विक्रय कोटा निर्धारण के ढंग - Methods of Determination of Sales Quota
विक्रय कोटा निर्धारण के ढंग - Methods of Determination of Sales Quota
विक्रय कोटा निर्धारित करने के दो ढंग है जो निम्नलिखित है
1. बिना कुल बिक्री के अनुमान के आधार पर विक्रय कोटा निर्धारण के इस तरीके में सर्वप्रथम विक्रयकर्ता, शाखा प्रबन्धक, डीलर, वितरक, आदि से कहा जाता है कि वे आगामी समय में होने वाली बिक्री के लिए अपने-अपने क्षेत्र का अनुमान लगा विक्रय कोटा निर्धारण के ढंग - Methods of Determination of Sales Quotaकर दें। वे अपने-अपने क्षेत्र की विभिन्न सूचनाओं के आधार पर अपना-अपना विक्रय अनुमान लगाकर संस्था को देते है। इसके बाद एक विक्रय सम्मेलन बुलाया जाता है जिसमें सभी विक्रयकर्ता, शाखा प्रबन्धक, डीलर, वितरक आदि एकत्रित होते हैं। इस विक्रय सम्मेलन में आमतौर पर अनुमानित विक्रय के आधार पर प्रत्येक क्षेत्र का कोटा अन्तिम रूप में निर्धारित कर दिया जाता है। अब यह कोटे उच्चस्तरीय कार्यकारी प्रबन्धको को उनके अनुमोदन हेतु प्रस्तुत कर दिये जाते है जो उनको वैसे ही स्वीकार कर लेते हैं या उनको संशोधित करके स्वीकार कर लेते है।
2. कुल बिक्री के अनुमान के आधार पर इस तरीके में सर्वप्रथम संस्था की कुल भावी बिक्री का अनुमान लगाया जाता है। उसके बाद उस अनुमानित कुल भावी बिक्री को विभिन्न क्षेत्रो, विक्रयकर्ताओं, आदि में बाँट दिया जाता है। भावी बिक्री का अनुमान निम्नलिखित तरीके से लगाया जाता है।
(i) कुछ संस्थाये गत वर्ष की बिक्री को आधार मानकर उसमें मनमाना प्रतिशत जोड़कर भावी अनुमान लगा लेती है जबकि कुछ गत वर्षो की बिक्री का औसत निकाल कर उसमें मनमाना प्रतिशत जोड़कर देती है। यह तरीका अच्छा नहीं होता है। इसका कारण यह है कि इसमें प्रतिशत जोड़ने का ठोस आधार नही होता है।
(ii) दूसरा तरीका यह है कि जिसमें गत वर्ष में उद्योग व कम्पनी की बिक्री में जो आनुपातिक स्थिति रही है उसी के आधार पर बिक्री का अनुमान लगा लेते है। यदि बिक्री बढ़ती है तो बढ़ने का और अगर घटती है तो घटने का यह तरीका वैसे तो अच्छा है लेकिन एक कमी है, वह यह कि इसमें पिछली बिक्री का आधार उचित मानकर चलते है।
(iii) तीसरा तरीका वह है कि जिसमें आंकड़े एकत्रित किये जाते हैं और फिर सभी बातो को ध्यान में रखकर तर्कपूर्ण ढंग से अनुमान लगाया जाता है। आजकल अधिकांश प्रगतिशील संस्थायें एक आधार को मानकर ही अपना विक्रय अनुमान लगाती है।
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