भारत में बीमा का उद्भव व विकास - Origin and Development of Insurance in India

भारत में बीमा का उद्भव व विकास - Origin and Development of Insurance in India


भारत में समुद्री एवं अग्नि बीमा का वर्तमान स्वरूप इंग्लैण्ड से आया है। भारत में जीवन बीमा का शुभारम्भ 1818 में कलकत्ता में 'ओरिएन्टल लाइफ इन्श्योयोरेन्स कम्पनी' की स्थापना के साथ हुआ। 1823, 1829, 1847 में भी अन्य कम्पनियां स्थापित हुई। सन् 1850 में कलकत्ता में साधारण बीमा व्यवसाय हेतु ट्रिटोन इन्श्योरेन्स कम्पनी लि. स्थापित की गयीं। 1871 में बॉम्बे म्युचुअल लाइफ एश्योरेन्स सोसाइटी” नामक भारतीय संस्था की स्थापना की गई जो सामान्य प्रीमियम दरों पर भारतीयों का बीमा करने लगी। बाद में भी 1912, 1928 में भी अन्य अधिनियम बनाये गये। परन्तु 1938 में सभी अधिनियमों को एकीकृत करके बीमा नियमन हेतु एक बीमा अधिनियम बनाया गया


1907 में इण्डियन मर्केन्टाइल इन्श्योरेन्स कम्पनी लि. मुम्बई में स्थापित की गयी जिसने सर्वप्रथम अग्नि बीमा करना प्रारम्भ किया।

फिर इस क्षेत्र में कई भारतीय व विदेशी संस्थानों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली का नियमन एवं नियन्त्रण करने हेतु भारत में बीमा अधिनियम 938 बनाया गया। इसी प्रकार सन् 1956 में इण्डिया रिइन्श्योरेन्स कार्पोरेशन लि. की स्थापना की गई जिसने देश की बड़ी बीमा कम्पनियों का बहुत बड़ी सीमा तक पुनर्बीमा करना प्रारम्भ कर दिया। 1956 में जीवन बीमा व्यवसाय का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया गया व व्यवसाय संचालन हेतु भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना की गई व 245 देशी विदेशी बीमा कर्ताओं के व्यवसाय का अधिग्रहण कर जीवन बीमा निगम को सौंपा गया।


सन् 1971 में भारत के साधारण बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

समुद्री, अग्नि व विविध बीमा करने वाली 107 कम्पनियों को अधिगृहित कर भारतीय साधारण बीमा निगम व इसकी चार सहायक कम्पनियों को सौंप दिया। भारत में बीमाक्षेत्र में उदारीकरण की प्रक्रिया का प्रारम्भ व 1993 में मल्होत्रा समिति के गठन के साथ ही हो गया था परन्तु विधिवत रूप से 1 दिसम्बर 1999 में लोकसभा में एक 31 विधेयक पारित कर निजीकरण की प्रक्रिया को प्रारम्भ किया गया जब बीमा नियमन व विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 को बनाया गया।


मार्च 2003 से साधारण बीमा निगम की चारों सहायक कम्पनियों को भी इससे पृथक कर दिया गया। अब ये स्वतन्त्र कम्पनियों के रूप में बीमा व्यवसाय कर रही है।

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) ने भारतीय साधारण बीमा निगम को भारतीय पुनर्बीमाकर्ता के रूप में अधिकृत कर दिया गया है। अब सामान्य बीमा जीवन बीमा के क्षेत्र में कई निजी कम्पनियां कार्य कर रही है।


बीमा की परिभाषा इस तरह से दी जा सकती है: यह एक बीमाकार (बिमा कंपनी) और बीमीत (व्यक्ति और कम्पनी) के बीच अनुबन्ध है जिसके तहत बीमाकार (बिमा कंपनी) निश्चित धनराशि (प्रीमियम) के बदले बीमित (व्यक्ति और कम्पनी) को एक निश्चित घटना ( चोट लगना, मृत्यु होना, आग लगना इतियादी) के घटित होने पर एक निश्चित राशि देने का वादा करता है अथवा जिस जोखिम का बीमा कराया गया है उसकी वास्तविक हानि होने पर उसकी पूर्ति का वादा बीमाकार ( बिमा कंपनी) करती है।