विक्रय प्रबन्ध की विशेषताएं या लक्षण - Features or Characteristics of Sales Management
विक्रय प्रबन्ध की विशेषताएं या लक्षण - Features or Characteristics of Sales Management
"विक्रय' व्यवसाय की न केवल सारगर्भित क्रिया है वरन् यह इसका उद्देश्य भी है। यह सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। प्रत्येक व्यावसायिक संस्था की सफलता एक बड़ी सीमा तक इसके प्रभावशाली विक्रय प्रबन्ध पर निर्भर करती है। विक्रय प्रबन्ध न केवल व्यावसायिक संस्थाओं के लिए ही महत्त्वपूर्ण होता है वरन् इसके द्वारा उत्पन्न प्रभावों से ग्राहक, समाज व राष्ट्र सभी लाभान्वित होते हैं। संक्षेप में, विक्रय प्रबन्ध के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं :
1. संस्था के लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान प्रत्येक व्यावसायिक उपक्रम की सफलता अथवा असफलता का सीधा सम्बन्ध उसके विक्रय विभाग व विक्रय कर्मचारियों से होता है।
व्यवसाय के प्रमुख लक्ष्यों लाभ, विकास व विस्तार की प्राप्ति विक्रय क्रियाओं व कर्मचारियों के कुशल प्रबन्धव द्वारा ही सम्भलव है।
2. विक्रय शक्ति का निर्देशन विक्रय प्रबन्ध के द्वारा विक्रय शक्ति का प्रभावी उपयोग व कुशल निर्देशन किया जा सकता है। विक्रय प्रबन्धक अपने कर्मचारियों को वित्तीय एवं अवित्तीय प्रेरणायें प्रदान करके, उचित नेतृत्व, योग्य निर्देशन व कुशल पर्यवेक्षण उपलब्ध करवाकर विक्रेताओं के विक्रय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग करता है।
विक्रय शक्ति' संस्था की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण शक्ति होती है जो विक्रय प्रबन्ध के द्वारा विकास एवं सृजन की ओर अग्रसर होती है।
3. सुदृढ़ व्यावसायिक नियोजन- व्यवसाय की सुदृढ़ योजनाओं, ठोस निर्णयों व लाभकारी नीतियों के निर्माण में विक्रय प्रबन्ध का बहुत सहयोग होता है। विक्रय प्रबन्धक ही उच्च प्रबन्धकों को विक्रय, बाजार, उत्पाद, प्रतिस्पर्धा, लाभ सम्भावना, वितरक सम्बन्ध व ग्राहक प्रवृत्तियों आदि के बारे में आवश्यक सूचनाएँ व तथ्य उपलब्ध करवाता है। इन उपयोगी सांख्यिकीय आँकड़ों के आधार पर ही व्यावसाय की समग्र योजना का निर्माण किया जाता है।
4. व्यावसायिक एवं सामाजिक लक्ष्यों का एकीकरण विक्रय प्रबन्ध व्यवसाय के लाभ एवं सेवा लक्ष्यों में एक उचित सन्तुलन स्थापित करने में सहायक होता है। एक ओर वह विक्रय विभाग के द्वारा फर्म की बिक्री व लाभों में वृद्धि करता है, तो दूसरी ओर ग्राहक व समाज को उत्पाद द्वारा अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करके सामाजिक लक्ष्य की पूर्ति करता है। विक्रय प्रबन्ध संस्था एवं समाज के मध्य एक सम्पर्क सूत्र की भाँति होता है जो व्यवसाय को अधिकतम लाभ व समाज को अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करता है।
5. समन्वयकर्ता - सम्पूर्ण विपणन कार्यक्रम की सफलता विभिन्न तत्त्वों के प्रभावी समन्वय पर निर्भर करती है। विक्रय प्रबन्ध संस्था के उत्पाद, नियोजन, वितरण श्रृंखलाओं, कीमत,
