विक्रय प्रदेश की स्थापना के उद्देश्य, आवश्यकता एवं महत्व - Purpose, need and importance of establishment of sales territory

विक्रय प्रदेश की स्थापना के उद्देश्य, आवश्यकता एवं महत्व - Purpose, need and importance of establishment of sales territory


विक्रय प्रदेश की स्थापना से विक्रय नियोजन एवं नियन्त्रण को प्रभावकारी बनाया जा सकता है। अनेक उद्देश्यों की पूर्ति जैसे विक्रय कार्यों को सार्थक बनाने, विक्रय पूर्वानुमान करने, सम्भावित ग्राहको की खोज करने तथा विक्रय कोटा निर्धारित करने आदि के लिए विक्रय प्रदेशों के निर्धारण की आवश्यकता होती है। विक्रय प्रदेशों के निर्धारण की आवश्यकता या महत्व के निम्न कारण है


1. प्रभावशाली विक्रय नियोजन विक्रय प्रदेश, नियोजन के पहलुओं को प्रदेशीय आधार प्रदान करने


में सहायक है। विक्रय प्रदेश के आधार पर इकाई स्तर पर विक्रय योजनायें बनाई जा सकती है।

इसके द्वारा संस्था के निम्नतम स्तर पर कार्य करने वाली इकाई को भी विक्रय नियोजन में शामिल किया जा सकता है।


2. विक्रय कर्मचारियों के दायित्वों का निर्धारण विक्रय प्रदेशों की स्थापना करके विक्रयकर्ताओं के उत्तरदायित्वों एवं कार्यों का स्पष्ट निर्धारण किया जा सकता है। इनसे मध्यस्थो, वितरको, शाखा आदि को भी दायित्व सौपे जा सकते है।


3. अधिकतम बाजार कवरेज प्राप्त करना विपणन क्षेत्र का सघन कवरेज न होने पर संख्या का बहुत सा व्यवसाय प्रतिस्पर्धियों को मिल जाता है। विक्रय प्रदेशों की स्थापना कर देने पर विक्रेताओं के विक्रय प्रयासो का बिक्री अवसरो के साथ लाभदायक संयोजन किया जा सकता है।


4. विक्रय शक्ति निष्पादन के मूल्यांकन में सुधार करना विक्रय प्रदेश की स्थापना से जहाँ एक ओर विक्रेताओं के निष्पादन मूल्यांकन में सहायता मिलती है वही दूसरी ओर मूल्यांकन के आधारों, तकनीको व दृष्टिकोणों में भी सुधार होता है। विक्रय प्रदेश नियोजन के फलस्वरूप फर्म के सम्पूर्ण बाजार को विभिन्न इकाइयों में बाँट दिया जाता है इससे प्रत्येक इकाई की विशिष्ट स्थिति, समस्याओं, उत्पाद-स्वीकरण, ग्राहक सन्तुष्टि, विक्रय सम्भावनाओं विक्रेता के विक्रय एवं लागत दायित्व आदि के बारे में विक्रय प्रबन्धकों को पर्याप्त एवं सही जान हो जाता है।


5. लाभो में वृद्धि - विक्रय प्रदेशों की स्थापना से संस्था के लाभों में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही विक्रेताओं को मिलने वाले पारिश्रमिक एवं पुरस्कारों को भी बढ़ाया जा सकता है। अपने विक्रय प्रदेश में अधिकतम विक्रय करके विक्रयकर्ता पदोन्नति प्राप्त करने में सफल हो जाते है।


6. ग्राहकों के अनुरूप विक्रयकर्ताओं की नियुक्ति - विक्रय प्रदेश की स्थापना से ग्राहकों के विभिन्न वर्ग बन जाते हैं, जैसे- उपभोक्ता ग्राहक, स्त्री-पुरुष ग्राहक, औद्योगिक ग्राहक, संस्था ग्राहक आदि। इससे फर्म प्रत्येक ग्राहक वर्ग की आवश्यकता के अनुसार विक्रयकर्ताओं की नियुक्ति कर सकती है।


7. विपणन अनुसन्धान निष्कर्षों का प्रभावी उपयोग करना विक्रय प्रदेशों के आवंटन के पश्चात विपणन अनुसंधान के द्वारा प्रत्येक विक्रेता की विक्रय सम्भावनाओं के बारे में सही-सही अनुमान लगाना सम्भव हो जाता है। विक्रय कोटा का निर्धारण करके प्रत्येक विक्रेता का अभिप्रेणात्मक पारिश्रमिक निश्चित किया जा सकता है।

प्रतिस्पर्धा का प्रभाव देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग होता है किन्तु विक्रय प्रदेश के विभाजन के बाद अनुसन्धानकर्ता प्रतिस्पर्धात्मक शक्तियों एवं दुर्बलताओं का अधिक प्रभावी मूल्यांकन कर सकते है।



8. विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय में सम्बन्ध स्थापित करना अधिकाधिक विक्रय एवं लाभों की प्राप्ति के लिए विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय प्रयासों में समन्वय होना आवश्यक है। विक्रय प्रदेश की स्थापना करके विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय प्रयासों को समन्वित करके उसमें सहक्रियात्मक प्रभाव उत्पन्न किया जा सकता है। विक्रय प्रदेशों के वितरण से प्रत्येक विक्रेता के पास निश्चित वितरको के सम्बन्ध में उत्तरदायित्व आ जाता है

तथा विक्रेता वितरण से विज्ञापन संदेश पहुचने से पूर्व नियमित रूप से सम्पर्क करता रहता है। 


9. स्वतन्त्र कार्यक्षेत्र विक्रय प्रदेशों के निर्धारण से सभी विक्रयकर्ताओं को स्वतंत्र कार्यक्षेत्र प्राप्त हो जाता है। इससे एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप की सम्भावनायें समाप्त हो जाती है। उनमें आपसी मतभेद उत्पन्न नही होते है तथा आपसी सहयोग का वातावरण निर्मित होता है।


10. मुकाबला क्षमता बढ़ाना विक्रय प्रदेश की स्थापना करके प्रतिस्पर्धी संस्थाओं के साथ अधिकाधिक मुकाबला करने की क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। इससे प्रत्येक प्रदेश स्तर पर स्पर्धा में विजय प्राप्त की जा सकती है।