अंतरराष्ट्रीय विपणन आवश्यकता एवं महत्व - International Marketing Need and Importance
अंतरराष्ट्रीय विपणन आवश्यकता एवं महत्व - International Marketing Need and Importance
आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण तथा ग्लोबलाइजेशन के साथ अंतरराष्ट्रीय विपणन की आवश्यकता एवं महत्व तेजी से बढ़ा है। ली एडलर का मत है कि निम्नलिखित कारको ने अन्तराष्ट्रीय विपणन के अवसरों को ज्यादा व्यापक बना दिया है।
1. शहरीकरण में वृद्धि
2. अविकसित या विकासशील देशो का तीव्र विकास की ओर तेजी से अग्रसर होना।
3. जीवन स्तर में वृद्धि।
4. उपभोक्ता क्रयण शक्ति एवं ज्ञान में वृद्धि।
5. उपभोक्ता इच्छाओं में सतत वृद्धि।
टपेस्ट्रा ने अंतरराष्ट्रीय विपणन के प्रति आकर्षण के निम्नलिखित कारण बतलाये है।
1. एक फर्म का उत्पाद घरेलू बाजार में जीवन चक्र की अन्तिम अवस्था में हो सकता है जबकि विदेशी बाजारों में उसके बिकने की व्यापक सम्भावनायें हो जाती है।
2. कुछ उत्पाद पंक्तियों के सम्बन्ध में घरेलू बाजार की तुलना में विदेशी बाजारों मे कम प्रतिस्पर्धा हो सकती है। अतः लाभ उठाने हेतु अंतरराष्ट्रीय विपणन को अपनाया जा सकता है।
3. यदि किसी फर्म के पास अतिरिक्त क्षमता है तो वह विदेशी बाजारो में अनुकूल मार्जिन पर उसका उत्पादन एवं विपणन कर सकती है।
4. विश्व बाजार में प्रवेश की सदैव व्यापक एवं लाभप्रद सम्भावनाएँ विद्यमान रहती है। उदाहरण के लिए अमेरिका अपने 90 प्रतिशत उत्पादों एवं सेवाओं को अमेरिकी बाजार की अपेक्षा विश्व के अन्य बाजारों में लाभप्रद रूप से बेचता है। अंतरराष्ट्रीय विपणन की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित है।
1. प्रतिस्पर्धा में वृद्धि के कारण एक व्यवसायिक फर्म अन्य राष्ट्रो में उत्पाद के विक्रय की सम्भावनाओं को तलाशने हेतु अंतरराष्ट्रीय विपणन का सहारा ले सकती है।
2. यदि उत्पाद अप्रचलनता के स्तर तक आ पहुंचा है तो अन्य राष्ट्रो में उसके विक्रय की सम्भावना को तलाश जा सकता है।
3. एक फर्म अपनी क्षमता के पूर्ण उपयोग एवं विस्तार हेतु अन्तराष्ट्रीय विपणन की अपना सकती है। 4. बढ़ती हुई मांग एवं क्रय शक्ति के मद्दे नजर एक फर्म अंतरराष्ट्रीय विपणन को अपना सकती है।
5. विभिन्न राष्ट्रों में उपलब्ध व्यवसायिक प्रेरणाओं का लाभ उठाने हेतु भी एक फर्म अन्तराष्ट्रीय विपणन को अपनाती है।
महत्व
(I) राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से अंतरराष्ट्रीय विपणन का महत्व राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टि
से अंतरराष्ट्रीय विपणन के महत्व को निम्नलिखित शीर्षको में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1. तीव्र आर्थिक विकास आर्थिक विकास की ऊँची दरों का सीधा सम्बन्ध निर्यातो के ऊँची दरो से है।
इससे स्पष्ट है कि जो देश तीव्र गति से आर्थिक विकास करना चाहते है उन्हें अपने निर्यातों को बढ़ाना होगा। निर्यातो से देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है। इसका उपयोग प्राथमिकता के क्रम में देश की अर्थव्यवस्था लिए आवश्यक सयन्त्र, मशीने, उपकरण मंगाने के लिए किया जाता है। खाद्यान्नो का उत्पादन बढ़ाने के लिए मूल्यवान कृषि उपकरणों व उर्वरको का आयात कर कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। अतः यह स्पष्ट है कि देश की अर्थव्यवस्था के विकास में निर्यात विपणन एक गतिशील घटक का कार्य करता है।
2. प्राकृतिक संसाधनो का लाभदायक उपयोग निर्यात विपणन को बढ़ाकर एक देश अपने यहाँ विद्यमान प्राकृतिक संसाधनो का लाभदायक उपयोग कर सकता है।
निर्यातो से विदेशी मुद्रा अर्जित कर अपने देश में अनेक प्रकार के उद्योग स्थापित किये जा सकते है। इससे अनेक प्रकार के खनिजो तथा वनो से प्राप्त सम्पदाओं का कुशलता से उपयोग निर्यात विपणन में किया जा सकता है।
