उपभोक्ता अनुसंधान का परिचय - Introduction to Consumer Research

उपभोक्ता अनुसंधान का परिचय - Introduction to Consumer Research


उपभोक्ता अनुसंधान के क्षेत्र में अब इतनी परिपक्वता आ गयी है कि आज वह व्यवसाय के प्रशासकों के कार्य-निष्पादन में सुनिश्चित योगदान प्रदान कर रहा है। व्यावसायिक दृष्टि से भी उपभोक्ता अनुसंधान एक ऐसा बहुमुखी उपकरण बन गया है कि इसका उपयोग अनेक प्रकार से उपभोक्ताके अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। यह औद्योगिक उत्पादों एवं उपभोक्त वस्तुओं के निर्माणकर्ताओं एवं वितरकों के लिए तो उपयोगी है ही, साथ ही इसका प्रयोग अनेक प्रकार की सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए भी किया जाता है। थोक तथा खुदरा व्यापारी भी इसके उपयोग से लाभान्वित होते हैं। इस दृष्टि से इसका उपयोग सम्पूर्ण संगठन अथवा उसके एक भाग के लिए किया जा सकता है। एक बहु उत्पाद निर्माता की दशा में उपभोक्ता अनुसंधान का उपयोग सभी या कुछ उत्पादों या किसी एक उत्पाद के लिए ही किया जा सकता है।


एक बहुमुखी उपकरण होने के कारण ही अध्ययन के लिए उपभोक्ता अनुसंधान एक कठिन विषय बन गया है। इसका तात्पर्य किसी उपभोक्ता सम्बन्धी समस्या के प्रासंगिक तथ्यों के अध्ययन तथा उनकी खोज से हैं। चूँकि प्रत्येक प्रकार की व्यावसायिक स्थिति की अपनी अनेक विशेष समस्याएँ होती हैं, अतः उपभोक्ता अनुसंधान एक जटिल प्रक्रिया है। यह केवल उपभोक्ताओं की पसंदगी तथ नापसंदगी के बारे में जानने से संबंधित ही नहीं है वरन् यह तो एक प्रकार का उपभोक्ता सर्वेक्षण है। उपभोक्ता अनुसंधान में उपभोक्ताके प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित समस्याओं का व्यवस्थित अध्ययन विशलेषण एवं समाधान सम्मिलित है। ब्रायड वेस्टफाल तथा स्टाइच का भी यही मत है। इसके अनुसार संगठन विभिन्न प्रकार से उपभोक्ता अनुसंधान का प्रयोग करते हैं, विशेषतः नव उत्पाद विकास निर्णय आदि में उपभोक्ता अनुसंधान का व्यापक प्रयोग किया जाता है। उपभोक्ता अनुसंधान का प्राथमिक लक्ष्य जागरुकता को मापना या प्रवृत्तियों एवं अभिमतों का संकलन करना है।

विभिन्न प्रकार के संगठनों द्वारा निर्णयन हेतु वांछित सूचनाओं के संकलन के मद्दे नजर उपभोक्ता अनुसंधान का बहुमुखी उपयोग किया जाता है। ब्राऊन का मत है कि "उपभोक्ता अनुसंधान जटिल उपभोक्ता समस्याओं के समाधान में बाह्र स्रोत की सहायता या स्टाफ कार्य के रूप में मुख्यतः विद्यमान रहता है।"


इसमें समस्याएँ ली जाती हैं तथा प्रबन्धकीय निर्णयन के सन्दर्भ में समाधानों का प्रयोग किया जाता है। यद्यपि उपभोक्ता क्षेत्र तथा प्रबन्ध के द्वारा कुछ प्रतिबन्ध अवश्य आरोपित किये जाते है, फिर भी सही एवं शुद्ध निर्णय विशिष्ट चातुर्य तथा उपयुक्त समंकों पर निर्भर करता है। उपभोक्ता अनुसंधान पद्धतियों के आधार पर वैज्ञानिक पद्धतियां निहित हैं। वैज्ञानिक पद्धति में समस्या समाधान का वैज्ञानिक दृष्किोण तथा व्यक्तिगत समस्या के विशलेषण के विशिष्ट साधन सम्मिलित हैं। इस तथ्य को दृष्टिगत रखकर प्रस्तुत अध्ययन में उपभोक्ता अनुसंधान का सामान्य परिचय दिया गया है।


टूल बाक्स- 1


उपभोक्ता अनुसंधान


उपभोक्ता अनुसंधान जटिल उपभोक्ता समस्याओं के समाधान में बाह्र स्रोत की सहायता या स्टाफ कार्य के रूप में मुख्यतः विद्यमान रहता है।


