कार्यशील पूँजी की आवश्यकताएँ - Working Capital Requirements

कार्यशील पूँजी की आवश्यकताएँ - Working Capital Requirements


कार्यशील पूँजी एक ऐसी रकम होती है जो उद्यम में दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए आवश्यक होती है। यह कुल पूँजी का वह भाग होती है जो अल्पकालीन कार्यों में निवेशित होती है। ऐसे अल्पकालीन कार्यों में मुख्य रूप से कच्चा माल, अर्द्ध-निर्मित वस्तुएँ, निर्मित वस्तुएँ, विविध देनदार, अल्पकालीन निवेश आदि सम्मिलित होते हैं।


कार्यशील पूँजी की अवधारणाएँ


कार्यशील पूँजी के संबंध में दो अवधारणाएँ प्रचलित हैं:


1. सकल कार्यशील पूँजी : इस अवधारणा के अनुसार, कार्यशील पूँजी से आशय सभी चालू सम्पत्तियों के मूल्य से है।

दूसरे शब्दों में, सकल कार्यशील पूँजी वह होती है जो चालू सम्पत्तियों में लगाई जाती है। लेकिन यह अवधारणा उद्यमी की वास्तविक आर्थिक स्थिति नहीं दर्शाती है। उदाहरण के लिए, उधार से चालू सम्पत्ति बढ़ती है जिसके फलस्वरूप सकल कार्यशील पूँजी में भी बढ़ोतरी मान ली जाती है। परंतु इसके साथ ही चालू दायित्वों में भी समान रूप से वृद्धि हो जाती है। इस प्रकार शुद्ध कार्यशील पूँजीसमान रहती है जो उचित नहीं है। यह अवधारण उन उद्यमियों द्वारा अपनायी जाती है। जो सम्पत्तियों में वृद्धि दिखा कर बाहर से अधिक उधारलेना चाहते हैं।


2. शुद्ध कार्यशीलपूँजी : इस अवधारणा के अनुसार, कार्यशील पूँजी से आशय शुद्ध कार्यशील पूँजी है जो चालू सम्पत्तियों का चालू दायित्वों पर आधिक्य होती है। शुद्ध कार्यशील पूँजी में वृद्धि तभी होगी जब चालू दायित्वों में वृद्धि हुए चालू सम्पत्तियों में वृद्धि होती है।


साधारणतया कार्यशील पूँजी का आशय शुद्ध कार्यशील पूँजी से है। बैंक तथा वित्तीय संस्थान भी उधारकर्ता की आवश्यकताओं की गणनाकरने में शुद्ध कार्यशील पूँजी की अवधारणा को ही लागू करते हैं।