सफल उद्यमी के गुण/लक्षण - Traits of a Successful Entrepreneur

सफल उद्यमी के गुण/लक्षण - Traits of a Successful Entrepreneur


योग्यता अथवा गुण शब्द एक उद्यमी की अंतर्निहित विशेषताओं को दर्शाता है जो उसे सफल होने में सहायता प्रदान करती हैं। इसे किसी कार्य को प्रभावशाली ढंग से करने के लिए आवश्यक गुणों का संयोजन कहा जा सकता है। एक उद्यमी जिसमें ये सभी गुण विद्यमान होते हैं उसकी सफलता के अवसर अधिक हो सकते हैं। जिसमें ये गुण विद्यमान नहीं होते हैं उसकी असफलता का डर हमेशा बना रहता है।


यह एक सामान्य धारणा है कि उद्यमी पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते हैं। उद्यमी के लिए उसकी व्यावसायिक पारिवारिक पृष्ठभूमि का होना आवश्यक समझा जाता है। कुछ विद्वानों का यह भी विचार है कि उद्यमी तैयार किए जा सकते हैं। वे पैदायशी नहीं होते। उनके अनुसार उचित ज्ञान,

कौशल एवं अनुभव एक व्यक्ति को सफल उद्यमी के रूप में स्थापित कर सकता है तथा वह सफलतम उद्यमी भी बन सकता है। उद्यमी के सफल होने के लिए आवश्यक गुणों की पहचान करने के लिए कई शोध कार्य किए गए हैं मैक्कलैंड ने 1961 में प्रकाशित अपनी पुस्तक में सफल उद्यमियों की विशेषताओं का वर्णन किया है।



उन्होंने कहा है कि


 (i) एक असामान्य सृजनात्मकता,


(ii) जोखिम लेने की क्षमता तथा 


(iii) उपलब्धि प्राप्त करने की दृढ़ इच्छा, एक सफल उद्यमी के गुणों में आवश्यक रूप में विद्यमान होते हैं।


टिमोनस द्वारा किए गए विभिन्न शोधकार्यों के अंतर्गत एक सफल उद्यमी के लिए आवश्यक गुणों की पहचान निम्न रूपों में की गई। उनके अनुसार ये गुण निम्नलिखित होते है:


(i) पूर्ण प्रतिबद्धता तथा दृढ संकल्प


(ii) कुछ प्राप्त करने की तथा विकास की इच्छा


(iii) अवसर की पहचान तथा लक्ष्य प्राप्ति की शक्ति


(iv) पहल करने तथा उत्तरदायित्व लेने की क्षमता


(v) निरंतर समस्याओं को सुलझाते रहना


(vi) यथार्थवाद तथा हास्य का गुण


 (vii) प्रतिक्रिया लेना तथा उसका उपयोग करना


(viii) आंतरिक नियंत्रण


(ix) सुनियोजित जोखिम उठाना एवं उसे सहन करना


(x) जीवन स्तर ऊँचा उठाने तथा शक्ति प्राप्त करने की इच्छा


(xi) ईमानदारी तथा विश्वसनीयता


तमिलनाडु राज्य में 1970 में किए गए एक अध्ययन में एक सफल उद्यमी होने के लिए निम्न गुणों पर बहुत अधिक जोर दिया गया:


(i) वह ऐसा व्यक्ति है जो तरक्की करना चाहता है, संसाधनों से परिपूर्ण है, नए अवसरों की पहचान करता है, परिवर्तित वातावरण के साथ समायोजित करता है तथा जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है।


(ii) वह तकनीकी रूप से आगे बढ़ने तथा अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए तैयार रहता है।


(iii) वह अपने व्यापार के विस्तार में रूचि रखता है तथा अपनी लाभ की राशि को व्यवसाय में पुनः विनियोजित करता है।


इसी प्रकार 1975 में प्रोफेसर टंडन ने भी सच्चे उद्यमी के गुणों का वर्णन किया है। उनके गुण निम्नलिखित हो सकते हैं: अनुसार ये


(i) जोखिम सहने की क्षमता


(ii) तकनीकी ज्ञान तथा परिवर्तन की इच्छा


(iii) संसाधनों को इकट्ठा करने की क्षमता


(iv) संगठन और प्रशासन के लिए इच्छा



यहां यह कहना आवश्यक है कि हमारे समाज में ऐसे सफल उद्यमियों की एक बड़ी संख्या है जो नए उत्पाद, नई तकनीक, नए संसाधनों का संयोजन,

विपणन के नए तरीके, बाजार में तथा संस्थाओं में लागू करते रहते हैं। ये नए आने वाले उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य करते हैं। ये समाज के सभी क्षेत्रों से संबंध रखने वाले व्यक्ति होते हैं। इन सभी में कुछ सामान्य गुण देखने को मिलते हैं। उपरोक्त वर्णित सभी तथ्यों के आधार पर एक उद्यमी की सफलता के लिए आवश्यक गुण निम्नलिखित हो सकते है:


