वित्तीय प्रणाली: अर्थ, परिभाषा और कार्य - Financial System: Meaning, Definition and Functions

वित्तीय प्रणाली: अर्थ, परिभाषा और कार्य - Financial System: Meaning, Definition and Functions


वित्तीय प्रणाली में वित्तीय निवेश सम्मिलित है, जैसे धन तथा पूँजी जबकि वास्तविक प्रणाली में वस्तुएं एवं सेवाएँ सम्मिलित हैं। उत्पादन प्रक्रिया के लिए वित्तीय प्रणाली तथा वास्तविक प्रणाली में सामंजस्य होना अनिवार्य है। वित्तीय प्रणाली वित्तीय तथा वास्तविक क्षेत्रों तथा बचतकर्ता एवं निवेशकर्ता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। यह पूँजी निर्माण तथा आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती हैं। मुख्य रूप से सरकार एवं व्यावसायिक क्षेत्र ऋणी होते हैं, जबकि घरेलु एवं विदेशी क्षेत्र बचतकर्ता होते हैं। भारत में स्टॉक तथा बाजार संगठित वित्तीय प्रणाली का हिस्सा है। इनका कार्य देश में बचतों को गतिशील करना तथा निवेश को प्रोत्साहित करना है।


वित्तीय प्रणाली दो शब्दों के मेल से बना है- वित्त तथा प्रणाली।

वित्त मौद्रिक साधनों को दर्शाता है जिसमें राज्य, कंपनी अथवा किसी व्यक्ति के ऋण तथा समता सम्मिलित है। प्रणाली एक अर्थव्यवस्था में आपस में संबंधित संस्थाओं, बाजारों, प्रक्रियाओं, एजेंटों, लेन-देन, दावों तथा दायित्वों के समूह को दर्शाता है। अतः वित्तीय प्रणाली किसी राज्य, कंपनी, संस्था अथवा व्यक्ति को दिए जाने वाले ऋण तथा उधारों को दर्शाती है । अतः वित्तीय प्रणाली किसी राज्य, कंपनी, संस्था अथवा व्यक्ति को दिए जाने वाले ऋण तथा उधारों को दर्शाती है।


जब वित्तीय प्रक्रियाओं में आगम उपलब्ध करने से वित्तीय प्रणाली विकसित होती है तब देश में बचत एवं निवेश में भी वृद्धि होती है। वित्तीय प्रणाली एक ऐसी यंत्रावली प्रदान करती है जिससे कि बचतें निवेशों में परिवर्तित होती है।


परिभाषाएँ


विभिन्न प्रबंधकीय (वित्तीय) विद्वानों ने वित्तीय प्रणाली की परिभाषाएँ निम्नलिखित प्रकार से दी हैं:


• H.R. Machiraju के अनुसार, "वित्तीय प्रणाली को ऐसी संस्थाओं, साधनों तथा बाजारों के समूह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कि बचतों को विकसित करते है तथा उन्हें अत्यधिक कुशल उपयोग में लगते हैं। इस प्रणाली में एकाकी व्यक्ति (बचतकर्ता), मध्यस्थ, बाजार तथा बचतों के प्रयोगकर्ता सम्मिलित हैं।"


• L.M. Bhole के अनुसार, “किसी देश की वित्तीय प्रणाली अथवा वित्तीय क्षेत्र में विशिष्ट तथा गैर विशिष्ट वित्तीय संस्थाएँ संगठित तथा असंगठित वित्तीय बाजार,

वित्तीय संसाधन तथा सेवाएँ सम्मिलित हैं जो कि कोषों के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करती हैं। बाजार में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं तथा प्रणालियाँ एवं वित्तीय अंतःसंबंध भी इस प्रणाली का एक हिस्सा है।”


• P.N. Varshney तथा D. K. Mittal के अनुसार, “वित्तीय प्रणालियाँ दिग्कल तक वित्तीय बाजारों के विकास की सुविधा प्रदान करती हैं तथा सामाजिक रूप से वांछनीय एवं आर्थिक रूप से उत्पादक उद्देश्यों के लिए वित्तीय संसाधनों का कुछ आवंटन करती है।”


• V.A. Avadhani के अनुसार, “वित्तीय प्रणाली मौद्रिक रूप में सेवाओं के प्रावधानों की गतिविधियों को बताती है तथा वास्तविक प्रणाली में गतिविधियों को सुविधाजनक बनती है।” इन परिभाषाओं को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि वित्तीय प्रणाली, वित्तीय बाजार, संस्थाएं एवं संसाधन प्रदान करती है। यह एक ऐसी यंत्रावली प्रदान करती है जिससे बचत को निवेश में बदला जाता है। अतः वित्तीय प्रणाली देश के पूँजी निर्माण में सहायता करती है। पूँजी निर्माण मुख्य रूप से एक देश की वित्तीय प्रणाली पर निर्भर करता है।