अंतरराष्ट्रीय विपणन तथा घरेलू विपणन - International Marketing and Domestic Marketing
अंतरराष्ट्रीय विपणन तथा घरेलू विपणन - International Marketing and Domestic Marketing
विपणन में वे क्रियायें सम्मिलित है जो वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से उपभोग तक सम्बन्धित है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा वर्तमान एवं सम्बन्धित ग्राहको को उनकी आवश्यक संतुष्टि की वस्तुओं एवं सेवाओं के बारे में योजना बनाने, मूल्य निर्धारित करने, प्रवर्तन करने और वितरण करने का कार्य किया जाता है। कोटलर ने विपणन की एक संक्षिप्त एवं सारगर्भित परिभाषा देते हुए लिखा है कि विपणन से आशय लाभदायक रूप से आवश्यकताओं को पूरा करना है। विपणन की यह परिभाषा 'स्वदेशी विपणन ' तथा ‘अंतरराष्ट्रीय विपणन' दोनों में समान रूप से लागू होती है।
दोनों में ही विपणन की सफलता उपभोक्ता की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने पर निर्भर करती है। इसमें यह जानना आवश्यक है कि क्रेता क्या चाहता है तथा उसी के अनुरूप उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। इसके अतिरिक्त दोनों प्रकार के विपणन में ख्याति का निर्माण (घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार) आवश्यकता है। यदि एक फर्म ख्याति का विकास करने में असफल रहती है तो घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी वस्तुओं का बिकना संदिग्ध रहता है। अन्त में, स्वदेशी तथा अंतरराष्ट्रीय विपणन में उत्पाद सुधार एवं अनुकूलन हेतु शोध एवं विकास को अपनाना आवश्यक होता है।
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