अंतरराष्ट्रीय बिक्री प्रबंधन - international sales management
अंतरराष्ट्रीय बिक्री प्रबंधन - international sales management
अंतरराष्ट्रीय विपणन में संलग्न विपणन कम्पनियाँ मुख्यत: तीन प्रकार का व्यवसाय करती है। आयात व्यापार, पुनः निर्यात व्यापार एवं निर्यात व्यापार इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय विपणन के क्षेत्र को निम्नलिखित भागो में विभाजित किया जा सकता है।
1. आयात व्यापार आयात व्यापार में संलग्न अंतरराष्ट्रीय विपणन कम्पनियाँ दूसरे देशों से माल अथवा वस्तुओं का आयात करके उन्हें अपने देश में विक्रय करती है। ऐसा देश में उस वस्तु या माल की पर्याप्त उपलब्धता नही होने अथवा दूसरे देशों में उसकी तुलनात्मक लागत कम होने पर किया जाता है।
2. पुन: निर्यात व्यापार - पुनः निर्यात व्यापार में विपणन कम्पनियाँ दूसरे देशों से कच्चे माल अथवा अर्द्धनिर्मित माल का आयात करके,
उसे निर्मित माल में परिवर्तित करती है। इसके पश्चात् निर्मित माल अथवा वस्तुओं का अन्य देशों को निर्यात करती है। उदाहरण जापान खनिज संसाधनों की दृष्टि से सम्पन्न नहीं है। जापान अनेक खनिज संसाधनों का आयात करता है। विपणन फर्मे पहले आयात करती है एवं निर्मित माल तथा वस्तुओं को विश्व के अनेक देशो को निर्यात करती है।
3. निर्यात व्यापार – निर्यात व्यापार के अन्तर्गत विपणन कम्पनियाँ दूसरे देशों में माल, वस्तुओं अथवा सेवाओं का विक्रय करती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में निर्यात का महत्वपूर्ण स्थान है। मोटे तौर पर अंतरराष्ट्रीय विपणन कम्पनी विदेशों में निम्नलिखित विधियों से परिचालनों का संचालन कर सकती है।
(क.) विदेश में शाखा की स्थापना इसके अन्तर्गत एक निर्यातक विदेश में अपनी शाखा खोल सकता है। यह शाखा निर्यात बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादों का संयोजन एवं पैकिंग कर सकती है। कभी-कभी पूरा उत्पाद ही विदेश में स्थापित शाखा बना सकती है। विदेश में शाखा की स्थापना पर निर्यात बाजार की आवश्यकता के अनुरूप योग्य व चतुर विक्रयकर्ताओं की आवश्यकता होगी।
(ख.) संयुक्त साहस व सहयोग अंतरराष्ट्रीय विपणन के क्षेत्र में संयुक्त साहस एवं सहयोग का प्रभावी उपयोग हो सकता है। इसके अन्तर्गत निर्यातक कम्पनी किसी अन्य कम्पनी के साथ मिलकर कार्य करती है।
ऐसी व्यवस्था को अपनाकर कम्पनी घरेलू विपणन एवं अंतरराष्ट्रीय विपणन दोनों का प्रभावी रूप से निष्पादन कर सकती है।
(ग) अनुज्ञापन व्यवस्थाएँ इस व्यवस्था के अन्तर्गत निर्यातक कम्पनी अन्य देश की फर्म को अनुज्ञापत्र में वर्णित शर्तों के आधार पर विक्रय करने का अधिकार देती है। इसमें विदेशी फर्म को उत्पाद एवं ब्राण्ड का उपयोग करना होता है। विदेशी फर्म को निर्यातक कम्पनी के नाम, ख्याति एवं प्रतिष्ठा का लाभ मिलता है। निर्यातक कम्पनी विदेशी कम्पनी से विक्रय
की कुल राशि का निश्चित प्रतिशत प्रतिफल के रूप में प्राप्त करती हैं। (घ) परामर्श सेवाएँ - अंतरराष्ट्रीय विपणन के क्षेत्र में परामर्श सेवाएँ भी आती है। विकसित
देश विकासशील देशों को अपने यहाँ आधारभूत उद्योगों की स्थापना के लिये परामर्श सेवाओं का निर्यात करते है। इसके लिये निर्यातक कम्पनी अपने परामर्शदाता भेजती है जो निर्माण स्थल पर अपना मार्गदर्शन देते हैं।
(ङ) तकनीकी तथा प्रबंधकीय जानकारी अंतरराष्ट्रीय विपणन के क्षेत्र में तकनीकी एवं प्रबंधकीय जानकारी भी सम्मिलित है। निर्यातक देश अपने तकनीकी विशेषज्ञ को आयातक देशों में भेजकर वहाँ के व्यक्तियों को तकनीकी एवं प्रबंधकीय चातुर्य का ज्ञान कराते है।
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