3. आयतों का भुगतान - देश के विकास हेतु विकासशील देशो की सरकारें औद्योगिक वातावरण का निर्माण करती है। इसके लिए बड़ी मात्रा में पूँजीगत उपकरणो, कच्चे माल, आवश्यक तकनीकी जानकारी का आयात करना आवश्यक होता है। विकासशील देशो के आयातों में तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की काफी आवश्यकता होती है।
इस स्थिति से निपटने का एकमात्र विकल्प यही हे
कि देश में अधिकाधिक निर्यात अधिमुखी उद्योग स्थापित किये जाये। अपने निर्यात को बढ़ाकर बहुमूल्य विदेशी मुद्रा देश की सरकार को उपहार में दे सकते है। जिससे बढ़े हुए आयातो का भुगतान करने में सरकार को सहायता मिलती है।
4. रोजगार के अवसरों में वृद्धि - विदेशी बाजारो मे निर्यातो को बढ़ाने के लिए जहाँ एक ओर निर्यात अधिमुखी इकाइयों की विभिन्न क्षेत्रों में स्थापना होती है वही दूसरी ओर विद्यमान फर्म अपने उत्पादन स्तर को बढ़ाती है। इससे रोजगार के नये अवसरों का सृजन होता है। निर्यात विपणन से भी बेरोजगारी की समस्या को सुलझाया जा सकता है। निर्यात विपणन के नये-नये क्षेत्रों का पता लगाकर रोजगार के अवसरो को बढ़ाया जा सकता है।
5. राष्ट्रीय आय में निर्यातो की भूमिका- देश की राष्ट्रीय आय में भी निर्यातो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सुव्यवस्थित निर्यात विपणन से इसे अच्छे स्तर तक बढ़ाया जा सकता है।
6. जीवन स्तर में वृद्धि - निर्यात विपणन देशवासियों के जीवन स्तर को उन्नत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकता है। निर्यात विपणन से जो बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित की जाए उसका उपयोग ऐसी वस्तुओं के आयात में किया जा सकता है। जो देश की जनता को अच्छा जीवन स्तर प्रदान करें। इसके साथ ही निर्यात विपणन में जहाँ व्यक्तिगत फर्मों को लाभ होता है वहीं अनेक रोजगार के अवसरों का भी सृजन होने से देशवासियों के आय में वृद्धि होती है।
(II) व्यक्तिगत फर्म के दृष्टिकोण से महत्व अंतरराष्ट्रीय विपणन से न केवल देश की अर्थव्यवस्था लाभान्वित होती है बल्कि देश में विद्यमान व नयी स्थापित होने वाली फर्मों को भी अनेक लाभ प्राप्त होते है। व्यक्तिगत फर्म के लिए अन्तराष्ट्रीय विपणन के महत्व का निम्नलिखित शीर्षको में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1. लाभदायक विक्रय परिमाण निर्यात विपणन के द्वारा एक अपने लाभदायक विक्रय परिमाण में वृद्धि कर सकती है। देशी विक्रय के लिए भिन्न मूल्यों वाले उत्पादो व विदेशी बाजारों में विक्रय करने के लिए भिन्न मूल्यों व किस्मों की वस्तुओं का निर्माण किया जा सकता है। ऐसे विदेशी बाजार, जो कीमत के प्रति संवेदनशील नही है उनके लिए भी पृथक उत्पादों का निर्माण कर प्रतियोगिता के उत्पादों से पर्याप्त विभिन्नीकरण करके फर्म अपने विक्रय परिमाण को बड़ी सीमा तक लाभप्रद बना सकती है।
2. देशी बाजारो में प्रतियोगिता - प्रत्येक देश में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन हेतु एक ओर विद्यमान फर्मे अपने उत्पादन स्तर को बढ़ा रही है तो दूसरी ओर नवीन फर्मे प्रवेश करती जा रही है। इस कारण देशी बाजारों में प्रतियोगिता कठिन होती जा रही है। निर्यात बाजारों में प्रतियोगिता के रूप व स्तर का स्पष्ट अन्तर है। वहाँ कीमत प्रतियोगिता नही होकर किस्म व प्रभावों की प्रतियोगिता है। जैसे इन्जीनियरिंग उत्पादो के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापक प्रतियोगिता होते हुए भी भारतीय निर्यातक फर्मों ने अच्छी मात्रा में लाभदायक विक्रय किया है।
3. प्रबन्धकीय चातुर्य के विकास में सहायता - घरेलू विपणन जितना सरल है, उसकी तुलना में निर्यात विपणन अत्यन्त ही चुनौतीपूर्ण है। निर्यात विपणन में एक फर्म दो स्तरों पर कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है।
