वैयक्तिक विक्रय - Personal selling
वैयक्तिक विक्रय - Personal selling
वैयक्तिक विक्रय से अर्थ व्यवसाय में वैयक्तिक विक्रय का बहुत अधिक महत्व है। इसमें वस्तुओं के विक्रय के लिए ग्राहक एवं विक्रयकर्ता में आमने-सामने बातचीत होती है और विक्रयकर्ता ग्राहक को प्रभावित कर विक्रय करने की चेष्टा करता है। इस सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों की परिभाषायें निम्नलिखित है।
1. कण्डिक एवं स्टिल के अनुसार “वैयक्तिक विक्रय मूल रूप से संचार का एक तरीका है। इसमें व्यक्तिगत ही नही अपितु सामाजिक व्यवहार भी शामिल है। प्रत्येक व्यक्ति आमने-सामने के अन्तर में प्रभावित करता है।"
2. डब्लू. जे. स्टैन्टन के अनुसार “वैयक्तिक विक्रय में अकेला व्यक्तिगत संदेश शामिल होता है जो
अव्यक्तिगत सन्देश, विज्ञापन विक्रय संवर्द्धन व अन्य संवर्द्धन उपकरणों के विपरीत है।" रिचर्ड बसकिर्क के अनुसार - "वैयक्तिक विक्रय वह विक्रय है जिसमें किसी वस्तु के सम्भावित क्रेताओं से व्यक्तिगत सम्पर्क किया जाता है।" इस प्रकार वैयक्तिक विक्रय में
1. विकयकर्ता व ग्राहक दोनों का एक दूसरे से प्रत्यक्ष व्यक्तिगत सम्पर्क होता है इन दोनों के बीच कोई अन्तर नही होता है।
2. इसके द्वारा वस्तुओं का विक्रय किया जाता है।
3. इसमें मौखिक रूप में प्रस्तुती किया जाता है।
4. यह संचार का एक तरीका है।
5. इसमें दोनों व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार शामिल है। जब कभी विक्रय होता है तो एक ओर विक्रयकर्ता और दूसरी ओर क्रेता होता है। दोनो एक दूसरे को प्रभावित करते है जब ग्राहक विक्रयकर्ता से सहमत हो जाता है तो वह खरीद लेता है इस प्रकार की प्रत्यक्ष बिक्री को ही वैयक्तिक विक्रय कहते हैं।
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