अंतरराष्ट्रीय विपणन की प्रकृति - Nature of International Marketing

अंतरराष्ट्रीय विपणन की प्रकृति - Nature of International Marketing


अंतरराष्ट्रीय विपणन की प्रकृति कुछ सीमा तक स्वदेशी विपणन से मिलती है तो कुछ सन्दर्भों में यह मौलिकता एवं भिन्नता लिए हुए है। इसकी प्रकृति के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित है।


1. बहुराष्ट्रीय विपणन प्रबंध अंतरराष्ट्रीय विपणन बहुराष्ट्रीय विपणन प्रबन्ध प्रयासो का योग है। इसमें एक फर्म के विभिन्न राष्ट्रीय विपणन कार्यक्रमों को प्रभावी बहुराष्ट्रीय कार्यक्रम में एकीकृत एवं समन्वित किया जाता है जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।


2. नियंत्रणीय एवं अनियंत्रणीय घटक स्वदेशी विपणन में आन्तरिक घटको का प्रबन्ध करते हुए फर्म के वातावरण में विद्यमान अनियंत्रणीय घटको का प्रत्युत्तर देने का प्रयास किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय विपणन में भी लगभग ऐसा ही होता है; लेकिन इसमें नियंत्रणयोग्य तथा अनियंत्रणयोग्य घटक अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से पृथक एवं विशिष्ट होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय विपणन में व्यापक जटिलताएँ उत्पन्न करते हैं।


3. विशिष्ट चातुर्य - स्वदेशी विपणन के विपरीत अंतरराष्ट्रीय विपणन हेतु प्रबन्धक में विशिष्ट चातुर्य वांछित है। इसमें प्रबन्धक को राष्ट्र विशेष की आवश्यकताओं एवं परिस्थितियों के मद्देनजर विपणन क्रियाओं के निष्पादन हेतु व्यापक चातुर्य की आवश्यकता होती है।


4. अवधारणा अंतरराष्ट्रीय विपणन की अवधारणा में निम्न तीन बिन्दु सम्मिलित है: (अ.) अंतरराष्ट्रीय विपणन राष्ट्रीय सीमाओं से पार विपणन ।


(ब.) विदेशी विपणन विदेशी राष्ट्रो में विपणन ।


(स.) बहुराष्ट्रीय विपणन विविध बाजारों में विपणन में।



5. संरक्षणवादी प्रकृति अंतरराष्ट्रीय विपणन की प्रकृति काफी सीमा तक संरक्षण वादी होती है। प्रत्येक देश अपने निर्यात को बढ़ाना चाहता है तथा आयातों को कम करना चाहता है। अतः इसी लक्ष्य को देखकर विपणन प्रयासों का नियोजन एवं क्रियान्वयन किया जाता है।


6. सघन प्रतियोगिता - इसके अन्तर्गत त्रि-स्तरीय प्रतियोगिता का सामना करना होता है।

प्रथम, अपने देश के निर्यातको से; द्वितीय, अन्य देश के निर्यातको से एवं तृतीय, आयातक देश के उत्पादको से। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय विपणन में प्रतियोगिता को सधन कर देती है।


7. साख अभिमुखी - अंतरराष्ट्रीय विपणन साख अभिमुखी होता है इसमें विकसित देशों का बड़ा भाग हैं। विकासशील देश मुख्यतः क्रय शक्ति नही रखते है अत: यह देश उन्हीं देशों से माल क्रय को वरीयता देते है जो भुगतान की अवधि को लम्बा रखते है एवं व्याज दर न्यूनतम रखते है।


8. व्यापक जोखिम अंतरराष्ट्रीय विपणन कई प्रकार के जोखिमो से घिरा होता है।

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इसके अन्तर्गत अनुबंध करने एवं उसके निष्पादन में काफी समय लगता है। इसी दौरान आयातक या निर्यातक देश में राजनैतिक परिवर्तन आर्थिक परिवर्तन या वैधानिक परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय विपणन को व्यापक रूप से प्रभावित करता है।


9. प्रभुतापूर्ण प्रकृति – अंतरराष्ट्रीय विपणन प्रभुतापूर्व प्रकृति का होता है। विश्व का कुल व्यापार के - लगभग 75 प्रतिशत भाग पर विकसित देशो का प्रभुत्व है। विकसित देश अपनी तकनीकी एवं गुणवत्ता संबंधी श्रेष्ठता के कारण बेहतर उत्पाद एवं सेवायें प्रदान करने में समर्थ होते है। ये राष्ट्र शोध एवं विकास विज्ञापन, प्रचार आदि पर व्यापक धनराशि खर्च करके अपना प्रभुत्व बनाये रखने का प्रयास करते है।


10. राजनीतिक प्रवृत्ति - अंतरराष्ट्रीय विपणन में राष्ट्रो के मध्य राजनीतिक संबंधों की भी अहम भूमिका होती है। प्राय: विकसित देश उन विकासशील देशों को अपने यहाँ निर्यात हेतु प्रोत्साहन देते है जो उनके राजनैतिक एवं सामाजिक हितो की पूर्ति के लिए उपकरण बनने हेतु तैयार होते है।


11. एकीकरण प्रकृति - अंतरराष्ट्रीय विपणन ग्लोबल एकीकरण को प्रोत्साहित करता है । उदाहरण के लिए बोइंग कारपोरेशन अमेरिका है, किन्तु उसके द्वारा बनाया जाने वाले हवाई जहाजो के विभिन्न भागों का निर्माण विश्व के 29 देशों में किया जाता है। इससे इसकी एकीकरण प्रकृति सिद्ध होती है।