विक्रयकर्ता का नियन्त्रण - Control of the seller
विक्रयकर्ता का नियन्त्रण - Control of the seller
विक्रेताओं के नियन्त्रण का अर्थ एवं परिभाषा -
नियन्त्रण विक्रय प्रबन्धक का एक महत्वपूर्ण कार्य है, जिसके द्वारा यह ज्ञात किया जाता है कि समस्त विक्रय कार्यों का निष्पादन सही ढंग से हो रहा है या नही। विक्रेता पूर्व निर्धारित योजनाओं और सिद्धान्तों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नही । यदि विक्रेता अपने लक्ष्यों की प्राप्ति योजनाओं के अनुसार नही कर रहे है तो उनके क्या कारण है और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।
बिली ई. गोत्ज लिखते है कि “नियन्त्रण से आशय घटनाओं को योजनाओं के अनुरूप बनाने से है।" कोटलर ने लिखा है कि “नियन्त्रण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वास्तविक परिणामों को इच्छित परिणामों के निकट लाने के प्रयास किये जाते है।"
4. विक्रेताओं के लिए विक्रय साहित्य अभिप्रेरणा प्रदान करने में विक्रय साहित्य का अत्यधिक महत्व है। कई व्यवसायिक संस्थायें अपने विक्रेताओं को यह जानकारी देने तथा उन्हें अभिप्रेरित करने के विक्रेता नियन्त्रण से आशय यह देखना है कि विक्रेता पूर्व निर्धारित विक्रय कार्यक्रमो, लक्ष्यों एवं योजनाओं के अनुरूप कार्य कर रहा है कि नही तथा विचलन की स्थिति में उसे सुधारात्मक कार्यवाही करना है ताकि इच्छित विक्रय परिणामों के लाभ को प्राप्त किया जा सके।
विक्रय-शक्ति नियन्त्रण की आवश्यकता एवं महत्व - विक्रय विभाग के उद्देश्यों की पूर्ति का भी विक्रय-शक्ति पर नियन्त्रण बनाये रखने में निहित है। संक्षेप में विक्रय कर्मचारियों पर नियन्त्रण की आवश्यकता एवं महत्व को निम्न शीर्षको में स्पष्ट किया गया है।
1. विक्रय लक्ष्यो की पूर्ति - नियन्त्रण के द्वारा विक्रेताओं के कार्यों लक्ष्यों की ओर निर्देशित करके इन्हें शीघ्रता से न्यूतम लागत पर प्राप्त किया जा सकता है।
2. न्यूतम व्यय पर आधिकाधिक विक्रय - नियन्त्रण के द्वारा विक्रेताओं की कमियों को जात करके दूर कर दिया जाता है। फलस्वरूप उसके प्रयास उत्पादक एवं लाभप्रद बन जाते है। इसी से न्यूनतम व्ययों पर अधिकांश विक्रय के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है।
3. योजना निर्माण में सहायक नियन्त्रण प्रक्रिया के द्वारा लक्ष्य पूर्ति के स्तर पूर्ति में आने वाली बाधाओं आदि का विक्रय प्रबन्धक को अच्छा ज्ञान हो जाता है।
यह अनुभव भावी विक्रय योजनाओं के निर्माण में सहायक होता है।
4. कार्य क्षमता का ज्ञान नियन्त्रण के द्वारा विक्रय प्रबन्धक को विक्रय कर्मचारियों की दक्षता एवं निष्पादन क्षमता का ज्ञान हो जाता है। इससे विक्रय कर्मचारियों को उनकी क्षमताओं के अनुसार कार्य सौपा जा सकता है।
5. कमियों में सुधार संस्था में प्रयुक्त की जाने वाली नियन्त्रण प्रणाली विक्रेताओं की कमियों तथा उनके कारणों की खोज कर लेती है। इस प्रकार विक्रेता इन कमियों को दूर करके अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि कर सकते है।
6. प्रशिक्षण की आवश्यकता का निर्धारण नियन्त्रण के द्वारा विक्रेताओं की वैयक्तिक दुर्बलताओं, चातुर्य के अभाव एवं आत्म दोषपूर्ण विधियों का ज्ञान हो जाता है। फलस्वरूप इन कमियों को दूर करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता का निर्धारण किया जा सकता है।
7. अभिप्रेरणा वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन करके विक्रय कर्मचारियों की सफलता एवं असफलता का मापन किया जा सकता है। सफलता की दशा में विक्रेताओं को अधिक वेतन, पदोन्नति सहभागिता आदि प्रदान करके अभिप्रेरित किया जा सकता है।
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