उपभोक्ता अभिप्रेरण - consumer motivation
उपभोक्ता अभिप्रेरण - consumer motivation
लक्ष्य एवं आवश्यकताएं
सभी प्रकार के व्यवहार लक्ष्यों से संबंधित होते हैं। एक अभिप्रेरक व्यवहार का परिणाम लक्ष्य की प्राप्ति होता है। ज्ञान एवं सोच की प्रक्रिया निश्चित करते हैं कि व्यवहार किस दिशा की ओर अग्रसर होगी। दूसरे शब्दों में, वे लक्ष्य के परिणामों का निर्णय करते हैं लक्ष्य दो प्रकार के होते हैं- उत्पाद की विशिष्टता एवं अविशिष्ट लक्ष्य एक अविशिष्ट लक्ष्य एक साधारण श्रेणी का लक्ष्य कहा जा सकता है जो एक खास लक्ष्य की पूर्ति करता है जबकि उत्पाद विशिष्ट लक्ष्य को एक निश्चित ब्रांडिड या विशेषतः उत्पाद कहा जा सकती है जो एक व्यक्ति किसी जरुरत को पूर्ण करने के बारे में विचारता है। विज्ञापित उत्पाद आवश्यकताओं को समय-समय पर जरुरत के रुप में व्याखित किया जाता है।
(क) अर्न्तनिहित आवश्यकताएं- ये वे आवश्यकताएं होती हैं जो एक व्यक्ति के अंदर समय-समय पर उत्पन्न होती रहती हैं। ऐसी आवश्यकताएं मानसिक प्रकृति की होती हैं। जीवन को कायम रखना, सुरक्षित स्थान, भोजन और कपड़े का आवश्यकता आदि कारकों का होना अति आश्यक होता है। (नोगत अर्थात किसी एक के मनस्तत्व में निर्मित होता है, प्यार, स्वीकरता, आदरभाव और स्व- पूर्णतः अर्जित की हुई आवश्यकताएं एक उदाहरण हैं। इसे पाने की विधि, नीतिशास्त्र, अनुभवों, संसारिक आचरण, और भौतिक क्षमताओं के अनुरुप होती हैं।
(ख) अर्जित आवश्यकताएं- ये वे आवश्यकताएं होती हैं जो जन्म उपरान्त विकसित होती हैं और आमतौर पर जीवन भर कायम रहती हैं। उनको मनोगत के नाम से संदर्भित किया जाता है।
प्रत्येक लक्ष्य की पूर्ति के लिए अनेकों अलग अलग विधियां होती हैं। इनकी पूर्ति के लिए मनोगत अर्थात किसी एक के मनस्तत्व में निर्मित होता है, उदाहरण प्यार, स्वीकरता, आदरभाव और स्व-पूर्णतः अर्जित की हुई आवश्यकताएं आदि हैं। इसे पाने की विधि, नीतिशास्त्र, अनुभवों, संसारिक आचरण और भौतिक क्षमताओं के अनुरूप होती हैं। निर्दिष्ट कोटि के व्यक्ति अपने लक्ष्यों को पाने के लिए इस प्रकार नियोजन करते हैं उनको वर्तमान और भौतिक पर्यावरण मे कैसे पूरा किया जा सकता है।
कुछ कारकों पर आवश्यताओं और लक्ष्यों में परिवर्तन पर निर्भर होते हैं। इसलिए उन्हें परस्पर निर्भर कहा जाता है। निम्नलिखित कारक व्यक्तिगत जरुरतों और लक्ष्यों को प्रभावित करती हैं।
उसकी भौतिक क्षमता
पर्यावरण जिसमे वह व्यक्ति निवास करता है
समाज में अन्य लोगों के साथ उसका अन्योन्य क्रिया
पूर्व ज्ञान एवं अनुभव
एक उत्पाद के बारे में निर्णय कि क्या एक उपभोक्ता किसी ब्रांड को पसंद करता है या किसी को अपनाने की इच्छा रखता है व किसी की व्यक्गित और स्व-निर्मित छवि के अभिव्यक्तिकृत करता है।
किसी ग्राहक का स्व-निर्मित उत्पाद के क्रय करने में महत्वपूर्ण कारक होता है।
जरुरतों की पूर्ति - अपूर्ण होने प्रक्रिया है। जैसे-जैसे किसी उपभोक्ता कि कोई एक जरुरत पूरी होती है, अन्य जरुरते उत्पन्न होती रहती है जिन्हें संतुष्ट करने के लिए विक्रेता कार्य प्रणाली बना सकता है।
लक्ष्यों की आपूर्ति आमतौर पर हतोत्साहक और लाचारक अनुभूति परिणात्मक होती है। किसी की लाचारी को व्यक्त करने के दो तरीके लोकप्रिय हैं: - लड़ाई या पलायन । लोग आमतौर पर लक्ष्य प्राप्ति या लक्ष्य को उपयुक्त स्थानापन्न करने के लिए बाधाएं उत्पन्न करते हैं।
इस विधि को 'लड़ाई' या पलायन के तरीके के रूप में व्यतित किया जाता है जबकि एक व्यक्ति विशेष की लड़ाई से रक्षा करना या आत्म-सम्मान को बचाने की होती है न कि उस जरुरत को पूरा करने की आक्रामक, दमन, छायाचित्रण, प्रतिगमन, सुव्यवस्थिकरण, आहरण अस्वस्थ मानसिक दशा और शिनाख्त व्यक्ति विशेष द्वारा अपनाये गए प्रतिरक्षक क्रियाविधि के उदाहरण है उस स्थिति में जब वे लड़ाई की व्यवस्था में होते हैं।
ग्राहक व्यवहार अध्ययन में पाए गए इरादे के निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन होता है। यह इसलिए कि, भिन्न व्यक्ति विशेष समान लक्ष्यों करे भिन्न-भिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुसार बदलती हैं।
विभिन्न व्यक्ति विशेषों की जरुरत प्राथमिकताओं के बारे में मनोवैज्ञानिकों के तर्क भी भिन्न होते हैं, जबकि उनमे से अधिकतर व्यक्तियों की जरुरतों की प्राथमिकताएं भी होती हैं। जबकि शेष यह सोचते हैं कि साधारणतया सभी मानवों की बुनियादी आवश्यकताएं समान होती हैं और वे एक सुपरिचित प्राथमिक स्थिति की अनुमोदन करते हैं।
एक व्यक्ति के अंदर प्रेरक शक्ति जो उसे कुछ हासिल करने को प्रेरित करती है उसे अभिप्रेरणा कहते हैं। यह प्रेरक शक्ति अनिश्चितता के कारण उत्पन्न होती है जिसके असंतुष्ट जरुरतों के कारण होती हैं। उपभोक्ता की विशिष्ट कार्यवाही और लक्ष्य का चयन और सोच प्रक्रिया और चयनित ग्राहक के भूतपूर्व अध्ययनित ज्ञान के आधार पर होती है।
जरुरतों और लक्ष्यों की अंर्तनिर्भरता
एक उपभोक्ता की जरुरतें और उसके लक्ष्य एक-दूसरे के अंर्तनिर्भर होते हैं और एक-दूसरे के बिना अस्तित्वहीन होते हैं।
मानव आमतौर पर अपने लक्ष्यों एवं आवश्यकताओं की तुलना में ज्यादा सजग होते हैं।
पारम्परिक शैलियों वाले उपभोक्ता आमतौर पर अपनी मनोवैज्ञानिक जरुरतों को मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के तुलना में कम सजग होते हैं।
वार्तालाप में शामिल हों