स्मृति एवं स्मृति के प्रकार - memory and types of memory
स्मृति एवं स्मृति के प्रकार - memory and types of memory
स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया
हमारी स्मृति कैसे काम करती है या फिर किसी भी चीज को हम कैसे याद रख पाते हैं? स्मृति हमारे मस्तिष्क में किस प्रकार संग्रहीन होती है? हम किसी चीज को क्यों भूल जाते हैं और कुछ चीजे भुलाए नहीं भूलती। इन मूलभूत प्रश्नों ने मानव मन को सदा से ही आंदोलित किया है तथा इनके उतर देने के समय समय पर प्रयास भी किये गए है। हममें से सभी के अंदर पुरानी बातों को याद रखने की क्षमता होती है। हम किसी व्यक्ति, स्थान,
घटना और स्थितियों- परिस्थितियों को याद करते रहते हैं। उन से कुछ सीखते हैं। फिर आगे उन्हें अनुभवों और ज्ञान के रूप में सुरक्षित कर लेते हैं। हमारे आगे का व्यवहार इसके द्वारा नियंत्रित होता है कि हमने क्या सीखा है।
स्मृति की क्रियाविधि
आधुनिक परिभाषा के अनुसार हमारी स्मृति एक सामूहिक प्रक्रम है जिसके तीन मुख्य चरण होते हैं। सबसे पहले इसके प्रथम चरण में सुचनाओं को कूटबद्ध किया जाता है। इसके पश्चात् द्वितीय चरण में इन कूटबद्ध सूचनाओं का संग्रहण होता है और अंतिम तृतीय चरण में इनका पुनः स्मरण किया जाता है।
(क) सूचनाओं को कूटबद्ध करना:- हमें अपने आसपास के वातावरण को महसूस करने के लिए पहले आवश्यक है कि वातावरणीय उद्दीपनों को उससे संबंधित ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्रहण किया जाए।
उदाहरण के लिए किसी भी वस्तु को देखने के लिए हम उस पर से परावर्तित प्रकाश को नेत्रों द्वारा ग्रहण करते हैं। अब इस परावर्तित प्रकाश को नेत्र की रेटिना में उपस्थित संवेदी तंत्रिका कोशिकाएं क्षीण वैद्युतीय तरंगों में बदलती है। अब यह कहा जा सकता है कि रेटिना द्वारा वातावरण में उपस्थित प्रकाश उद्दीपन का कोडीकरण वैद्युतीय रूप में किया गया। अब यह हल्की वैद्युतीय तरंग मस्तिष्क के दृश्य क्षेत्र में जाती हैं और यहां इसकी व्याख्या की जाती है। इस व्याख्या की जाती है। इस व्याख्या के आधार पर हम अपने मन में सामने के दृश्य का एक प्रतिबिंब बनाते है। इस समूची प्रक्रिया को दृश्य प्रत्यक्षीकरण या देखना कहते हैं। कोडिंग के समय सूचनाएं मुख्यतः स्थान, समय तथा आवृति के आधार पर कोड की जाती है।
(ख) सूचनाओं का संग्रहणः- सूचनाओं को कोड करने के बाद उनके संग्रहण का स्थान आता है।
यह संग्रहण संवेदी स्तर या अल्पकालीन स्मृति के स्तर या दीर्घकालीन स्मृति के स्तर पर हो सकता है। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि हमारे मस्तिष्क में संग्रहण के समय सूचनाओं में थोडा परिवर्तन हो सकता है। मतलब कि सूचनाएं वहीं नहीं रहेंगी जैसी वे वास्तविक रूप में थीं। उनमें हम अपने पास से कुछ मिला सकते हैं या फिर उस सूचना के किसी भाग को निकाल भी सकते हैं। अगर आधी अधुरी सूचना है तो हम उसे अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर गढ़ भी सकते हैं। इस गुण के कारण स्मृति एक निर्माणात्मक प्रक्रिया होती है। स्मृति का अतिरिक्त स्तर पर वर्गीकरण स्मृति में सूचनाओं के संग्रहण के आधार पर किया जाता है।
(ग) स्मरणः- हमें कैसे पता चलता है कि हमारे पास किसी विशेष समय या स्थान की स्मृति है?
तभी जब हम उसे स्मरण करते हैं। उदाहरण के लिए अगर पूछा जाए कि अपने बचपन के पांच शिक्षकों के नाम बताइए जिनकी शिक्षाओं के नाम बताइएं जिनकी शिक्षाओं ने आपके जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव डाला है तो हमें उत्तर देने में देर नहीं लगेगा। लेकिन अगर यह पूछें वर्ष 2000 से 2005 तक जैविकी या किसी भी क्षेत्र में नोबल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिकों के नाम बताइएं हो शायद हमें कुछ देर तक सोचना पड़ जाए। यह बात यहां स्पष्ट हो जाती है कि हम किन चीजों को याद रखते है और किन चीजों को भूल जाते हैं यह सब काफी कुछ हमारी अभिप्रेरणाओं, चेतन और अचेतन इच्छाओं इत्यादि पर निर्भर करता है। अतः स्मरण, संपूर्ण स्मृति का एक आवश्यक अंग है।
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