(1) मानसिक योग्यता: मानसिक योग्यता में उसका ज्ञान, कौशल तथा रचनात्मक सोच शामिल होते हैं। एक उद्यमी को यथोचित बुद्धिमान होना चाहिए तथा उसकी रचनात्मक सोच होनी चाहिए । वह विभिन्न समस्याओं का विश्लेषण कर सकने वाला होना चाहिए जिससे कि वह समस्याओं का निपटारा प्रभावशाली ढंग से कर सके। उसे परिवर्तन की अवधारणा को समझना चाहिए तथा वातावरण में हो रहे परिवर्तनों को व्यवसाय में लागू करना चाहिए।

उसे विभिन्न परिस्थितियों को भी समझते रहना चाहिए जिसमें उसे विभिन्न निर्णय लेने होते हैं।


(2) पहल करने और शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता: आज के वातावरण में परिस्थितियाँ बहुत तेजी से परिवर्तित होती रहती हैं तथा उनका सामना करने के लिए निर्णय भी शीघ्रता से लिए जाने होते हैं यदि उद्यमी अनिर्णय की स्थिति से ग्रसत रहता है, तो उस अवसरों को खोना भी पड़ सकता है। इसलिए एक सफल उद्यमी होने के लिए उसमें पहल करने तथा शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता होना अनिवार्य होता है।


(3) उद्देश्य की स्पष्टता: एक उद्यमी को अपने उद्यम के उद्देश्यों के बारे में पूर्ण रूप से स्पष्ट होना चाहिए। उसे अपनी संस्था के मुख्य तथा सहायक उद्देश्यों के महत्व तथा अंतर की भी पूर्ण रूप से समझ होनी चाहिए।

प्रत्येक उद्यम के उद्देश्य के महत्व तथा अंतर की भी पूर्ण रूप से समझ होनी चाहिए प्रत्येक उद्यम के उद्देश्य भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, जैसे- बिक्री को अधिकतम करना, बाजार के हिस्से में बढ़ाना, प्रतिस्पर्धा का सामना करना, आदि। उद्देश्य जो भी हो, उनकी स्पष्टता तथा सही समझ उद्यमी की सफलता के लिए आवश्यक होती है।


(4) संचार क्षमता / कुशलता: अच्छे संचार का सरल अर्थ यह है कि प्रेषक और प्राप्तकर्ता एक-दूसरे के संदेश को समझ लें उद्यमी में अच्छी संचार कुशलता होनी चाहिए क्योंकि यह ग्राहकों, कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं ऋणदाताओं और समुदाय इत्यादि से प्रभावी तौर पर संचार में उसकी सहायता करती है।


(5) तकनीकी प्रशिक्षण तथा शिक्षा आजकल प्रत्येक व्यापार जटिल तथा प्रतिस्पर्धी होते जा रहे हैं। आजकल उद्यमी से यह आशा की जाती है कि उसे व्यवसाय से संबंधित प्रत्येक क्षेत्र की जानकारी अवश्य होनी चाहिए तथा विशेष रूप से वर्तमान तकनीकों की सुनियोजित शिक्षा तथा प्रशिक्षण से वह अपने तकनीकी ज्ञान को बढ़ा सकता है। अतः उसे अपने व्यवसाय से संबंधित तकनीकी ज्ञान को प्राप्त करके, उसे व्यवसाय में लागू करते रहना चाहिए। आज के वातावरण में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण गुण कहा जाने लगा है।


(6) दृढ़ इच्छा शक्ति: उद्यमी अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के आधार पर अपने सभी प्रयासों को अपने उद्यम के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगाता है। इसलिए एक उद्यमी में सफलता के लिए इच्छा शक्ति तथा दृढ संकल्प जैसे गुणों का होना आवश्यक है।

वह दृढ इच्छा शक्ति वाला व्यक्ति होना चाहिए तथा उसे अपने आप पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए तभी वह सभी परिस्थितियों का सामना करने में सफल हो सकता है।


(7) प्रेरक: उद्यमी अपने गुणें के आधार पर पहल करता है तथा कर्मचारियों को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार से ही उद्यमी को टीम का निर्माण करना चाहिए तथा उसे प्रेरित करते रहना चाहिए। उसे संगठन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य के लिए स्वस्थ वातावरण की स्थापना करनी चाहिए।


(8) उच्च ऊर्जा स्तर: उद्यमी सामान्यतः आम आदमी की तुलता में अधिक ऊर्जावान होते हैं उद्यमी की सफलता काफी हद तक उसके ऊर्जा स्तर पर भी निर्भर करती है।

अतः उसे पूर्ण ऊर्जाशील होकर कार्य करना चाहिए तथा अपने कर्मचारियों को उच्च उर्जास्तर पर लाने का प्रयास करना चाहिए।


(9) विफलता के लिए सहनशीलता: उद्यमी यह अच्छे से जानता है कि व्यावसायिक जगत अनिश्चितताओं से भरा होता है। उनमें असफलता सहने की क्षमता होनी चाहिए। उसे इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि विफलता भी व्यावसायिक जीवन का एक हिस्सा है। उसे असफल्ताओं का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए तथा निराश नहीं होना चाहिए। उसे विपरीत परिस्थितियों से जितनी जल्दी हो सके बाहर निकलने का प्रयास करना चाहिए।


