समापन के प्रकार - type of termination
समापन के प्रकार - type of termination
कंपनी अधिनियम की धारा 270 के अनुसार कंपनी का समापन निम्नलिखित दो तरीकों में से किसी भी तरीके से किया जा सकता है:
1. ट्रिब्यूनल द्वारा समापन; अथवा
2. स्वैच्छिक समापन
ट्रिब्यूनल द्वारा समापन
ट्रिब्यूनल द्वारा समापन के आधार
कंपनी अधिनियम की धारा 271 (1) के अनुसार ट्रिब्यूनल द्वारा किसी कंपनी का समापन निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जा सकता है :
1. विशेष संकल्प यदि कंपनी ने कोई विशेष संकल्प पारित कर लिया है कि कंपनी का समापन ट्रिब्यूनल द्वारा किया जाना चाहिए फिर भी ट्रिब्यूनल ऐसा आदेश देने के लिए बाध्य नहीं है। यदि ट्रिब्यूनल के अनुसार समापन जनहित अथवा कंपनी के हित में नहीं है तो ट्रिब्यूनल समापन का आदेश देने से इंकार कर सकता है। समापन का यह तरीका प्रचलित नहीं है क्योंकि यदि कंपनी के सभी सदस्य समापन का निश्चय करते हैं तो वे स्वैच्छिक समापन को अधिक पसंद करते हैं।
2. राष्ट्रीय हित के विरुद्ध कार्य करना कंपनी ने यदि निम्नलिखित के हित के विपरीत कार्य किया हो तो इसके समापन का आदेश दिया जा सकता है:
i. भारत की एकता और अखंडता,
ii. राज्य की सुरक्षा,
iii. विदेशी राज्यों के साथ मित्रवत संबंध,
iv. नैतिकता,
v. शिष्टाचार, अथवा
vi. लोक व्यवस्था
3. अध्याय XIX के अधीन ट्रिब्यूनल का आदेश कंपनी का उस स्थिति में समापन किया जा सकता है जब ट्रिब्यूनल ने अध्याय XIX जोकि रुग्ण कंपनियों के पुनरुज्जीवन एवं पुनरुद्धार के संबंध में है, के अधीन कंपनी के समापन का आदेश दिया हो।
4. कंपनी का कारोबार कपटपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा हो यदि रजिस्ट्रार या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ट्रिब्यूनल को आवेदन देने पर ट्रिब्यूनल का यह विचार हो कि :
i. कंपनी कपटपूर्ण एवं अवैध प्रयोजन से बनाई गई थी; या
ii. कंपनी का कारोबार कपटपूर्ण रीति से चलाया गया है; या iii. कंपनी के निर्माण अथवा कारोबार के प्रबंधन में लगे व्यक्ति कपट, कर्तव्य भंग या दुराचार के दोषी रहे हैं, तो ट्रिब्यूनल कंपनी के समापन का आदेश डे सकता है।
5. वित्तीय विवरणपत्र फाइल करने में चूक - यदि कंपनी ने पहले पांच लगातार वित्तीय वर्षों के वित्तीय विवरणों को रजिस्ट्रार के पास फाइल करने में चूक की है तो ट्रिब्यूनल द्वारा कंपनी का समापन किया जा सकता है।
6. ऋणों के भुगतान में असमर्थता यदि कंपनी अपने ऋणों का भुगतान करने अथवा धन संबंधी देयताओं को पूरा करने में असमर्थ है तो ट्रिब्यूनल द्वारा उसके समापन का आदेश दिया जा सकता है ।
7. न्याय सांगत एवं साम्यिक यदि ट्रिब्यूनल की राय में कंपनी का समापन न्याय सांगत एवं - साम्यिक है तो भी कंपनी के समापन का आदेश दिया जा सकता है। न्याय सांगत एवं साम्यिक' क्या है, यह प्रत्येक मामलों के तथ्यों पर निर्भर करता है। इस उपबंध के अधीन ट्रिब्यूनल की शक्ति को पर्याप्त व्यापक बना दिया गया है।
स्वैच्छिक समापन
जब किसी कंपनी का समापन ट्रिब्यूनल के हस्तक्षेप के बगैर, उसके लेनदारों व सदस्यों द्वारा किया जाता है तो उसे स्वैच्छिक समापन कहते हैं। स्वैच्छिक समापन की दशा में कंपनी तथा उसके लेनदार अपने मामलों को ट्रिब्यूनल में ले जाए बगैर ही निपटा लेने के लिए स्वतंत्र हैं, किन्तु आवश्यकता पड़ने पर आदेशों व निर्देशों के लिए ट्रिब्यूनल से आवेदन कर सकते हैं।
स्वैच्छिक समापन के आधार
कंपनी अधिनियम की धारा 304 के अनुसार किसी कंपनी का स्वैच्छिक समापन निम्नलिखित डॉ तरीकों से किया जा सकता है:
1. साधारण संकल्प द्वारा यदि कंपनी के अंतर्नियमावली द्वारा निर्धारित कंपनी के कार्यकाल की अवधि समाप्त हो गई है अथवा यदि वह घटना घटित हो गई है जिसके घटित होने पर अंतर्नियमावली के अनुसार कंपनी का विघटन कर दिया जायेगा तो एक साधारण संकल्प पारित करके कंपनी का समापन प्रारंभ किया जा सकता है।
2. विशेष संकल्प द्वारा कंपनी किसी भी समय, बिना कोई कारण बताए, एक विशेष संकल्प पारित करके यह निश्चय कर सकती है कि उसका स्वैच्छिक समापन कर दिया जाए। स्वैच्छिक समापन हेतु पारित किये गए संकल्प की तिथि से 14 दिन के भीतर कंपनी को उस संकल्प की सूचना सरकारी राजपत्र में और उस जिले में, जिसमें कंपनी का पंजीकृत कार्यालय स्थित है, चलने वाले किसी समाचार-पत्र में विज्ञापन द्वारा देनी चाहिए।
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