उपभोक्ता अनुसंधान को परिभाषित करने तथा उसकी अवधारणा को समझने से पूर्व वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोक्ताके अर्थ से परिचित होना आवश्यक है।


अमेरिकन उपभोक्ता संघ ने उपभोक्ताको उन व्यावसायिक क्रियाओं के रूप में परिभाषित किया है जो वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रवाह को उत्पादक से उपभोक्ता या प्रयोगकर्ता तक निर्देशित करती है।


उपयुक्त परिभाषा से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता एक व्यापक अवधारणा है। इसके अन्तर्गत वे अनेक व्यावसायिक क्रियाएँ सम्मिलित की जाती हैं जो वस्तुओं के संयोजन, प्रमाणीकरण एंव श्रेणीयन, आवेष्टन, मार्का निर्धारण, संग्रहण, विज्ञापन एवं विक्रय से संबंधित होती हैं। इन व्यावसायिक क्रियाओं द्वारा ही उत्पादकों या निर्माताओं से वस्तुओं एवं सेवाओं का भौतिक प्रवाह उपभोक्ताओं या उनके प्रयोगकर्ताओं तक सम्भव हो पाता है।


अन्य शब्दों में, उपभोक्ता क्रियाओं में लगे व्यक्तियों का दायित्व न केवल उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं का पता लगाकर उनको उन उत्पादों एवं सेवाओं में परिवर्तित करना होता है जिन्हें वे बेचना चाहते हैं, अपितु इस हेतु उनका प्रमुख दायित्व यह भी है

कि इन वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग उत्पन्न करें तथा इसके बाद उस मांग का विस्तार करने के लिए बराबर प्रयत्नशील रहें। उपभोक्ता के अंतर्गत इन व्यापक क्रियाओं को दृष्टिगत रखकर ही कोटलर ने उपभोक्ता की परिभाषा इस प्रकार दी है, "उपभोक्ता एक ऐसी मानव क्रिया है जो विनिमय की प्रक्रियाओं द्वारा अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं की संतुष्टि की दिशा में निर्देशित एवं परिचालित होती है।"


कोटलर का मत है कि उपभोक्ता मानवीय एवं सामाजिक आवश्यकताओं को पहचानने एवं उन्हें पूरा करने से सम्बंन्धित है।" उपभोक्ता लाभदायकता पूर्ण तरीके से आवश्यकताओं को पूरा करने से सम्बन्धित है। एक स्थान पर कोटलर ने लिखा है कि "उपभोक्ता को उपभोक्ताओं एवं व्यवसायों को माल एवं सेवा सृजित करने,

प्रदान करने तथा संवर्द्धन करने आदि कार्य के रूप में देखा जा सकता है। उपभोक्ता व्यक्ति इस प्रकार के निम्न कार्य में संलग्न रहते हैं- माल, सेवा, अनुभव, घटना, व्यक्ति स्थान, गुण, संगठन, सूचना एवं विचार।"


वस्तुतः उपभोक्ता की अवधारणा ही उपभोक्ता अनुसंधान के औचित्य के लिए एक मूल आधार है, क्योंकि उपभोक्ता अवधारणा यह बताती है कि "एक ग्राहक का अनुकूलन ऐसे संघटित उपभोक्ता द्वारा परिपुष्ट होता है जिसका उद्देश्य संगठन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मूल सिद्धान्त के रुप में ग्राहक को सन्तुष्टि प्रदान करना होता है।"


उपभोक्ता की अवधारणा से यह स्पष्ट है कि वर्तमान युग में उत्पादन की तुलना में उपभोक्ता का विशेष महत्व है। यही कारण है

कि आज सर्वप्रथम बाजार की आवश्यकताओं अर्थात उपभोक्ता इच्छाओं, आवश्यकताओं एवं मांगों को समझने के प्रयास किये जाते हैं और तत्पश्चात उन आवश्यकताओं के अनुसार ही वस्तुएँ एवं सेवाएँ उत्पादित की जाती हैं। यही आज उपभोक्ताका कोर अवधारण है (रेखाचित्र देखें)। इस तथ्य के आधार पर ही उपभोक्ता कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए उपभोक्ता अनुसंधान एक सहयोगी कार्य माना जाता है, क्योंकि उपभोक्ता अनुसंधान बाजार की दशाओं को समझने, उनकी खोजबीन करने, उनकी विशलेषण करने तथा उनकी व्याख्या करने में सहायक होता है।