विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण की आवश्यकता एवं महत्व - The need and importance of control over sales activities
विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण की आवश्यकता एवं महत्व - The need and importance of control over sales activities
विक्रय क्रियाओं एवं संचालन पर नियन्त्रण किये बिना कोई भी विक्रय संगठन अपनी योजनाओं कार्यक्रमो, लक्ष्यों व नीतियो का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं कर सकता है। विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण की आवश्यकता एवं महत्व निम्न है।
1. दोष व त्रुटियों में सुधार विक्रय संगठन में उपयोग की जाने वाली नियन्त्रण प्रणाली से विक्रय कार्यक्रमों, विक्रय योजनाओं व विक्रय संरचना में पायी जाने वाली त्रुटि परिलक्षित हो जाते है। अतः इन दोषो और त्रुटियों को दूर करके कार्य क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
2. प्रशिक्षण की आवश्यकता का निर्धारण विक्रय नियंत्रण द्वारा सम्पूर्ण विक्रय संगठन में विद्यमान कमजोर बिन्दुओं का पता चल जाता है।
विक्रय कर्मचारियों की अकार्यकुशलता भी ज्ञात जाती है। अतः इन कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक निर्देशन व प्रशिक्षण की आवश्यकता का निर्धारण किया जा सकता है।
3. सुगम समन्वय विक्रय क्रियाओं के वास्तविक परिणामों व विक्रयकर्ताओं के निष्पादन का ज्ञान हो जाने के कारण विभिन्न क्रियाओं में समन्वय स्थापित करना सरल हो जाता है।
4. अभिप्रेरण - विक्रय कर्मचारियों को सहायता व मार्गदर्शन के साथ विक्रय क्रियाओं के नियन्त्रण द्वारा हस्तक्षेप और दण्ड दिया जाता है।
5. विक्रय लक्ष्यों की प्राप्ति विक्रय क्रियाओं पर नियंत्रण बनाये रखने से विक्रय उद्देश्यों को प्राप्त करना आसान हो जाता है। इससे विक्रय कार्यों के संचालन को विशिष्ट लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जा सकता है।
6. विक्रय नियोजन में सहायक-विक्रय कार्य कलापो पर नियन्त्रण स्थापित किये बिना विक्रय उद्देश्यों को प्राप्त करना आसान हो जाता है। नियन्त्रण के अभाव में श्रेष्ठ योजनायें, आदर्श लक्ष्य व लाभकारी नीतियाँ भी मात्र कागजी बनी रहती है।
7. न्यूनतम व्यय पर अधिकाधिक विक्रय अनावश्यक व्ययों को लागतो पर घटाने के लिए विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण करना जरूरी है तथा लाभों में वृद्धि की जा सकती है।
8. कार्यक्षमता का ज्ञान कर्मचारियों की योग्यता एवं निष्पादन क्षमता की जानकारी प्रबन्धक को विक्रय नियन्त्रण से होती है। इससे विक्रय कर्मचारियों को सौपें जाने वाले कार्यों व दायित्वों में आवश्यक समायोजन किया जा सकता है।
अन्य लाभ कुछ अन्य कारण भी है जिसकी वजह से विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण की आवश्यकता होती है
तथा उसका महत्व बढ़ जाता है जैसे 1. संस्था की प्रतियोगिता क्षमता में वृद्धि हो जाती है।
2. विक्रय पूर्वानुमानों, विक्रय प्रदेशों, विक्रय अंकेक्षण आदि को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
3. विक्रय कर्मचारियों की शिकायतों एवं ग्राहको की असन्तुष्टियों पर तुरन्त ध्यान देना सम्भव हो जाता है।
4. संचालकीय एवं विक्रय लागतो में कमी की जा सकती है।
5. विक्रय लक्ष्यों, कार्यक्रमों व प्रमापो को व्यावहारिक, प्रेरणा दायक एवं निष्पादन योग्य बनाया जा सकता है।
6. संस्था व विक्रेताओं के मध्य कुशल संचालन व्यवस्था बनाये रखा जा सकता है।
वार्तालाप में शामिल हों