वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग - Video Conferencing

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग - Video Conferencing


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मौखिक एवं सचित्र सम्प्रेषण की एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण तकनीक है। इसके द्वारा विभिन्न स्थानों पर उपस्थित व्यक्ति वास्तविक सभा की ही भांति सम्प्रेषण करते हैं। इसमें विभिन्न सन्देशों के सम्प्रेषण के साथ-साथ आपस में परस्पर वार्तालाप भी सम्भव होता है इस प्रकार इसमें शारीरिक भाषा का जैसे व्यक्ति का हाव-भाव, भाव-भंगिमा एवं मुखाभिव्यक्ति का भी सम्प्रेषण सम्भव हो जाता है । यह आमने-सामने की सम्प्रेषण प्रक्रिया का विकल्प माना जाता है। आधुनिक समय में भारतवर्ष के प्रत्येक जिले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है।


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग निम्न दो प्रकार से सम्पन्न की जा सकती है:


(i) कम्प्यूटर का प्रयोग करके तथा


(ii) बिना कम्प्यूटर का प्रयोग किए।


आवश्यक सामग्री:


(i) कम्प्यूटर का प्रयोग करने की दशा में:


इसके लिए कम्प्यूटर, वेब कैमरा, टेलीफोन कनेक्शन एवं इण्टरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है। कम्प्यूटर का प्रयोग करने के कारण ही इसे कम्प्यूटर कॉन्फ्रेंसिंग के नाम से भी पुकारा जाता है।


(ii) कम्प्यूटर का प्रयोग न करने की दशा में:


इसके लिए डिजिटल वेब कैमरा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मशीन, टेलीफोन कनेक्शन, सेटेलाइट कनेक्शन एवं प्रोजेक्ट आवश्यक होता है।


लाभ (Advantages): इसके लाभ निम्न प्रकार हैं:


में (i) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दृश्य एवं श्रवण दोनों ही प्रकरण के सन्देशों का सम्प्रेषण सम्भव रहता है।


(ii) विभिन्न स्थानों पर बैठे लोग लगभग आमने-सामने की भांति सम्प्रेषण करते हैं।


(iii) संस्था के अलग-अलग स्थानों के विभागों या शाखाओं से प्रत्यक्ष एवं तीव्र गति से सम्प्रेषण सम्भव हो जाता है।


(iv) इसके द्वारा लम्बी दूरियों की यात्रा किए बिना ही किसी सम्मेलन में सहभागिता सम्भव हो जाती है।


इस प्रकार इससे धन तथा समय दोनों की ही बचत होती है। (v) यद्यपि एक विशेष समय पर एक साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तो केवल दो अलग-अलग पक्षों तथा


स्थानों के साथ ही सम्भव है, किन्तु इन दोनों स्थानों से निरन्तर सम्पर्क स्थापित रहता है।


(vi) इसके द्वारा किसी संस्था के मुख्य कार्यालय से विभिन्न स्थानों के कार्यालयों की समीक्षा सम्भव हो जाती है।


हानियाँ (Disadvantages): वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हानियाँ निम्न प्रकार हैं:


(i) यह पद्धति छोटी तथा स्थानीय संस्थाओं के लिए उपयुक्त नहीं है।


(ii) इसके लिए आवश्यक सामग्री अत्यधिक महंगी है, इसलिए यह पद्धति लोकप्रिय नहीं हो पाई।