वितरण - माध्यम को प्रभावित करने वाले घटक - Factors Affecting Choice of Channels of Distribution

वितरण - माध्यम को प्रभावित करने वाले घटक - Factors Affecting Choice of Channels of Distribution


किसी वस्तु के विपणन में वितरण माध्यम का चुनाव करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। यदि इनका चुनाव उचित रूप में नहीं होता है तो उपभोक्ता को वस्तु उचित मूल्य पर आसानी से नही मिल पाती है। अतः एक निर्माता को वितरण माध्यम का चुनाव करते समय निम्नलिखित घटकों का ध्यान रखना चाहिये 1. निर्माता सम्बंधी बातें-निर्माता संबंधी घटक निम्न हैं


● निर्माता का आकार - जिन निर्माताओं का आकार बहुत बड़ा होता है उनकी ख्याति, आर्थिक स्थिति, प्रबंधकीय योग्यता आदि भी अच्छी होती है। अतः ऐसी संस्थाओं के द्वारा छोटा वितरण


माध्यम अपनाया जाता है। • प्रबंधकीय योग्यता - एक वस्तु का वितरण माध्यम प्रबंधकीय अनुभव एवं योग्यता से भी प्रभावित होता है। यदि निर्माता में प्रबंधकीय योग्यता की कमी है

तो उसको मध्यस्थों पर अधिक निर्भर हरना पड़ेगा। नये निर्माता भी प्रारम्भिक अवस्था में मध्यस्थों पर ही निर्भर रहते है।


• आर्थिक स्थिति एवं ख्याति किसी संस्था की ख्याति उसकी अच्छी नीतियों एवं अच्छी आर्थिक स्थिति के कारण बनती है। एक संस्था की ख्याति उसके वितरण माध्यम को प्रभावित करती है। जिस निर्माता की ख्याति अच्छी होती है वह स्वयं की दुकानें या शाखाएँ खोल सकता है और वह मध्यस्थों पर निर्भर नही रहता है।


2. वस्तु संबंधी बातें - वे बातें जो वस्तु के गुण एवं प्रकृति से संबंधित हो भी वितरण माध्यम को प्रभावित करती है। इनका विवरण निम्न है।


• नाशवानता वे वस्तुएँ जो जल्दी नष्ट हो जाती है उन्हें तुरन्त बेचने की आवश्यकता होती है जिसके लिये कम मध्यस्थों की आवश्यकता होती है। ये वस्तुएँ निर्माता या फुटकर विक्रेताओं द्वारा ही बेची जा सकती है। यदि वस्तु नाशवान प्रकृति का नहीं है तो वितरण-माध्यम लम्बा हो सकता है।


• वजन यदि वस्तु भारी हो तो उसको निर्माता के द्वारा सीधे उपभोक्ता को भेजा जायेगा। यह भी हो सकता है कि दोनों को मिलाने वाला मध्यस्थ बीच में हो। ऐसी वस्तुएँ रेल, लारी या ट्रक में भरकर भेजे जाते है।


• तकनीकी प्रकृति – यदि वस्तु तकनीकी प्रकृति की है तथा जिसमें विक्रय के बाद सेवा की - आवश्यकता हो तो ऐसी वस्तु को स्वयं निर्माता द्वारा ही बेचा जाना चाहिये जिससे क्रेता को आवश्यक तकनीकी जानकारी दी जा सकें।

मध्यस्थों द्वारा भी इस प्रकार की वस्तुओं का विक्रय किया जा सकता है लेकिन इसके लिये मध्यस्थों को प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा।


• प्रतियोगिता एक विक्रेता को इस बात का पता लगाना चाहिये कि प्रतियोगी वस्तुओं के निर्माताओं द्वारा कौन-कौन सा वितरण-माध्यम अपनाया गया है जिससे कि अपना नया वितरण-माध्यम अपनाया जा सकें।



3. बाजार-संबंधी बातें - वितरण-माध्यम के चयन करने में बाजार संबंधी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण है। बाजार


संबंधी बातें निम्न है -


• औद्योगिक एवं उपभोक्ता बाजार बाजार शब्द का अर्थ यहाँ पर यह है उपभोक्ताओं के लिये है या औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिये । यदि वस्तु सामान्य वस्तु सामान्य उपभोक्ताओं के लिये है तो उस वस्तु के अधिक मध्यस्थ हो सकते हैं। लेकिन यदि वस्तु औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिये है तो मध्यस्थों की संख्या कम हो सकती है।


• ग्राहकों की संख्या ग्राहकों की संख्या भी वितरण माध्यम के निर्णय को प्रभावित करती है। यदि ग्राहकों की संख्या अधिक है तो वितरण के लिये मध्यस्थों की सेवाएँ ली जा सकती है। यदि ग्राहकों की संख्या कम हो तो स्वयं निर्माता द्वारा वितरण किया जा सकता है।


• क्रय आदतें ग्राहकों की क्रय आदतें वितरण-माध्यम को प्रभावित करती है। यदि क्रेताओं की आदत उधार लेने की है और निर्माता उधार देने की स्थिति में नही है तो उसे ऐसे मध्यस्थों का सहारा लेना पड़ेगा जो उधार देने में समर्थ हों।


4. मध्यस्थ संबंधी बातें मध्यस्थ संबंधी बातें भी वितरण माध्यम पर प्रभाव डालती है। इनका विवरण


निम्न है - • सेवाएँ - मध्यस्थों का चुनाव उनकी सेवाओं को ध्यान में रखकर किया जाता हैं। जो मध्यस्थ अधिक सेवाएँ देने को तैयार हो उन्ही को चुना जाना चाहिये।


• बिक्री की संभावनाएँ जिस वितरण माध्यम द्वारा बिक्री बढ़ने की संभावना सबसे अधिक होती है उस माध्यम को चुनना चाहिये। साथ ही साथ यह भी ध्यान रखना चाहिये कि माध्यम महंगा न हो तथा निर्माता का मध्यस्थों पर नियंत्रण बना रहें।


• लागत जिन साधनों से वितरण लागत कम पड़ती है उनको अपनाया जाना चाहिये। लेकिन साथ ही साथ सेवाओं एवं माल को भी ध्यान में रखना चाहिये।