प्रवर्तन तथा विपणन कार्यक्रम के अन्य सभी तत्त्वों के बीच एक श्रेष्ठ समन्वय की व्यवस्था निर्मित करता है। विक्रय प्रबन्ध बाजार में भी विभिन्न वर्गों ग्राहक, वितरक, समाज व सरकार के हितों में एक उचित सामंजस्य उत्पकन्नव करता है।
6. विक्रय संगठन का निर्माण विक्रय प्रबन्ध ही विक्रय विभाग के लिए एक सुदृढ़ संगठन संरचना का निर्माण करता है। यह कर्मचारियों के मध्य उचित आधार पर कार्यों, दायित्वों व अधिकारों का बँटवारा करता है। इसी से विक्रय लक्ष्यों की प्राप्ति सम्भव होती है।
7. प्रतिस्पर्धा में विजय - आधुनिक विक्रय प्रतिस्पर्धात्मक हो गया है।
इसके लिए कुशल व योग्य विक्रेताओं की आवश्यकता होती है जो कि विक्रय प्रबन्ध के द्वारा ही उपलब्ध हो पाते हैं। विक्रय प्रबन्ध के द्वारा प्रभावी विक्रय व्यूहरचना का निर्माण करके प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्त की जा सकती है।
8. ग्राहकों को सन्तुष्टि - विक्रय प्रबन्ध अपनी श्रेष्ठ विक्रय सेवाओं व श्रेष्ठ उत्पादों के द्वारा ग्राहकों को अधिकतम सन्तुष्टि प्रदान करता है। विक्रय प्रबन्ध के माध्यम से ग्राहकों की क्रय समस्याओं का समाधान करके, उन्हें उचित मूल्य पर सही किस्म की वस्तु उपलब्ध कराके तथा उन्हें उत्पाद के बारे में विविध जानकारी प्रदान करके सन्तुष्टि प्रदान की जाती है।
9. व्यवसाय का विस्तार विक्रय कार्य से व्यवसाय का विकास सम्भव होता है।
। कुशल विक्रय प्रबन्ध के द्वारा बाजारों व माँग का विस्तार करके, क्रय व्यवहार का सृजन करके, संस्था के उत्पादों के प्रति अनुकूल प्रवृत्तियों को विकसित करके तथा संस्था को श्रेष्ठ छवि निर्मित करके व्यवसाय में लाभप्रद सम्भावनायें उत्पन्न की जा सकती है।
10. अधिक विक्रय-विक्रय प्रबन्ध योग्य विक्रताओं की नियुक्ति करके उन्हें प्रभावी विक्रय प्रस्तुति के लिए तैयार करता है। इससे विक्रय वृद्धि सम्भव हो जाती है।
11. अधिक लाभ - विक्रय की मात्रा, ग्राहक,
बाजार भाग आदि में वृद्धि हो जाने से लाभों में वृद्धि होती है, क्योंकि इससे प्रति इकाई खर्चों में कमी हो जाती है।
12. ख्याति का निर्माण विक्रय प्रबन्धक के द्वारा संस्था की छवि, ख्याति व प्रतिष्ठा में वृद्धि सम्भव होती है। इससे सन्तुष्ट ग्राहकों, निष्ठावान मध्यस्थों एवं समर्पित वितरकों का निर्माण किया जा सकता है। 13. अर्थव्यवस्था को गति एंव ऊर्जा - विक्रय प्रबन्धक अपने कार्यों से सम्पूर्ण राष्ट्र में प्रभावी माँग को
उत्पन्न करके अर्थव्यवस्था को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करता है। वह किस्म सुधार, नवप्रवर्तन-,
20. शाखा एवं उप-शाखा प्रबन्धकों को आवश्यक निर्देशन देना एवं उनके कार्यों का निरीक्षण करना।
21. संस्था के अन्य प्रबन्धकों के साथ समन्वय बनाये रखना एवं सहयोग का व्यवहार करना।
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