विक्रयकला का अर्थ एवं परिभाषाएँ - Meaning and definitions of salesmanship

 विक्रयकला का अर्थ एवं परिभाषाएँ - Meaning and definitions of salesmanship


विक्रयकला दो शब्दों से मिलकर बना है, विक्रय+कला। विक्रय का अर्थ है मुद्रा के बदले उत्पाद एवं सेवा के स्वामित्व का हस्तांतरण जबकि कला का तात्पर्य चातुर्य के प्रयोग से इच्छित परिणामों की प्राप्ति से है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि विक्रयकला चातुर्यपूर्ण ढंग से उत्पाद एवं सेवा का स्वामित्व हस्तांतरण है। प्रबंधन के प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने विक्रयकला के अर्थ को विभिन्न रूप में परिभाषित किया है जो निम्नलिखित है


1. अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन के अनुसार, एक व्यक्ति या अव्यक्तिगत प्रक्रिया जो भावी ग्राहक को उत्पाद का सेवा क्रय करने में सहायता प्रदान करती है

तथा विक्रेता के लिये व्यापारिक महत्व रखने वाले विचार का समर्थन करती है, उसे विक्रयकला की संज्ञा दी जाती है। "


2. जे. एस. नॉक्स के शब्दों में, “विक्रयकला मानवीय भावनाओं को मानवीय जरूरतों में बदलाव करने की क्षमता है।"


3. किर्कपोट्रिक के शब्दों में, “विक्रयकला संभावित ग्राहक को यह बताता है कि वह अपने व्यय किये गये द्रव्य से कैसे अधिकतम संतुष्टि प्राप्त कर सकता है तथा विवेकपूर्ण क्रय निर्णयन में यह ग्राहक की सहायता करता है।


4. डी. डी. कौच के अनुसार, "विक्रयकला एक कला के साथ-साथ एक विज्ञान भी है जिसके द्वारा संभावित ग्राहक के मस्तिष्क में यह विचार पैदा किया जाता है कि आपका उत्पाद क्रय करने से ही उसे संतुष्टि मिलेगी। "