निर्यात विपणन प्रबन्धक व कर्मचारियों को नित्य नयी चुनौतीयों, समस्याओं व परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। विदेशी फर्मे विक्रय को बढ़ाने के लिए क्या-क्या उपाय काम में ला रही है, उनके विक्रय की अपील किस बिन्दु पर केन्द्रित है, इसकी जानकारी प्राप्त कर वे अपने विपणन कार्यक्रम में भी परिवर्तन करते हैं।
4. उत्पाद अप्रचलनता प्रत्येक उत्पाद का अपना जीवन चक्र होता है। उत्पाद जो देशी बाजारों में अप्रचलित हो जाते है उनकी बिक्री के लिए विदेशी बाजारों में अवसर विद्यमान रहते है। अनेक ऐसे उत्पाद है जो विकसित देशो में अप्रचलन की अवस्था में पहुँच चुके हैं पर विकासशील देशो में उन्हे आसानी से बेचा जा सकता है। अनेक विकसित देशों की सेना में जिन हथियारों को उपयोग से निकाल दिया जाता है
उन हथियारों को विकासशील देश खुशी-खुशी ले लेते है। इससे स्पष्ट है जो उत्पाद देशी बाजारों में अप्रचलित हो चुके है, उसका निर्यात ऐसे देशो में करके फर्म लाभ कमा सकती है जहाँ अभी भी इसके विक्रय अवसर विद्यमान है।
5. बढ़ती हुई क्रय शक्ति - अनेक देश गुलामी से आजाद हुए। इन देशो में स्वयं की सरकारें है। कल्याणकारी राज्य की भूमिका का निर्वाह करते हुए विभिन्न शासन व्यवस्था ने अपने देश की अर्धव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। इससे उत्पादन में वृद्धि हुई हैं और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है।
व्यक्तिगत फर्मे इस बढ़ी हुई आय से उत्पन्न क्रय शक्ति में वृद्धि का पूरा लाभ उठा सकती है।
जिन वस्तुओं की मांग में वृद्धि हुई है, उसका उत्पादन करके निर्यात विपणन के द्वारा व्यक्तिगत फर्मे इस स्थिति का पूर्ण विदोहन कर सकती है।
6. उपक्रम का विकास नियोजित अर्थव्यवस्था वाले देशों की सरकारें अपने आयातो में कमी लाने के लिए कई प्रकार के प्रतिबन्ध लगाती है। उपक्रम यदि विदेशी मुद्रा का अर्जन निर्यातो से करता है तो उसके कुछ भाग को वह आवश्यक मशीनों आदि के आयात पर व्यय कर सकता है। इस कारण फर्में अपने निर्यात विक्रय को अधिकाधिक बढ़ा कर बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकती है। इसके एक भाग का उपयोग ये उपक्रम आवश्यक मशीनों, उपकरणों, कच्चा माल तथा तकनीकी जानकारी के आयात में कर अपने उपक्रम का आधारभूत विस्तार करने में सक्षम हो सकते है। इस विकास का देशी व निर्यात विपणन में नये सिरे से लाभ उठा सकते है।
(III) अन्य दृष्टियो से महत्व
अन्य कोई दृष्टियों से भी इसका महत्व है जो इस प्रकार है
1. अंतरराष्ट्रीय सहयोग निर्यात विपणन से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना भी जन्म लेती है। विकसित देशों द्वारा विभिन्न देशों के आयात के लिए विभिन्न देशों के अभ्यंश तय कर दिये जाते है। जैसे अमेरिका व पश्चिमी देशो ने सूती कपड़ो के आयातों के लिए विभिन्न देशों के लिए अभ्यंश तय किये है। भारत का भी अपना अभ्यंश तय है। इस तय किये गये अभ्यंश की सीमा तक भारतीय निर्यातक इन देशों को सूती वस्त्रो का निर्यात कर सकते है। इस प्रकार की व्यवस्था से निर्यात विपणन अंतरराष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि करता है।
2. राजनैतिक शान्ति में सहायता अनेक देश ऐसे अनेक राष्ट्रो को विभिन्न वस्तुओं व सेवाओं का निर्यात करते है, जिनका राजनैतिक विचारधारा के धरातल पर निकट का भी सम्बन्ध नहीं है। रूस व अमेरिका की राजनैतिक विचारधारा सर्वथा भिन्न है फिर भी रूस अमेरिका से अनाज का आयात करता है। भारत भी अनेक देशों को निर्यात करता है। इससे कुछ सीमा तक राजनैतिक शान्ति में सहायता मिलती है।
इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय विपणन से देश की अर्थव्यवस्था को तो अनेक प्रकार के लाभ मिलते ही है. साथ ही व्यक्तिगत फर्म को भी अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।
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