मासलो के अभिप्रेरक सिद्धान्त - Maslow's Motivational Theory

मासलो के अभिप्रेरक सिद्धान्त - Maslow's Motivational Theory


डॉ. अब्राहम मासलो ने मानवीय अभिप्रेरणा को प्राथमिक चरण का सैद्धान्तिक किया है उसके सिद्धान्त पर प्रबंधकों व व्यवसायियों द्वारा पूर्णतः सहमति प्रकट की गयी है। मासलो के इस मानवीय आवश्यकताओं के सिद्धान्त को पांच महत्वपूर्ण स्तरों में विभाजित किया जा सकता है। इन स्तरों को उनकी महत्ता के अनुसार निम्न स्तर बायोजैनिक जरुरतों से उच्च स्तरीय मानसिक जरुरतों के महत्वानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है।


मासलो के इस सैद्धान्तिक सोच अनुसार, एक व्यक्ति में निम्न अभिप्रेरणाएं हो सकती है:


• क्रियात्मक आवश्यकताएं जैसे की भूख और प्यास


■ सुरक्षा आवश्यकताएं जैसे दुर्घटनाएं और अवस्थता


■ प्यार और व्यवहारिकता


• वैधानिक स्थिति एवं आत्म-सम्मान


■ आत्म-वास्तविकता

उद्देश्य के मानक चयन का निर्धारण करते हैं। उदाहरण के लिए उपभोक्ता जो आतम-सम्मान और वैधानिक स्थिति के लिए सशक्त प्रयासरत होते हैं, किसी भी उत्पाद के क्रयण प्रक्रिया में अपने / अपनी छवि के अनुरूप ही चयन करते हैं।


विभिन्न उपभोक्ता की समान उत्पाद के क्रयण में भिन्न-भिन्न अभिप्रेरणाएं होती हैं। इसलिए, उपभोक्ता खंड विभाजन में चयन प्रक्रिया विशेष योगदान देती है अतः किसी भी उत्पाद की पोज़िशनिंग के समय अभिप्रेरक व महत्वपूर्ण कारक होते हैं। उदाहरण के लिए. कुछ उपभोक्ता / ग्राहक खाद्य पदार्थ मात्र भूख को शांत करने के लिए खरीदते हैं, जबकि कुछ मात्र मित्रता या पारिवारिक समूह में मिल बैठकर खाने के उद्देश्य से अथवा अग्रसित होटल द्वारा दिए गए गॉरमेट भोज के परिणामस्वरुप होते हैं। प्रत्येक खंड में समान उत्पाद के क्रयण में भिन्न-भिन्न उद्देश्य होते हैं। इसलिए किसी खंड में मात्र भूख की संतुष्टि के लिए या सुविधाजनक या उपयुक्त कीमत के कारण, ये कारक उन खंडों में अव्यवहारिक हो सकता है, जो गॉरमेट भोजन के इच्छुक हों।


क्रियात्मक आवश्यकताएं- ये वे उत्पाद होते हैं जो सजीवक जीवन को सम्मिलित करते हैं जैसे भोजन, पानी, वायु, शरण, कपड़ा और सैक्स, जो चिरकालिक रूप से असंतुष्ट प्रभुत्व रखते हैं।


• सुरक्षा आवश्यकताएं ये शारीरिक सुरक्षा के सामूहिकता से सम्मिलित होते हैं। इस सनक का वर्गीकरण, नियमितता, समयसारणी, अभिव्यक्ति समर्थता, स्थिति, आस्थाओं और स्वयं की प्रमुखता आदि को सम्मिलित करती है। स्वास्थ्य को भी सुरक्षा उद्देश्य का अंश माना जा सकता है।


■ सामाजिक जरुरतें यह जरूरतें प्यार, लगाव, स्नेह और स्वीकारिता के कारक होती है।


• अहंकारक आवश्यकताएं ये आंतरिक या बाहरी उन्मुक्ताओं उत्पादित होती है। मन ही मन में उपजित व्यक्तिगत आवश्यकताएं जब किसी कार्य को पाने या क्रियान्वित करने के समय सफलता, स्वयंभू सम्मान, स्वीकारिकता स्वतन्त्रता, और व्यक्तिगत संतुष्टि इत्यादि को मानक तंत्र पर रखा जाता है।


