माँ / नोटिस / सावध मुद्रा बाजार - Ma / Notice / Caution money market

माँ / नोटिस / सावध मुद्रा बाजार - Ma / Notice / Caution money market


माँग मुद्रा बाजार मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अल्पकालीन अविध (प्रायः 14 दिन तक, लेकिन इससे अधिक भी) के लिए निधियों को उधार लेने तथा उधार देने का बाजार हैं। ये सौदे टेलीफोन पर किए जाते हैं तथा इसकी सूचना भारतीय रिजर्व बैंक को दे दी जाती हैं। वाणिज्यिक बैंक प्रायः अस्थायी तौर पर निधियों की कमी का सामना करते हैं (उदाहरणार्थ, नकदी प्रारक्षित अनुपात तथा सांविधिक तरलता अनुपात वचनवद्धताहों को पूरा करने के लिए तथा निधियों के अचानक बहिर्गमन से) या कभी-कभी निधियों का अतिरिक भी होता है। निधियों की कमी हो जाने पर कोई वाणिज्यिक बैंक अतिरेक निधियों वाले वाणिज्यिक बैंक से उधार लेता हैं। इस बाजार में सारे सौदे टेलीफोन पर होते हैं।


यदि उधारी एक दिर (रात भर ) के लिए होती है तो इसे माँग मुद्रा' कहा जाता है। इस प्रखण्ड को पूरी रात के लिए बाजार कहा जाता है। यदि उधारी की अवधि एक दिन से अधिक किन्तु 14 दिन तक होती है। तो इसे 'नोटिस मुद्रा' कहा जाता है। 14 दिन से अधिक की अवधि के लिए गए सौदे सावधि मुद्रा' के रूप में जाने जाते हैं। भारतीय मुद्रा बाजार में अधिकांश लेन-देन माँग मुद्रा एवं नोटिस मुद्रा हैं।


इस बाजार में, वाणिज्यक बैंक और प्राथमिक डीलर दोनों ही उधार ले और दे सकते हैं,\

लेकिन वित्तीय संस्थान ( भारतीय जीवन बीमा निगम, यू. टी. आई., जी.आई.सी. आई.डी.बी. आई., नाबार्ड, आई.सी.आई.सी.आई.) तथा म्यूचुअल फण्ड केवल उधार दे सकते हैं। एक विनियामक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक नैत्यिक रूप से मुद्रा बाजार में निधियों की पूर्ति (उधार देकर ) करता रहता है तथा उधार लेकर अतिरेक निधियों को समेटता रहता है। वित्तीय क्षेत्रक सुधारों के एक अंग के रूप में, भारतीय रिजर्व बैंक धीरे धीरे इस बाजार को विशुद्ध रूप से एक अन्तर बैंक बाजार (प्राथमिक डीलरों सहित ) बनाने की और अग्रसर है तथा गैर-बैंक प्रतिभागियों को इस बाजार से बाहर रखने की बात की जा रहा है।