वितरण लागत विश्लेषण तकनीक - Distribution Cost Analysis Techniques

वितरण लागत विश्लेषण तकनीक - Distribution Cost Analysis Techniques


इसमें वस्तुओं को बेचने पर हुए व्ययो का विश्लेषण किया जाता है। यह व्यय तीन प्रकार के होते है -


1. बिक्री प्राप्त करने के व्यय


2. आदेश पूरा करने के व्यय


3. विक्रय को बनाये रखने के व्यय


विक्रय प्राप्त करने के व्ययो में विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन, वैयक्तिक विक्रय व्यय, आदेश पूरा करने में पैकिंग व्यय, गाड़ी भाड़ा, रेल भाड़ा, माल की डिलेवरी के व्यय व माल के विक्रय को बनाये रखने के लिए व्यय आते है।

यह सभी व्यय विपणन व्यय कहलाते है लेकिन कुछ विद्वान इसको वितरण व्यय कहते है। सभी वितरण व्ययो का जोड़ लगाकर उनका विश्लेषण किया जाता है, पिछले वर्षों के व्ययों से तुलना की जाती है व निष्कर्ष निकालकर सुधार हेतु प्रयत्न किये जाते है जिससे कि व्यय कम से कम हो। इन व्ययो में विज्ञापन व्यय, विक्रय संवर्द्धन व्यय, पैकिंग व सुपदंगी व्यय आदि आते है।


वास्तव में वितरण लागत विश्लेषण तकनीक विक्रय कार्य सम्पादन के नियन्त्रण हेतु काम में लायी जाती है। ऐसा करने से वितरण लागत घटती है व विक्रय क्रियाओं की कुशलता बढ़ती है।

इन व्ययों का विश्लेषण तुलना का अवसर देता है जिससे प्रमाप निर्धारित किये जा सकते है और जिसके आधार पर आगे के लिए विक्रय बजट बनाये जा सकते है।


वितरण लागत का विश्लेषण उन क्षेत्रो की जानकारी देता है जो अधिक लाभकारी नही है। यह डूबत ऋण व बसूली के व्ययो आदि में कटौती करने का अवसर भी देता है।