विक्रय शक्ति के प्रबन्ध से सम्बन्धित कार्य - Functions related to the management of sales force
विक्रय शक्ति के प्रबन्ध से सम्बन्धित कार्य - Functions related to the management of sales force
विक्रय शक्ति विभाग की आत्मा है। अतः विक्रय विभाग को इस सम्बन्ध में निम्नलिखित कार्य करने पड़ते हैं
1. भर्ती करना - विक्रय विभाग को अपने कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुशल एवं योग्य व्यक्तियों को विक्रयकर्ता के रूप में भर्ती करना पड़ता है। इसके लिए विज्ञापन दिया जाता है। अन्य संस्थाओं से उनके विक्रयकर्ताओं को अपनी संस्था में आकर्षित किया जाता है। लेकिन भर्ती करने से पूर्व कार्य विश्लेषण व कार्य विशिष्ट विवरण तैयार किये जाते है और फिर भर्ती के स्रोतों का निर्धारण किया जाता है।
2. चयन एवं नियुक्ति करना जब भर्ती के स्रोत रूप तय कर लिए जाते है तो फिर विक्रय विभाग का कार्य चयन पद्धति तय करना होता है। इसके लिए शैक्षणिक मापदण्ड तय किये जाते है; शैक्षिक योग्यता व तकनीकि योग्यता तय की जाती है; लिखित परीक्षा ली जाती है। उसके बाद साक्षात्कार किया जाता है। जब सभी प्रकार से प्रार्थी को उपयुक्त पाया जाता है तब उसका चयन किया जाता है।
3. विक्रय कोटा निर्धारित करना विक्रय विभाग ब्रिकी को बनाये रखने व उसमें वृद्धि करने के लिए विक्रयकर्ताओं व डीलरों आदि का कोटा निर्धारित करता है जो उन्हें अधिक से अधिक कार्य करने के लिए बाध्य करता है। यह कोटा मासिक, तिमाही या वार्षिक हो सकता है।
4. प्रशिक्षण देना विक्रय विभाग अपने लिए विक्रयकर्ताओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देने का काम भी करता है। जिससे वे संस्था के लिए उपयुक्त बन सके।
5. कार्यों का निर्धारण करना विक्रयकर्ताओं को कार्यक्षेत्र में भेजने से पूर्व उनके कार्यों का निर्धारण भी विक्रय प्रबन्ध विभाग करता है। विक्रयकर्ता का मुख्य कार्य विक्रय करना है परन्तु उन्हें विक्रय के अतिरिक्त अन्य गैर विक्रय कार्य भी सौंपे जाते हैं, जैसे उधार वसूल करना, पुराने छुटे हुए ग्राहकों से सम्पर्क कर उन्हें खरीदने के लिए प्रेरित करना, बाजार का सर्वेक्षण करना आदि। ऐसा करने से विक्रयकर्ताओं पर नियन्त्रण आसान हो जाता है।
6. पारिश्रमिक तय करना विक्रय विभाग अपने विक्रयकर्ताओं व अन्य डीलरो व वितरको का पारिश्रमिक भी तय करता है। पारिश्रमिक तय करने के कई तरीके है जैसे - वेतन - विधि, कमीशन विधि, वेतन व कमीशन विधि, आहरण लेखा एवं कमीशन विधि, लाभ विभाजन विधि, कोटा विधि, विशेष कार्य विधि व अन्य विधियाँ पारिश्रमिक न्यायपूर्ण व प्रेरणात्मक होना चाहिए।
7. सुसज्जित करना विक्रय विभाग का कार्य यह भी है कि विक्रयकर्ताओं को कार्यक्षेत्र में भेजने से पूर्व सुसज्जित भी करना चाहिए इसके लिए उन्हें वस्तुओं की सूची, विक्रय साहित्य,
वस्तु के नमूने, आदेश पुस्तक, परिचय-पत्र, आदि दिया जाना चाहिए। ऐसा करने से विक्रय वार्तालाप करने में सुविधा रहती है।
8. मार्ग निर्धारण करना-विक्रय प्रबन्ध का कार्य विक्रयकर्ता के मार्गों का निर्धारण करना भी है। यहाँ मार्ग निर्धारण का अर्थ उनके लिए यात्रा का विस्तृत विवरण तैयार करना जिससे कि वे निर्धारित मार्ग से व निर्धारित तिथि पर वहाँ पहुँच सके। उन्हें अपनी इच्छा से मार्ग तय करने या अधिक समय तक रूकने की अनुमति नही होती।
9. सर्वेक्षण करना - विक्रय विभाग विक्रेताओं के सर्वेक्षण का कार्य भी करता है
जिसके लिए सर्वेक्षक नियुक्त किये जाते हैं जो समय-समय पर विक्रेताओं से पत्र व्यवहार करते है; प्रतिवेदन मांगते है तथा व्यक्तिगत निरीक्षण भी मौके पर पहुँचकर करते है।
10. निर्देशन करना विक्रय शक्ति का निर्देशन एवं नियन्त्रण विक्रय प्रबन्ध का एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। इससे विक्रयकर्ता को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे कर्मचारियों में चातुर्य का विकास होता है व ग्राहक सन्तुष्टि में वृद्धि होती है। साथ ही इससे मनोबल बढ़ता है।
11. निष्पादन मूल्यांकन करना विक्रय प्रबन्ध का एक दायित्व यह भी है कि वह विक्रय कर्ताओं के कार्यों का मूल्यांकन करे जिससे की अच्छे विक्रयकर्ताओं को पारितोषित किया जा सके और असफल विक्रयकर्ताओं को अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सके। इस कार्य के लिए विक्रय विभाग निष्पादन प्रमापो का निर्धारण करता है।
3. अन्य कार्य विक्रय विभाग के कुछ कार्य और भी है जिनमें से ये निम्न हैं
1. आकड़ों का संकलन करना विक्रय विभाग विभिन्न प्रकार के आकड़े भी एकत्रित करता है;
जैसे अपनी वस्तु की बिक्री व प्रतियोगी संस्था की वस्तु की बिक्री से सम्बन्धित आकड़ें, बाजार विस्तार या संकुचन के आकड़े, भावी अनुमान के आकड़े, आदि एकत्रित करना।
2. उधार वसूल करना - विक्रय विभाग अपनी उधार राशि को भी वसूलने का कार्य करता है। इसके लिए विक्रयकर्ताओं को अतिरिक्त पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए। जिससे कि वे इस कार्य में रुचि ले और उधार की राशि वसूल कर सकें।
3. आर्थिक स्थिति का पता लगाना विक्रय विभाग डीलरों व वितरकों की आर्थिक स्थिति के बारे में भी पता लगाने का कार्य करता है
जिससे उनको साख की सुविधा दी जा सके। विक्रय विभाग को इस प्रकार की सूचनाएँ गोपनीय रखनी चाहिए।
4. विक्रय अनुसंधान करना आजकल के प्रगतिशील युग में विक्रय अनुसंधान भी आवश्यक है। यदि विक्रय विभाग इसकी अनदेखी करता है तो ऐसी संस्था अधिक दिनो तक नही चल सकती है। इसलिए आजकल विक्रय की नई तकनीकों, क्रेता व्यवहार, विक्रय लागत व
क्रेता मनोविज्ञान, आदि पर अनुसंधान होता रहता है। इस प्रकार विक्रय विभाग का कार्य अनुसंधान करना है।
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