(10) प्रेरणा की क्षमता : प्रेरणा शब्द को काम के प्रति प्रेरणा के संदर्भ में देखा व समझा जाता है।

इसमें कुछ मुख्य गुणों का समावेश होता है जैसे उत्तरदायित्व, इच्छाएं एवं आकांक्षाएं, पहल, महत्वकांक्षा आदि । एक उद्यमी इन गुणों का प्रयोग अपने संगठन को स्थापित करने के लिए करता है। वे उद्यमी जो योजना, संगठन, स्टाफिंग, निर्देशन तथा नियंत्रण जैसे क्षेत्रों पर अधिक मेहनत करते हैं, वे सामान्यतया अधिक सफल होते हैं।


(11) निर्णय लेने की क्षमता: निर्णय लेना एक कला होती है। इसका अर्थ होता है कि एक व्यक्ति अपने उद्देश्यों के प्राप्ति के बीच में आने वाली बाधाओं को कितने प्रभावशाली ढंग से सुलझाता है। एक उद्यमी को निर्णय लेने के बारे में स्पष्ट और रचनात्मक होना चाहिए।

उसे 'खुद में विश्वास होना चाहिए कि वह श्रेष्ठ निर्णय ले सकता है। प्रत्येक निर्णय तथ्यों, आंकड़ों, परिस्थितयों आदि को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। संस्था के भविष्य से संबंधित निर्णयों को बेहद सावधानी से लिया जाना चाहिए। सही निर्णय संस्था का भविष्य भी निर्धारित करते हैं। अतः उद्यमी को निर्णयों के संबंध में हमेशा ही सावधानी बरतनी चाहिए।


(12) मानवीय संबंध स्थापित करने की योग्यता: मानवीय संबंध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 'स्वयं को दूसरे व्यक्ति के स्थान पर रखकर सोचना तथा इस बात का अनुमान लगाना कि वह कैसा अनुभव कर रहा है। एक सफल उद्यमी इस अवधारणा में पूर्ण विश्वास रखता है तथा हमेशा ही अपने कर्मचारियों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का प्रयत्न करता है। इसमें उसके व्यक्तिगत गुण,

जैसे उसका व्यक्तित्व, भावनात्मक स्थिरता, सोच, ईमानदारी, स्पष्टता आदि का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।


(13) नैतिक चरित्र: एक अच्छा नैतिक चरित्र एक उद्यमी को समाज में प्रतिष्ठा एवं सम्मान दिलवाने में मदद करता है। इससे उसका अपनी संस्था में तथा समाज में भी प्रभाव बढ़ता है। प्रत्येक उद्यमी को चरित्र के संदर्भ में अवश्य ध्यान देना चाहिए।


(14) नियोजक: एक उद्यमी में एक अच्छे नियोजक का गुण होता है। वह यथार्थवादी होकर अपनी योजनाएं तैयार करता है तथा व्यावसायिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पूर्ण लगन से कार्य करता है । वह उपलब्ध संसाधनों के इष्टतम उपयोग को क्रियान्वित करता है। |


(15) स्वतंत्र: एक उद्यमी स्वयं को ही मालिक मानता है तथा वह उसी तरह से व्यवहार भी करता है। वह अपने निर्णय स्वयं लेता है तथा उसकी जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है।


(16) साहस एवं सुरक्षा: उद्यमी को अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कठोर निर्णय लेने होते हैं तथा नीतियों के संबंध में भी उसे दृढ़ रहना होता है। इसके लिए साहस की आवश्यकता होती हैं। अत: यह गुण उसे सफल बनाने में सहायक होता है। जो उद्यमी शुरूआत में हुई असफलताओं से घबरा जाता है वह लंबे समय तक व्यावसायिक जगत में नहीं रह पाता है।


(17) अपनाने का गुण अपनाने का अर्थ स्वयं को परिस्थितियों के अनुसार ढालने से होता है। यह एक विशेष गुण माना जाता है जो उद्यमी में विद्यमान होता है । व्यवसाय में अनेक बार अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों के अनुसार उद्यमी को समायोजन करने पड़ते है।


उपरोक्त वर्णित सभी गुण सभी उद्यमियों में विद्यमान नहीं होते। परंतु एक उद्यमी यदि अपने व्यक्तित्व गुणों का विकास करता रहता है तो उसकी सफलता की संभवनाए भी बढ़ती जाती हैं। इनमें से कुछ गुण वंशानुगत हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर गुण निरंतर प्रयास और अभ्यास के द्वारा ग्रहण किए जा सकते हैं। यह भी एक कड़वा सत्य हैं कि बहुत से उद्यमी इन गुणों के न होते हुए भी बेईमानी से सफलता प्राप्त कर जाते हैं। परंतु इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि अनैतिकता के आधार पर प्राप्त सफलता थोड़े समय के लिए ही होती है, वह लंबे समय तक सफल नहीं रह पाता।