कार्यशील पूँजी के प्रकार - Types of Working Capital

कार्यशील पूँजी के प्रकार - Types of Working Capital


उपक्रम में संचालन चक्र के कारण कार्यशील पूँजी की आवश्यकता होती है। लेकिन संचालन चक्र पूरा हो जाने से कार्यशील पूँजी की आवश्यकता समाप्त नहीं होती। संचालन चक्र लगातार चलने वाली प्रक्रिया है अर्थात एक संचालन चक्र पूरा होने पर दूसरा संचालन चक्र आरंभ हो जाता है। इस प्रकार, कार्यशील पूँजी की लगातार आपूर्ति की आवश्यकता होती है। लेकिन वर्ष के दौरान कार्यशील पूँजी की मात्रा समान नहीं रहती, यह घटती-बढ़ती रहती है। कुल कार्यशील पूँजी को दो भागों में बाँटा जा सकता है:


1. स्थायी या स्थिर कार्यशील पूँजी : व्यावसायिक कार्यों को सुचरू रूप से चलाने के लिए कच्चे माल, अर्द्ध-निर्मित माल, निर्मित माल, तथा नकद राशि की एक न्यूनतम मात्रा हर समय रखी जानी आवश्यक होती है। चालू सम्पत्तियों को इस न्यूनतम मात्रा तक बनाए रखने के लिए जितनी राशि की आवश्यकता होती है

उसे स्थायी, स्थिर या नियमित कार्यशील पूँजी कहा जाता है। स्थिर कार्यशील पूँजी की व्यवस्था वित्त के दीर्घकालीन स्त्रोतों से की जाती है: जैसे पूँजी, ऋणपत्र, दीर्घकालीन ऋण आदि।


2. अस्थायी अथवा परिवर्तनशील कार्यशील पूँजी : मौसमी परिवर्तनों के कारण वर्ष के कुछ महीनों में व्यावसायिक कार्यों का स्तर सामान्य से अधिक होता है। इसलिए इन महीलनों में खर्च की मात्रा बढ़ने के कारण अतिरिक्त कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार, स्थायी कार्यशील पूँजी के अलावा जितनी अतिरिक्त पूँजी की आवश्यकता होती है उसे परिवर्तनशील कार्यशील पूँजी कहा जाता है, जैसे ही तेजी का मौसम समाप्त होता है परिवर्तनशील कार्यशील पूँजी की माँग भी समाप्त हो जाती है। परिवर्तनशील कार्यशील पूँजी को वित्त के अल्पकालीन स्त्रोतों से पूरा किया जाता है।