बिक्री कर्मियों का भर्ती और चयन - Recruitment and selection of sales personnel

बिक्री कर्मियों का भर्ती और चयन - Recruitment and selection of sales personnel


योग्य विक्रेता की चयन प्रक्रिया में अत्यन्त सूझबूझ एवं सतर्कता से काम लेना चाहिए। कुशल विक्रेता संस्था में अधिक लाभ का ही सृजन नही करते बल्कि संस्था की ख्याति प्राप्ति, प्रतिष्ठा एवं श्रेष्ठ छवि का भी निर्माण करते हैं। अत: सही कार्य के लिए सही व्यक्ति के चयन में ही विक्रय प्रबन्ध की सफलता निर्भर करती है।


विक्रेता के चयन से आशय विभिन्न प्रार्थियों में से संस्था की आवश्यकतानुसार योग्य प्रार्थियों को छाटना एवं नियुक्त करना है। चयन प्रक्रिया में इच्छुक व्यक्तियों में से योग्य तम व्यक्ति का चुनाव किया जाता है। इस प्रकार विक्रेता के चयन का आशय विक्रय कार्य के लिए उपलब्ध व्यक्तियों में से योग्य व्यक्तियों का चुनाव करना है।


चयन की आवश्यकता एवं महत्व कुशल विक्रेताओं के चयन के महत्व एवं आवश्यकता को निम्नलिखित आधारों पर आवश्यक माना जाता है।


1. विक्रय का आधार व्यवसाय के बढ़े हुए स्तर को स्थिर रखना है या व्यवसाय की प्रगति करनी है तो उसके लिए अत्यधिक कुशल एवं उपयुक्त विक्रेता का होना आवश्यक होता है। विक्रय का घटना बढ़ना या स्थिर रहना विक्रेता की कुशलता के स्तर से प्रभावित होता है।


2. सीमित आवर्टन - यदि सही व्यक्ति को विक्रेता पद लिए चुना जाता है

तो वह कार्य में रुचि लेगा तथा कार्य से संतुष्ट होने पर व्यवसाय बदलने के लिए संस्था को नही छोड़ेगा। इससे संस्था छोड़कर जाने वाले विक्रेताओं के आवर्तन दर में कमी आती है तथा स्थिर विक्रेता वर्ग का निर्माण होता है।


3. अच्छे सम्बन्धों की स्थापना एक कुशल विक्रेता अपनी बुद्धिमता से अच्छे संबन्धो को स्थापित करता है। तथा व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सदैव तत्पर रहता है। अकुशल, निराश तथा अपरिपक्व विक्रेता संस्था के लिए दायित्व बन जाता है काम में रुचि न लेने वाला विक्रेता अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है। तथा व्यर्थ का कारण बताकर कर्मचारियों तथा प्रबन्धकों के समझ उलझन पैदा करता है।


4. ग्राहकों से सम्बन्ध - यदि विक्रेता ग्राहको के साथ अच्छा व्यवहार करता है और अपनी वस्तु के गुणों एवं श्रेष्ठता का विश्वास दिलाता है तथा ग्राहकों के शिकायतों के समाधान के लिए शीघ्र प्रयत्न करता है तो ग्राहक सन्तुष्ट रहेगे। अतः ग्राहक एवं व्यवसाय में सन्तोष जनक संबन्धों की स्थापना की दृष्टि से सही विक्रेता का चयन करना आवश्यक होता है।


5. सरल तथा शीघ्र प्रशिक्षण कुशल व्यक्ति का चयन हो जाने पर उस व्यक्ति को प्रशिक्षण देना आसान हो जाता है। क्यों अपने विक्रय की अभिरुचि के कारण अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्ण रुचि लेता है। जिससे कम समय में उसे प्रशिक्षित किया जा सकता है।


6. उच्च मनोबल कार्य की सफलता के लिए उच्च मनोबल कार्य निष्पादन पर अच्छा प्रभाव डालता है।

सही व्यक्ति के चयन से विक्रेताओं में अपनी योग्यता के प्रति विश्वास पैदा होता है जिससे उनका मनोबल बढ़ता है। 


7. नियन्त्रण व्यय में कमी कुशल तथा ईमानदार विक्रेता का चयन हो जाने पर विक्रेता अपने कर्तव्यो का पालन ईमानदारी से करता है जिससे विक्रेता का कार्य निरीक्षण एवं नियन्त्रण का कार्य सरल तथा कम खर्चीला हो जाता है। विक्रेताओं की आवर्तन दर में कमी होने से भर्ती एवं चयन के खर्चों में भी कमी आती है।


8. ख्याति में वृद्धि - कुशल विक्रेता के चयन से संस्था की ख्याति एवं प्रगति पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। ग्राहक के लिए विक्रेता ही संस्था है।

संस्था के अच्छे बुरे होने की धारणा का अनुमान विक्रेता के व्यवहार तथा उसके द्वारा विक्रय की गई वस्तु से लगता है।


9. योग्य अधिशासियों की प्राप्ति एक सफल विक्रेता संस्था के अन्य महत्वपूर्ण पदों के कार्य भार को सम्भालने में भी सफल होता है। विक्रेता के पद पर सही व्यक्ति का चयन होने से अन्य पदों पर भी कार्य करने के लिए कुशल विक्रेता वर्ग से अधिशासी प्राप्त करना सरल हो जाता है।


10. शान्त वातावरण योग्य व कुशल विक्रेता के आने से संस्था में स्वस्थ एवं शान्त वातावरण बनता है। योग्य विक्रेता अपने कार्य को शान्ति से करता है तथा किसी प्रकार उपद्रव पसन्द नही करता है। अयोग्य विक्रेता के चुनाव से संस्था में अशान्ति फैल जाती है।


11. संस्था का विकास – संस्था का विकास वस्तुओं के निर्माण एवं विक्रय पर निर्भर करता है। बाजार के विस्तार से लाभों में वृद्धि की जा सकती है इन सबके लिए कुशल विक्रय कर्ता की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है।

12. अन्य लाभ - सही चयन व्यवस्था के अन्य लाभ इस प्रकार है।


1. विक्रेताओं के उचित चयन के उत्पादन में वृद्धि सम्भव है।


2. अधिक विक्रय एवं उत्पादन से संस्था के लाभो मे वृद्धि होती है। 


3. अच्छे चयन से विक्रेता संस्थाओं में लम्बे समय तक कार्य करते है इससे संस्था के नीतियों तथा कार्य प्रणालियों में स्थायित्व आता है।