बीमा की आवश्यकता - need for insurance

बीमा की आवश्यकता - need for insurance


व्यक्तियों का जीवन अनेक प्रकार की अनिश्चितताओं एवं जोखिमों से घिरा हुआ है। उसे कुछ सम्पत्ति से सम्बन्धित जोखिमें है तो कभी जीवन को जोखिम है अतः वह इन जोखिमों के प्रति कै से सुरक्षा प्राप्त करे इसी विचार ने बीमा को एक आवश्यकता बना दिया है। वर्तमान औद्योगिक विकास का आधार ही प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से यदि बीमा को कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। मनुष्य जीवन को तनाव मुक्त करने हेतु बीमा एक महती आवश्यकता बन गया है। निम्न बिन्दुओं के आधार पर बीमा की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा सकता है


1. जोखिमों के विरूद्ध सुरक्षा प्राप्ति हेतु सम्पत्तियों का इसलिए बीमा किया जाता है कि उनके नष्ट होने की सम्भावना निरन्तर बनी रहती है या आकस्मिक घटना के घटित होने से अपने अपेक्षित जीवनकाल से पहले ही वे निष्क्रिय हो सकती है।


2. संभावित जोखिमों से सुरक्षा प्राप्ति हेतु बीमाकृत विषयवस्तु को क्षति हो भी सकती है और नहीं भी, भू कम्प आ भी सकता है, और नहीं भी, भूकम्प आये तो हो सकता है सम्पत्ति को क्षति पहु$1 चे अथवा नहीं। मनुष्य की मौत होना निश्चित है ले किन मृत्यु कब होगी समय अनिश्चित है, अतः इस अनिश्चितता या संभावित जोखिमों से सुरक्षा प्राप्ति हेतु बीमा आवश्यकता बन गया है।


3. जोखिमों के प्रभाव को कम करने हेतु बीमा बीमाकृत विषयवस्तु को संरक्षण प्रदान नही करता है, खतरे के कारण पहुचाने वाली हानि को भी नहीं रोकता है खतरे को घटित होने से टाला भी नहीं जा सकता है।

परन्तु कभी-कभी बेहतर सुरक्षातथा क्षतिनियन्त्रक उपायों द्वारा खतरे को टाला या तीव्रता को कम किया जा सकता है जिससे उस विषयवस्तु पर निर्भर व्यक्तियों के जीवन व सम्पत्ति पर खतरे के प्रभाव को कम अवश्य किया जा सकता है।


4. सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता से मुक्ति हेतु बीमा उद्योगपतियों, व्यवसायियों एवं अन्य व्यक्तियों को सुरक्षा के लिए पूंजी विनियोग से मुक्त कर दे ता है। थोड़ी सी प्रीमियम का भुगतान करके जोखिम को उस सीमा तक सीमित कर लिया जाता है। अतः इस व्यवस्था में लगने वाले धन का अन्यत्र उपयोग किया जा सकता है।


5. वृहत स्तरीय उपक्रमों के विकास हेतु आवश्यक - बृहतस्तरीय उपक्रमों में इतनी अधिक जोखिम होती है।

कि बीमा के बिना प्रारम्भ करना कठिन ही नहीं बल्कि असम्भव भी हो सकता है।


6. वित्तीय संस्थाओं से वित्त प्राप्ति हेतु वित्तीय संस्थाओं द्वारा भी इन औद्योगिक व व्यावसायिक संस्थाओं को वित्त तभी प्रदान किया जाता है जबकि इनकी सम्पत्तियों का बीमा हो चुका है। अत: भारी मात्रा में वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु भी बीमा आवश्यक है।


7. विदेशी व्यापार विकास हेतु आवश्यक निर्यात व्यापार के प्रोत्साहन हेतु भी बीमा आवश्यक है। बीमा माल के मूल्य की क्षति की दशा में भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है व जिससे निर्यातक क्षति की अनिश्चितता से मुक्त होकर निर्यात कर सकते हैं।


8. बचत व निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु जीवन बीमा बचत व विनियोग का अच्छा स्रोत है। जीवन की अनिश्चितताओं को बीमा द्वारा निश्चित करने हेतु अधिक राशि का बीमा कराता है, जिससे अपव्यय कम होकर बचत को प्रोत्साहन मिलता है।