विक्रय प्रदेशों की स्थापना के सिद्धान्त - Principles of Establishment of Sales Territories

विक्रय प्रदेशों की स्थापना के सिद्धान्त - Principles of Establishment of Sales Territories


विक्रय नियोजन एवं नियन्त्रण की प्रभावशीलता बहुत कुछ “विक्रय प्रदेशों के उपयुक्त आबंटन पर निर्भर करती है। इसके समुचित वितरण पर ही संस्था के विक्रय लक्ष्यों की प्राप्ति निर्भर करती है। विक्रय प्रबन्ध को विक्रय क्षेत्र का आबंटन करते समय निम्नलिखित बातो पर विशेष ध्यान देना चाहिए


1. समान वितरण क्षेत्र विक्रय प्रदेशों का आबंटन करते समय विक्रय प्रबन्धक को यह ध्यान रखना चाहिए कि सभी विक्रेताओं को दिये जाने वाले विक्रय प्रदेश अत्यधिक बड़े या छोटे न हो। समान वितरण से न केवल विक्रेताओं का कार्यभार उपयुक्त रहता है, वरन् ग्राहकों को सन्तोषप्रद सेवायें भी प्रदान की जा सकती है।


2. कार्य दोहराव की समाप्ति विक्रय प्रदेशों के वितरण में कार्य के दोहरेपन को समाप्त किया जाना चाहिए। एक ही कार्य एक ही विक्रय प्रदेश में एक ही विक्रयकर्ता को सौंपा जाना चाहिए।


3. आय में समानता विक्रय प्रदेशों का बंटवारा इस प्रकार किया जाना चाहिए कि समस्त विक्रेताओं की आय में लगभग समानता बनी रहें। आय की असमानता उत्पन्न होने पर उनको शिकायत करने का अवसर मिलेगा।


4. अवसरो में समानता विक्रय प्रबन्धक इस बात का ध्यान रख सकते है कि जहाँ तक सम्भव हो सभी विक्रेताओं के कार्यों व विक्रय अवसरों में समानता बनी रहे।


5. नियन्त्रण योग्य विक्रय प्रदेश का वितरण एवं विस्तार इस प्रकार किया जाना चाहिए कि उनका प्रबन्ध एवं नियन्त्रण न्यूनतम व्ययो पर किया जा सके।


6. तुलनात्मक विक्रय प्रदेशों का आबंटन इस प्रकार से किया जाना चाहिए कि उनकी विक्रय सम्भावनाओं का तुलनात्मक अध्ययन सम्भव हो सके ताकि प्रत्येक विक्रेता के निष्पादन एवं उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जा सके।


7. मितव्ययी विक्रय प्रदेशों का विभाजन इस प्रकार होना चाहिए कि प्रबन्धक व विक्रयकर्ता की यात्राओं आदि में आने वाली लागत न्यूनतम बनी रहे। इसमें न्यूनतम व्ययों पर अधिकतम सेवा प्रदान करने के सिद्धान्त का पालन किया जाना चाहिए।


8. कुशल निष्पादन विक्रय प्रदेशों का वितरण इस प्रकार किया जाना चाहिए कि प्रत्येक विक्रेता को अपने नियमित कार्यों को कुशलता पूर्वक करने की अभिप्रेरणा प्राप्त हो सके।


9. नये विक्रयकर्ता को वितरण-नये विक्रयकर्ताओं को प्रारम्भ में ही सम्पूर्ण विक्रय प्रदेश का भार नही सौंपा जाना चाहए। उन्हें पहले अनुभवी विक्रयकर्ताओं के साथ रखा जा सकता है ताकि वे विक्रय तकनीकि को ठीक से सीख सके।


10. प्रतिस्पर्धा प्रत्येक विक्रय प्रदेश का आकार तथा कार्य भार इतना अवश्य होना चाहिए कि वह उसमें विक्रयकर्ताओं एवं मध्यस्थों के लिए प्रतिस्पर्धा या चुनौती प्रस्तुत कर सके।


11. निश्चितता प्रत्येक विक्रय प्रदेश का आकार या स्वरूप निश्चित होना चाहिए। यदि प्रदेश का भौगोलिक आधार पर विभाजन किया जाता है तो उसकी सीमायें की स्पष्ट होनी चाहिए।


12. मूल्यांकन में सुविधा - विक्रय प्रदेश इस प्रकार निर्धारित करना चाहिए ताकि प्रत्येक प्रदेश तथा उसमें कार्यरत विक्रयकर्ताओं के कार्यों व प्रगति का सही मूल्यांकन आसानी से किया जा सके।