अच्छी पारिश्रमिक योजना की विशेषताएँ अथवा आवश्यक तत्व - Characteristics or essential elements of a good remuneration plan

अच्छी पारिश्रमिक योजना की विशेषताएँ अथवा आवश्यक तत्व - Characteristics or essential elements of a good remuneration plan


अच्छे विक्रेताओं को आकर्षित करने अभिप्रेरित करने तथा बनाये रखने के लिए क्षतिपूरक योजना का निर्माण करना सरलपूर्ण कार्य नही है। अच्छी योजना का निर्माण विभिन्न पहलुओं को दृष्टि में रखकर किया जाना चाहिए। विक्रेताओं को अच्छी पारिश्रमिक योजना में निम्नलिखित तत्त्वों का समावेश करना चाहिए।


 1. उचित पारिश्रमिक पारिश्रमिक देने की योजना इस प्रकार होनी चाहिए जिससे विक्रेताओं को उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके कम से कम इतना अवश्य मिले कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। जीवन की जरुरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उचित पारिश्रमिक होना चाहिए।


2. आय में स्थिरता अच्छी पारिश्रमिक योजना विक्रेता की आय में स्थिरता लाती है। जब उसे एक निश्चित मात्रा में पारिश्रमिक प्राप्त होने का पूरा-पूरा विश्वास होता है। तो अपनी आय के अनुसार अपना रहन-सहन का स्तर रखने में समर्थ होता है।


 3. विक्रेताओं को लाभ विक्रेताओं को पारिश्रमिक देने की योजना विक्रेताओं की वर्तमान ही नही बल्कि भावी आवश्यकताओं एवं परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर बनानी चाहिए। उनको मकान, महँगाई, वाहन, बिमारी भत्ता व पेंशन आदि की व्यवस्था कर उन्हें लाभप्रद बनाना चाहिए।


4. न्यायपूर्ण पारिश्रमिक देने की योजना न्यायपूर्ण होनी चाहिए समान योयता एवं अनुभव के विक्रेताओं की समान मात्रा में ही पारिश्रमिक मिलना चाहिए। उनमें जाति, धर्म के कारण भेदभाव नही होना चाहिए।


5. विक्रय बढ़ाने वाली- विक्रेताओं को पारिश्रमिक देने की योजना विक्रेताओं को अधिक से अधिक विक्रय करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने वाली होनी चाहिए। इससे संस्था की प्रगति तो होती ही है, साथ ही विक्रेता भी अधिक अर्जित करने लगता है।


6. योग्यता पर आधारित पारिश्रमिक निर्धारण की योजना इस प्रकार की होनी चाहिए जो अधिक कुशल एवं योग्य विक्रेताओं को अधिक पारिश्रमिक प्रदान करें तथा कम कुशल को कम पारिश्रमिक प्रदान करें।


7. पदोन्नति के लिए प्रावधान एक अच्छी पारिश्रमिक योजना के अन्तर्गत योग्य निष्ठावान व नियमित सेवा में रहने वाले विक्रेताओं के लिए पदोन्नति की व्यवस्था होनी चाहिए।


8. कार्य क्षमता में वृद्धि - अधिक शिक्षित एवं प्रशिक्षित तथा अधिक विक्रय करने वालों को अधिक पारिश्रमिक देने की व्यवस्था होनी चाहिए इससे विक्रेता बराबर अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाने का प्रयास करते रहेंगे।


9. सरलता पारिश्रमिक योजना सरल होनी चाहिए। एक जटिल पारिश्रमिक की योजना विक्रेताओं को सन्तुष्ट नही रख सकती है तथा उसके प्रशासन में बाधाएं उत्पन्न होती है।


10. मितव्ययिता – पारिश्रमिक की योजना मितव्यायी होना आवश्यक है। पारिश्रमिक का हिसाब रखना उसकी गणना करना तथा समायोजन करने आदि पर अधिक व्यय नहीं पड़ने चाहिए योजना का प्रशासनिक व्यय कम से कम होना चाहिए।


11. प्रतियोगी - पारिश्रमिक समान व्यवसाय में लगी संस्थाओं के विक्रेताओं को दिये जाने वाले विक्रेताओं के पारिश्रमिक की तुलना में कुछ ज्यादा आकर्षक होना चाहिए इससे प्रतियोगी संस्था की तुलना में अधिक श्रेष्ठ विक्रेता प्राप्त करने एवं अधिक विक्रय करने में सफलता मिलती है।


12. लोच पारिश्रमिक योजना लोचपूर्ण होनी चाहिए अर्थात वह विभिन्न विक्रय क्षेत्रों, विभिन्न विक्रय विधियों तथा विक्रेताओं की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप परिवर्तनीय होनी चाहिए।