बिक्री कर्मियों का नियंत्रण - control of sales personnel
बिक्री कर्मियों का नियंत्रण - control of sales personnel
विक्रेता अभिप्रेरणा की समस्त विधियों को निम्न दो भागों में बाँटा गया है।
1. वित्तीय पद्धति
2. अवित्तीय पद्धति
1. वित्तीय पद्धतियाँ अभिप्रेरणा की वित्तीय पद्धतियों में वेतन एवं कमीशन योजना, आहरण लेखा योजना, लाभ भागिता योजना, बोनस योजना, विशिष्ट कार्य योजना, अनुषंगी लाभ योजना, अभ्यंश योजना आदि को मुख्य रूप से सम्मिलित किया जाता है।
2. अवित्तीय पद्धतियाँ - एक व्यक्ति के जीवन में वित्तीय लाभ ही सब कुछ नही होता है
बल्कि मनुष्य कई मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी कार्य करता है जो कि अवित्तीय प्रेरणाओं द्वारा पूरी की जाती है। मुद्रा जब अभिप्रेरक के रूप में प्रभावी नही होती तो कई अवित्तीय अभिप्रेरणाओं जैसे आत्मसम्मान, पदोन्नति, व्यक्ति के साथ सही व्यवहार, कुशल नेतृत्व, उत्तरदायित्व, दलीय भावना,
दिये जाते चाहिए। उन्हें समय-समय पर विभिन्न सूचनायें दी जानी चाहिए। कार्य के कुशल निष्पादन का भावना भी विक्रेताओं को अभिप्रेरित करता है।
vii) मान्यता एवं पुरस्कार विक्रेताओं के अच्छे कार्यों की प्रसन्नता की जानी चाहिए।
उत्तम कार्य, उपलब्धियों एवं निश्चित लक्ष्यों की प्राप्ति के फलस्वरूप उन्हें वैयक्तिक रूप से पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
ब) सामूहिक अभिप्रेरण पद्धतियाँ
विक्रेताओं की एक समूह के रूप में भी अभिप्रेरित किया जाता है। इसके लिए अनेक प्रकार की विधियाँ, जैसे विक्रय सम्मेलन प्रतियोगिताएँ विक्रय साहित्य, सहभागिता, विक्रय पर्यवेक्षण, श्रव्य दृश्य
साधनो आदि का प्रयोग किया जाता है। इसकी प्रमुख पद्धतियाँ हो सकती है।
1. विक्रय सम्मेलन एवं सभायें विक्रय सम्मेलन एवं सभायें समूह अभिप्रेरणा प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण विधि है।
ये अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रादेशिक अथवा स्थानीय स्तर पर आयोजित की जाती है। इन सम्मेलनों व सभाओं में भाग लेने वाले प्रतिनिधि सामान्यतः समान पद और योगयता वाले होते है। ये सम्मेलन एवं सभायें विक्रय कर्त्ताओं का एक दूसरे व्यवहार प्रारूप को समझने तथा निर्धारित करने का अवसर प्रदान करती है। विक्रय सम्मेलन तथा विक्रय सभाओं में अन्तर बताते हुए जे. आर. डाबमेन लिखते हैं कि “विक्रय सभायें निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बुलाई जाती है, जिनकी निश्चित प्रधायें हैं जिनके पीछे सामान्य व्यवहार होता है, जबकि सम्मेलन विचार-विमर्श के लिए आयोजित किया इसके द्वारा विक्रेताओं के मनोवल, ज्ञान व संस्था के प्रति निष्ठा में वृद्धि की जा सकती है।
2. विक्रय प्रतियोगिताएँ - अभिप्रेरण का एक सुदृढ़ साधन विक्रय प्रतियोगिता का आयोजन भी हैं।
इसके द्वारा विक्रेताओं में प्रतिस्पर्धा, चुनौती एवं उत्साह का वातावरण निर्मित करके उन्हें अधिक विक्रय के लिए प्रेरित किया जा सकता है। प्रतियोगिताओं द्वारा विक्रेताओं में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रति जोश उत्पन्न किया जा सकता है। विक्रय प्रतियोगिता वह विशिष्ट विक्रय अभियान है जो विक्रेताओं को निश्चित रूप से प्राप्त होने वाले पारिश्रमिक के अतिरिक्त अधिक पुरस्कार या सम्मान के रूप में प्रेरणा देता है। विक्रय प्रतियोगिताओं के द्वारा योग्य विक्रेताओं की खोज की जा सकती है।
