अभिप्रेरणा की अवधारणाएं - concepts of motivation
अभिप्रेरणा की अवधारणाएं - concepts of motivation
आंतरिक और बाह्य प्रेरणा
आंतरिक प्रेरणा- आंतरिक प्रेरणा अपने आप में किसी कार्य या गतिविधि में ही अंतर्निहित पुरस्कार - किसी पहेली का आनंद लेने या खेल से लगाव से आती है। 1970 के दशक से प्रेरणा के इस स्वरूप का अध्ययन सामाजिक और शैक्षणिक मनोवैज्ञानिक द्वारा किया जा रहा है। शोध में पाया गया है कि यह आमतौर पर उच्च शैक्षणिक उपलब्धि और छात्रों द्वारा उठाये जाने वाले लुत्फ के साथ जुड़ा हुआ है। फ्रिट्ज हेइदर के गुणारोपण सिद्धांत, बंडूरा के आत्म बल पर किए गए कार्यो और रयान और डेकी के संज्ञात्मक मूल्यांकन सिद्धांत के जरिए आंतरिक प्रेरणा की व्याख्या की गयी। विद्यार्थी आंतरिक रूप से अभिप्रेरित हो सकते है अगर वे
• अपने शैक्षणिक परिणामों के लिए आंतरिक कारकों को श्रेय दें जिसे वे नियंत्रित कर सकते है (मसलन, उन्होंने कितना प्रयास किया)
• यकिन है कि वे अभिलषित लक्ष्यों तक पहुंचने में प्रभावी कारक हो सकते है (जैसे कि परिणाम किस्मत द्वारा निर्धारित नहीं होते)
• तेता रटंत के जरिए अच्छा ग्रेड प्राप्त करने में रूचि के बजाए, किसी विषय में दक्षता हासिल करने में दिलचस्पी
आंतरिक अभिप्रेरणा जैसे: भुख, प्यास, मल-मुत्र, कमेछा, क्रोध, प्रेम उदसि आदि बह्मे अभिप्रेरणा जैसे, परीक्षा, परिणाम, पुरस्कार, दंड, प्रतियोगिता, प्रशंसा,
निंदा आदि । बाह्य अभिप्रेरणा साधक के बाहर से आती है। रूपया पैसा सबसे स्पष्ट उदाहरण है लेकिन
दबाव और सजा का खतरा भी आम बाह्य प्रेरणा हैं।
खेल में, खिलाड़ी के प्रदर्शन पर भीड़ तालियां बजाती है जो उसे और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर सकती है। ट्राफियां भी बाहरी प्रोत्साहन है। प्रतियोगिता भी सामान्य बाह्य प्रेरणा है क्योंकि यह प्रदर्शनकर्ता को जीतने और अन्य को हराने के लिए प्रोत्साहित करती है न कि गतिविधि के आंतरिक पुरस्कार का लुत्फ उठाने के लिए।
समाजिक मनोवैज्ञानिक शोध बताता है कि बाह्य पुरस्कार अति औचित्य और साथ ही आंतरिक प्रेरणा में कमी की ओर ले जा सकता है।
बाह्य प्रोत्साहन कभी-कभी अभिप्रेरणा को कमजोर कर सकते है। ग्रीन और लेप्पर द्वारा किये गए एक क्लासिक अध्ययन से पता चलता है कि जिन बच्चों को उनकी चित्रकारी के लिए मुक्तहस्त हो कर फेल्ट टिप कलमों से पुरस्कृत किया गया था, बाद में उन्होंने कलमों के साथ फिर से खेलने या कलमों को चित्रकारी के लिए इस्तेमाल में कम रूचि दिखाई।
आत्म संयम
प्रेरणा के आत्म संयम को भावनात्मक बौद्धिकता का एक समझनेवालों की तादाद में वृद्धि हो रही है, फिर भी कुछ खास कार्यों में इस के अनुसार एक व्यक्ति भले ही बहुत अधिक बुद्धिमान हो सकता है, फिर भी कुछ खास कार्यों में इस बौद्धिकता को समर्पित करने में वह अभिप्रेरित नहीं भी हो सकता है। येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर विक्टर ब्रूम का प्रत्याशा सिद्धांत इसका लेखा पेश करता है कि व्यक्ति ही तय करेंगा कि व्यक्ति ही तय करेंगा कि एक विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह अपने आत्मसंयम का कब लागू करें।
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