भारतीय मुद्रा बाजार - Indian money market

भारतीय मुद्रा बाजार - Indian money market


भारत में मुद्रा बाजार


सैद्धान्तिक समष्टि अर्थशास्त्र में, वित्तीय आस्तियों के बाजार को ही 'मुद्रा बाजार' कहा जाता है। तथापि, वित्तीय बाजारों के संन्दर्भ में, मुद्रा बाजार को अल्पकालीन निधियों जैसे कि एक वर्ष तक की अवधि वाली निधियों के बाजार के रूप में जाना जाता है। संक्षेप में, मुद्रा बाजार एक ऐसा स्थान है जहाँ एक वर्ष तक की मौलिक परिपक्वाता अवधि वाले उपकरणों के द्वारा निधियां उधार ली जाती हैं तथा उधार दी जाती है।


इस बाजार में ब्याज दरे वित्तीय प्रणाली में अल्पकालीन तरलता की सूचक हैं। मौद्रिक नीति की दृष्टि से, मुद्रा बाजार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है

क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक इस बाजार के माध्यम से अल्पकालीन तरलता (नकदी ) स्थितियों तथा ब्याज दरों को नियन्त्रित करने के लिए हस्तक्षेप करता है। मुद्रा बाजार, दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों एवं विदेशी विनमय बाजार के बीच बढ़ते अन्तर सम्पर्कों को देखते हुए मुद्रा बाजार की दशाएं अन्य दो बाजारों, बाजार अल्पकालीन निधियों की माँग एवं पूर्ति के बीच साम्य बनाए रखने की एक यान्त्रिकी उपलब्ध कराता है।

यह बाजार अर्ह सहभागियों को अपनी अतिरेक अल्पकालीन निधियाँ निवेश करने एवं अपनी आवश्यकतानुसार कमी को पूरा करने हेतु अल्पकालीन निधियाँ उधार लेने के लिए अवसर उपलब्ध कराता है।


माँग/नोटिस/सावधि मुद्रा बाजार सम्मिलित रूप से मुद्रा बाजार के अंग हैं और कोषागार हुण्डियाँ, पुनर्खरीद विकल्प तथा प्रति पुनर्खरीद विकल्प (रेपो एवं रिवर्स रेपो), वाणिज्यिक प्रपत्र, निक्षेप प्रमाण पत्र तथा बिलों की पुनर्कटौती मुद्रा बाजार में क्रय-विक्रय किए जाने वाले उपकरण हैं।