कोटा निर्धारित करने के सिद्धान्त - principles of quota
कोटा निर्धारित करने के सिद्धान्त - principles of quota
कोटा निर्धारित करने समय कुछ सिद्धान्तों को ध्यान में रखना चाहिए जिससे कि कोटे व्यवहारिक हो सके और लक्ष्य को प्राप्त कर सके तथा असफलताओं का मुँह न देखना पड़े। यह सिद्धान्त निम्नलिखित है। 1. सरलता – कोटा निर्धारित करने का तरीका सरल होना चाहिए जिससे कि उसको विक्रयकर्ता व अन्य सम्बन्धित व्यक्ति आसानी से समझ सके।
2. निश्चितता कोटा निर्धारण का दूसरा सिद्धान्त निश्चितता है। कोटो का निर्धारण भौगोलिक, व्यक्तिगत, रुपये, इकाईयों आदि किसी भी रूप में हो लेकिन उनमें निश्चितता अवश्य होनी चाहिए। इसका कारण यह है कि विक्रयकर्ता को यह पता स्पष्ट रूप से होना चाहिए कि उसको किस लक्ष्य को प्राप्त करना है।
3. समानता कोटे को निर्धारित करते समय समानता के सिद्धान्त को ध्यान में रखना चाहिए। कोटा इतना ऊँचा नही होना चाहिए कि उसको प्राप्त करना असम्भव हो। जिन क्षेत्रो में विक्रय सम्भाव्यता अधिक हो वहाँ कोटा अधिक तथा जहाँ विक्रय सम्भाव्यता कम है वहाँ कमा
4. वस्तुनिष्ठता – कोटा निर्धारित करने का एक सिद्धान्त वस्तुनिष्ठता भी है। इसके अनुसार कोटा ऐसे तथ्यों पर आधारित होना चाहिए जो विपणन अनुसंधान के ठोस तरीके से एकत्रित किये गये हो। 5. लोचशीलता- कोटे में लोचशीलता भी होनी चाहिए जिससे उसको आर्थिक व व्यवसायिक परिस्थितियों के अनुसार ढाला जा सके।
6. स्थिरता कोटा निर्धारित करने के तरीके व कोटे में परिवर्तन समय समय पर नही करना चाहिए बल्कि उसमें स्थायित्व होना चाहिए।
7. पीछ करना-कोटा निर्धारण का एक सिद्धान्त पीछा करने का है। इसका अर्थ यह है कि जो कोटा एक निश्चित समय के लिए निर्धारित किया गया है उसकी तुलना विक्रयकर्ता की उपलब्धि से अवश्य को जानी चाहिए जिससे की वेतन में समायोजन, पदोन्नति, प्रेरणा, आदि दी जा सके।
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