3. विक्रेताओं के लिए पत्र पत्रिकायें संस्था द्वारा प्रकाशित पत्र-पत्रिकायें विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने का एक अच्छा साधन है इनमें समय-समय पर विक्रेताओं के विचारों एवं लेखों का प्रकाशन किया जाता है उनके कार्यों उपलब्धियों की प्रशंसा की जाती है
पत्र-पत्रिकाओं के द्वारा विक्रेताओं को नये उत्पादों, नये अनुसंधानों एवं नयी विक्रय तकनीकि से अवगत कराया जाता है। उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों, नई फर्मों व अन्य स्थितियों से अवगत कराया जाता है इसके माध्यम से विक्रेता अपनी संस्था के विकास विस्तार विक्रय व्यूह रचनाओं व विक्रय प्रसार कार्यक्रमों से अवगत हो जाते है। अभिप्रेरणा की यह विधि लोचपूर्ण भी है क्योंकि पत्र-पत्रिकाओं के समय संदेश व आकार-प्रकार में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
लिए लघु पुस्तिकायें, हैण्डबुक, बुलेटिन्स व फोल्डर्स आदि छपवाती है। जिसमें संस्था द्वारा विक्रेताओं को दी जाने वाली विभिन्न सुविधाओं आदि के बारे विस्तृत वर्णन दिया जाता है।
5. सहभागिता - सहभागिता विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने की एक महत्वपूर्ण पद्धति है इसके अनुसार विक्रेताओं से विभिन्न मामलों में विचार विनिमय करके उन्हें प्रबन्ध में 'हिस्सा देकर एवं विक्रय योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में उन्हें सम्मिलित करके अभिप्रेरित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विक्रेताओं को विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों व विक्रय व्यूह रचनाओं के निर्धारण में भी भागीदार बनाया जा सकता है।
6. विक्रय पर्यवेक्षण एवं सम्बन्ध विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने में विक्रय परिपेक्षको तथा उनके साथ बनने वाले सम्बन्धों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। संगठन के परिवेक्षक की स्थिति दोहरी होती है। जहाँ एक ओर वो प्रबन्धक के प्रतिनिधि होते है
वही दूसरी ओर वे विक्रेताओं के निकटस्थ अधिकारी एवं प्रतिनिधि की होते है। परिवेक्षक अपने उदार नियन्त्रण, योग्य मार्गदर्शन विक्रय समस्याओं के समाधान, मानवोचित, व्यवहार एवं विक्रेताओं की आवश्यकताओं पर पर्याप्त रूप से ध्यान देकर उन्हें अभिप्रेरणा प्रदान कर सकते है। इसके अतिरिक्त परिवेक्षक प्रबन्धकीय नीतियो, नियमो, उद्देश्यों व कार्यक्रमों की सही व्याख्या करके विक्रेताओं के कार्य निष्पादन में सहायता कर सकते है। साथ ही पर्यवेक्षक विक्रेताओं की कठिनाइयों, आकाक्षाओं व जरुरतों का प्रबन्धकों के समझ उचित प्रस्तुती कर सकते है।
7. विक्रेताओं के लिए चलचित्र विक्रय कर्ताओं को अधिप्रेरित करने के लिए आधुनिक युग में चलचित्रों का भी व्यापक प्रयोग किया जा रहा है। कई संस्थाये अपने विक्रयकर्ताओं को उत्पादों, विक्रय गतिविधियों, ग्राहक व्यवहार व स्वयं संस्था के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए छोटी छोटी फिल्में तैयार कर लेती है। इसके माध्यम से विक्रेताओं को विविध मामलो जैसे-विक्रय प्रविधि, ग्राहक मनोविज्ञान, क्रय प्रेरणाओं, ग्राहक की आपत्तियों के समाधान की विधि, उत्पादों के निर्माण, विक्रय कौशल, बाजार व्यूह रचनाओं, क्रियात्मक प्रदर्शन, सजावट, विक्रय क्षेत्र प्रबन्ध आदि का ज्ञान करवाया जा सकता है। फलस्वरूप विक्रेताओं की कार्य के प्रति रुचि व जिज्ञासा बढ़ती है तथा मनोबल तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
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