावरण आदि से परिचित करवाया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए आवश्यक होता है कि विकास कार्यक्रमों की सफलता उन पर निर्भर करती है।


4. उपलब्धि प्राप्ति के लिए प्रेरित करना: संभावित उद्यमियों पर सही प्रभाव डालने के लिए यह आवश्यक होता है कि ऐसे कार्यक्रमों द्वारा उनमें उपलब्धि प्राप्त करने की इच्छा को जागृत करने के लिए प्रेरित किया जाए।

ऐसा सही प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा ही संभव है। प्रशिक्षुओं को विभिन्न अभिप्रेरण विधियों द्वारा प्रेरित किया जाना चाहिए जिससे कि वे बाद में अपने विचार को वास्तविकता का रूप दे सकें।


5. प्रशिक्षण कार्यक्रम: ऐसे कार्यक्रमों की सफलता का अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इसमें कार्यक्रम का पाठ्यक्रम, अवधि, पाठ्यक्रम की विषय सामग्री, शिक्षक निकाय, वास्तविक अनुभव, प्रकृति (पूर्णकालिक अथवा अंशकालिक) आदि सभी घटकों को शामिल किया जाता है। पाठ्यक्रम की संरचना में यह भी निर्धारित किया जाता है कि प्रशिक्षण की अवधि क्या होगी. कक्षाओं का समय व स्थान क्या होगा, प्रशिक्षण पूर्णकालिक होगा या अंशकालिक आदि। इनका अर्थ यह है

कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक पहलू पर गहन अध्ययन किया जाना चाहिए तभी आवश्यक अपेक्षित परिणाम प्राप्त होने की सम्भावना होती है। इसमें शिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए पूर्णकालिक कार्यक्रम रखे जा सकते हैं कार्यरत युवकों के लिए अल्पकालिक तथा अंशकालिक कार्यक्रम तैयार किये जा सकते हैं। अंशकालिक कार्यक्रम सप्ताह के अंतिम दिनों में रखे जाने चाहिए जिससे वे उनमें शामिल हो सकें।


6. कार्यक्रमों की अवधिः उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रकार से तैयार किया जाता है।

संभावित उद्यमियों की पहचान करके उन्हें आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण व ज्ञान से सुसज्जित करके व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह लम्बी समयावधि वाली प्रक्रिया है क्योंकि सफलता अल्पकाल में प्राप्त करना संभव नहीं होता। इसलिए यह भी आवश्यक है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों की अवधि बढाया जाए जिससे कार्यक्रमों से मिलने वाले परिणामों में वृद्धि आ सके तथा व्यवसाय में नए तथा सफल उद्यमी शामिल हो सकें।


7. उद्देश्यों की स्पष्टता: उद्यमिता विकास कार्यक्रमों की सफलता का संबंध ऐसे कार्यक्रमों के मुख्य उद्देश्यों का पूर्ण रूप से स्पष्टता से भी होना चाहिए। जो भी संस्था/ संगठन इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करती है उन्हें इनके उद्देश्यों के बारे में अच्छे से समझ होनी चाहिए।

उद्देश्यों की स्पष्टता के आधार पर ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सही दिशा दी जा सकती है। इसी के आधार पर सम्पूर्ण कार्यक्रम का ढांचा निर्भर करता है।


अतः अंत में यह कहा जा सकता है कि उद्यमी सिर्फ पैदा ही नहीं होते हैं अपितु शिक्षा, अनुभव एवं प्रशिक्षण के द्वारा उन्हें विकसित भी किया जा सकता है। उद्यमिता विकास कार्यक्रम उद्यमिता एवं उद्यमियों का विकास करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इस कार्य में विभिन्न संगठन व संस्थाएं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रत्येक संस्था को ऐसे कार्यक्रमों की परिस्थितियों, क्षेत्रों, प्रतियोगियों की क्षमताओं के अनुसार कार्यक्रमों का प्रारूप तैयार करना चाहिए। ऐसा करने से कार्यक्रमों से वांछित परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमिता विकास के कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन होता रहना चाहिए क्योंकि उद्यमिता का विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।