वैयक्तिक विक्रय रणनीति - personal selling strategy

वैयक्तिक विक्रय रणनीति - personal selling strategy


वैयक्तिक विक्रय का प्रबन्धन कार्य विक्रय-प्रबन्धन के द्वारा किया जाता है और वही विक्रय शक्ति के नियोजन प्रशिक्षण एवं उनके उपयोग के लिए उत्तरदायी होता है। इन उत्तरदायित्वों को पूरा करने के लिए उनको निम्न चार कार्य करने पड़ते हैं जो कि वैयक्तिक रणनीति के निर्धारण सम्बन्धी घटक कहलाते है


1. वैयक्तिक विक्रय व्यय वैयक्तिक विक्रय रणनीति में पहले वैयक्तिक विक्रय-व्ययो को निर्धारित किया जाता है। इन व्ययो को निर्धारित का आधार विपणन उद्देश्य लक्षित बिक्री होते है जिसका निर्धारण आने वाले समय के लिए प्रबन्ध द्वारा पहले से ही कर लिया जाता है।

यदि प्रबन्ध का लक्षित बिक्री उद्देश्य पिछली बिक्री से अधिक है तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि अधिक विक्रय कताओं को नियुक्त करने की आवश्यकता प्रतीत हो और उनके निरीक्षण के लिए निरिक्षको की इन निरीक्षकों व विक्रयकर्ताओं को उनके पारिश्रमिक अतिरिक्त कुछ अन्य व्यय भी देने पड़ते है। अतः वैयक्तिक विक्रय-व्यय को निर्धारित करते समय प्रबन्ध को दो कार्य करने पड़ते है।


• प्रत्येक क्रिया द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्यों का अनुमान उन अनुमानो को रुपयो के अनुमानो में बदलना। वैयक्तिक विक्रय-व्ययो में विक्रयकर्ताओं की भर्ती व चुनाव के व्यय, उनको प्रशिक्षित करने के व्यय,

उनको प्रेरणा देने व निरीक्षण के व्यय व उनके प्रबन्ध के व्यय आते है। अतः वैयक्तिक विक्रय-व्ययो का निर्धरण करते समय इस बात का ध्यान अवश्य ही रखा जाना चाहिए कि वे इतने अवश्य हो कि उपयुक्त व्ययो को पूरा किया जा सके।


2. कार्य विवरण कार्य विवरण एक विशिष्ट कार्य के उद्देश्य, कर्त्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों का व्यापक


कथन है।” इसमे मुख्य रूप से 1. कार्य सारांश - कर्तव्यों और दायित्वों का विवरण 2. प्रशिक्षण 3. कार्य की दशायें 4. कार्य के लिए वांछित उपकरणों मशीनो एवं सामिग्रयो का विवरण 5. शारीरिक एवं मानसिक गुण 6. वेतन एवं भत्ते आदि बाते लिखित रूप से आती है

विक्रय प्रबन्ध का प्रथम व सबसे महत्वपूर्ण कार्य कार्य-विवरण तैयार करना है। यह कार्य विवरण बिलकुल स्पष्ट, पूर्वा एवं उचित होना चाहिए। वैयक्तिक विक्रय रणनीति का यह महत्वपूर्ण अंग है। इसी के आधार पर प्रबन्ध के द्वारा इन गुणों एवं योग्यताओं का निर्धारण किया जाता है जिनका एक विक्रयकर्ता में होना अनिवार्य है। इसी के आधार पर पारिश्रमिक एवं निरीक्षण योजनाये बनायी जाती है और यही कार्य विवरण प्रबन्ध के लिए मार्ग-प्रदर्शन का कार्य करता है।


कुछ अच्छी कम्पनियाँ कार्य-विवरण के साथ-साथ एक प्रभावकार्य का विवरण भी तैयार करती है जिससे की आगे चलकर एक विक्रयकर्ता के कार्य की तुलना उन प्रमाप-कार्य के विवरण में करके उसके कार्य का मूल्यांकन किया जा सके।


3. विक्रय शक्ति को बदलने की दर साधारणतया प्रत्येक संस्था में प्रतिवर्ष कुछ विक्रयकर्ता इस्तीफा दे जाते है

या रिटायर हो जाते है या कुछ को किसी कारणो से अलग कर दिया जाता है वैयक्तिक विक्रय के नियोजन में इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि प्रतिवर्ष इन उपर्युक्त वर्णित कारणों से कितने प्रतिशत 'विक्रयकर्ता संस्था से निवृत्त होगें। जिससे की उनके स्थान पर नये विक्रयकर्ता नियुक्त करने के लिए पहले से ही उचित प्रबन्ध कर लिया जाए। जिस दर से विक्रयकर्ता निवृत होते है उसी पर को विक्रय शक्ति के बदलने की दर कहते हैं। इस दर को प्रतिशत में निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र काम में लाया जाता है।



विपणन से सम्बन्धित सभी व्यक्ति जानते है कि नये-नये विक्रयकर्ताओं को प्रशिक्षित करने में व्यय होता है।

अतः विपणन प्रबन्धक को इस विक्रय शक्ति के बदलने की दर निम्न से निम्न रखनी चाहिए। यदि पर बढ़ती हैं तो विक्रय-शक्ति के प्रबन्ध व्यय भी बढ़ते है। इसके साथ-साथ जितना व्यवसाय पुराने विक्रयकर्ता दे पाते है उतना नये विक्रयकर्ता नही दे पाते हैं। विक्रय कार्य में जितनी विक्रय शक्ति लगी हुई है उसका निर्धारित बिक्री अवश्य करनी चाहिए। यदि बिक्री उससे कम होती है तो ऐसे विक्रयकर्ता को हटाने की व्यवस्था अवश्य ही की जानी चाहिए। साथ ही जो विक्रयकर्ता निर्धारित बिक्री से अधिक बिक्री करते है उन्हें उन्नति के अवसर दिये जाने चाहिए। इसका अर्थ यह है कि अकुशल विक्रयकर्ताओं को हटाया जाना चाहए तथा कुशल को उन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए।


4. विक्रय शक्ति का आकार विक्रय शक्ति का आकार कितना बड़ा हो यह संस्था की अनुमानित बिक्री व उसके लाभ सम्बन्धी उद्देश्यों पर निर्भर है। इसके साथ-साथ एक विक्रयकर्ता का कार्य विवरण भी आवश्यक है जिससे की यह तय किया जा सके कि एक विक्रयकर्ता कितने रुपये की बिक्री कर सकता है। यदि कुल अनुमादित बिक्री मे एक विक्रयकर्ता की बिक्री का भाग दे दें तो यह निकाला जा सकता है कि कितना विक्रयकर्ताओं की आवश्यकता है, लेकिन ऐसा करते समय विक्रय शक्ति के बदलने की दर का ध्यान रखना चाहिए विक्रय शक्ति को निकालने के लिए निम्न सूत्र प्रयोग में लाया जा सकता है।