। स्वंय वास्तविकता की जरुरत यह किसी व्यक्ति की उसकी इच्छाओं को पूरा करने की क्षमतागत संदर्भित किया जाता है।


जरुरत के पदानुक्रम और विपणन अनुप्रयोगों का मूल्यांकन


मासलो के सिद्धान्तों के मुख्य प्रतिकूलता यह है

कि अनुभवजन्य परीक्षण पारित नहीं किया जा सकता। तदनन्तर उच्च जरुरत की प्राथमिकता को वरियता देने से पहले एक आवश्यकता की पूर्ति में उच्चतर सूक्षमता का मूल्यांकन किया जाना सम्भव नहीं है।


मासलो के सिद्धान्त अनुसार, व्यापक ढांचे को विपणनकर्ता अपने उत्पाद के लिए उचित अपीलों को विकसित करने की कोशिश करता है। पदानुक्रमता भावी विपणनकर्ताओं को अपने विज्ञापित अपीलों का प्रभाव एक बड़े वर्ग द्वारा सांझा किये जाने की संभावना के स्तर को तराशता है।


पदानुक्रमता उत्पाद की स्थिति या पुर्नस्थापना के काबिल बनाता है।

आवश्यकताओं के उदाहरणार्थ, उपलब्धि, शक्ति और संबद्धता को विज्ञापनों द्वारा एकीकृत किया जा सकता है।


आवश्यकता सिद्धान्तों का त्रिवादक


कई मनोवैज्ञानिकों का मत है कि मूलभूत आवश्यकताओं जैसे कि समर्थता संबद्धता और उपलब्धि के रूप में हैं"


समर्थता - सामर्थता की आवश्यकता प्रत्येक मानव के पर्यावरण को नियन्त्रित करने की एक इच्छा है जिसको दूसरों से अधिक प्रयोग करने की हैसियत को जन्म देता है संबद्धता - इस आवश्यकता सुझाव देती है कि किसी व्यक्ति की इच्छाओं के किस स्तर तक प्रभावित किया जा सकता है, जिसमें स्वीकार्यता और मित्रता भी सम्मिलित है,

जिनकी संबद्धता दूसरे लोगों के सामाजिक संबद्धता पर निर्भर करती है।


. उपलब्धि यह आवश्यकता उन व्यक्ति विशेषों के व्यवहार एवं अपनेपन को प्रभावित करती है। यह आवश्यकता अन्ततः आत्म-वास्तविकता और अहंकारी आवश्यकता के लिए उपयुक्त रुप से सम्बद्धता को अंकित करती है। ऐसे लोग जबरदस्त



आत्म-विश्वास प्रदर्शित करते हैं। वे स्वेच्छा से जोखिम उठाने और जनमतों का स्वागत करते हैं। पुरस्कार जो उनके जनमतों के लिए अति आवश्यक है क्योंकि ऐसे जनमतों से उनको अपनी कार्यशैलीयों या कमियो के बारे में ज्ञान मिलता रहता है। ऐसे लोग आमतौर पर आत्म विश्वस्त होते हैं,

जोखिम उठाने में सक्षम होते हैं, अपने आस-पास के वातावरण का सक्रिया से अध्ययन करते हैं, और प्रतिपुष्टियों का मूल्यांकन करते हैं। वित्तीय पुरस्कार उन प्रतिपुष्टियों का गुणांक होता है कि ये कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं। उच्च उपलब्धि प्राप्त लोग उन स्थितियों में प्राथमिकता की उपेक्षा करते हैं जिनमे वे हल ढूंढने में व्यक्तिगत जिम्मेवारी को समझते है और उसे अमल में लाते हैं। विशिष्ट आवश्यकताएं रखने वाले व्यक्ति विज्ञापित अपीलों पर ज्यादा प्रक्रियात्मक होते हैं जो विज्ञापन विशेषतम उनकी ओर ही दिशागत होते हैं व विशेष उत्पाद की किस्मों पर भी ग्रहणशील होते हैं पदानुक्रमित सिद्धान्त विपणनकर्ताओं को अपने खंडों को विभाजित करने के उद्देश्य से व अतिरिक्त आधार बनाने में सहायक हो सकते हैं।