विक्रय मात्रा के विश्लेषण के आधार - Based on sales volume analysis

विक्रय मात्रा के विश्लेषण के आधार - Based on sales volume analysis


विक्रय रिकार्ड जो संस्था के पास उपलब्ध है उसका विश्लेषण किस आधार पर किया जाय कि उससे लाभदायक निष्कर्ष सके। संस्था जिस प्रकार का उत्तर चाहती है उसी के अनुसार आधार निश्चित कर विश्लेषण तैयार किया जाता है, लेकिन साधारणतया निम्न आधारो पर विश्लेषण किया जाता है


1. कुल विक्रय विश्लेषण - यदि कोई नियोक्ता अपनी बिक्री की प्रवृत्ति का पता लगाना चाहता है तो वह वर्ष विशेष को कुल बिक्री से तुलना करके अपनी विक्रय प्रवृत्ति का पता लगा सकता है। यदि संस्था की बिक्री गिर रही है तो प्रबन्धको को उद्योग की प्रवृत्ति का पता लगाना चाहिए।

उद्योग की प्रवृत्ति की तीन स्थितियाँ हो सकती है एक तो कुल बिक्री घट रही है, दूसरे कुल बिक्री बढ़ रही है तीसरा बिक्री में कोई परिवर्तन नही है। इन तीनों ही स्थितियों में प्रबन्ध के समक्ष भिन्न-भिन्न समस्यायें हैं। जैसे यदि उद्योग को कुल बिक्री घट रही तो यह पता लगाना है क अल्पकालिक है या दीर्घकालीन इसी प्रकार यदि उद्योग की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन संस्था की घट रही है तो समस्या यह है कि पता लगाया जाय कि ऐसा क्यों हो रहा है।


2. क्षेत्रीय विश्लेषण - बिक्री को विश्लेषित करने का एक ढंग क्षेत्रीय विश्लेषण भी है। इसमें पहले यह पता लगाया जाता है कि विभिन्न क्षेत्रों में सम्बन्धित समय में कितनी बिक्री हुई है

फिर उस बिक्री को अपने पूर्व-निर्धारित लक्ष्य से मिलाया जाता है। विक्रय का क्षेत्रीय आधार पर विश्लेषण इस बात को बताता है कि उस क्षेत्र की वास्तविक बिक्री अधिक हुई है व किस क्षेत्र में कमा जिन क्षेत्रों में बिक्री कम हुई है उसका पता लगाया जा सकता है व सुधार करके बिक्री को बढ़ाया जा सकता है।


3. वस्तु पंक्ति विश्लेषण जब एक संस्था कई वस्तुओं का निर्माण व विक्रय कार्य करती है तो वह अपनी कुल बिक्री का विश्लेषण वस्तु पंक्ति के आधार पर करती है जिससे यह पता लग सके कि किस वस्तु की कितनी बिक्री है

और वह वस्तु संस्था के लाभों में कितना योग दे रही है। उदाहरण के लिए. विक्रय विश्लेषण यह बता सकता है कि संस्था की 20 प्रतिशत वस्तुओं की बिक्री संस्था की कुल बिक्री के 60 प्रतिशत के बराबर है। विक्रय विश्लेषण यह भी बात सकता है कि संस्था की कुल बिक्री में योग देने वाली वस्तुयें संस्था के लाभों में अधिक योग नहीं देती है। इस प्रकार विक्रय विश्लेषण यह बताता है कि संस्था को उन वस्तुओं के विक्रय संवर्द्धन एवं विज्ञापन आदि पर व्यय करना चाहिए जो लाभो में अधिक योग देती है। इस प्रकार संस्था को उन वस्तुओं के बारे में सोचना चाहिए जो बिकती तो है लेकिन उनका लाभों में योग नाममात्र का है। इनको मृत वस्तुयें कहते है। ऐसी वस्तुओं को वस्तु पंक्ति से हटाने से पूर्व इनकी इस स्थिति में आने के कारणो की खोजबीन करनी चाहिए।


वस्तु पक्ति के आधार पर विक्रय विश्लेषण करने का यह तरीका क्षेत्र आधार पर भी हो सकता है

जिसमें एक क्षेत्र की कुल बिक्री को उस संस्था की वस्तु पंक्ति के आधार पर विश्लेषित किया जाता है। इससे प्रबन्धक को यह पता लग जाता है के किस क्षेत्र में कौन सी वस्तु मजबूत व कौनसी कमजोर है।


4. ग्राहक विश्लेषण – वस्तु को क्रय करने वाले ग्राहक कई प्रकार के होते है जैसे, थोक विक्रेता, फुटकर विक्रेता, श्रृंखलाबद्ध दुकाने, सुपर बाजार, सरकारी विभाग, औद्योगिक क्रेता, विभागीय भण्डार आदि। बिक्री का विश्लेषण इस आधार पर की किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि इसमें लाभ की दृष्टि से सभी क्रेता महत्वपूर्ण नही है। अतः इस बात की आवश्यकता है कि लाभकारी व अलाभकारी ग्राहको को वर्गीकृत करके उनका पता लगाया जाय जिससे संस्था अधिक लाभकारी ग्राहको की ओर ध्यान दे सके।


ग्राहको का विश्लेषण यह बताता है कि किसी क्षेत्र विशेष में वस्तु की बिक्री कम क्यों है ? साथ ही ग्राहको की व्यक्तिगत बिक्री की तुलना करके उनकी प्रवृत्ति का पता लगा सकते है कि वे पहले से ज्यादा क्रय कर रहे हैं या कम। यदि उनके द्वारा कम क्रय किया जा रहा है तो इस ओर व्यक्तिगत ध्यान देकर बिक्री को बढ़ाने का प्रयत्न किया जा सकता है। ग्राहकों के विश्लेषण के आधार पर संस्था अपना भावी नियोजन कर सकती है।


5. विक्रयकर्ता कार्य विश्लेषण विक्रयकर्ताओं के कार्यों में उन्नति के लिए विक्रय का विश्लेषण किया जा सकता है।

इसके लिए पहले प्रमाप निर्धारित करना होगा फिर उस प्रमाप की तुलना विक्रयकर्ता की वास्तविक उपलब्धि से करनी होगी। प्रमाप के लिए साधारण तथा कोटे का उपयोग किया जाता है। जिसको विक्रयकर्ता को एक निश्चित समय से पूरा करना आवश्यक होता है। कोटा निर्धारित करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोटा व्यवहारिक हो अन्यथा विक्रय विश्लेषण से अधिक अच्छे परिणामों का पता नही चलेगा। विक्रयकर्ता कार्य विश्लेषण इस बात के लिए विक्रयकर्ता को विवश कर देता है कि वह उचित मात्रा में व्यवसाय अवश्य करें अन्यथा उसकी सेवायें समाप्त हो जायेंगी। यह विश्लेषण अच्छे विक्रयकर्ताओं को उचित पारिश्रमिक दिलाने में भी सहायक होते है।