विक्रय प्रबन्धक के दायित्व - Responsibilities of the sales manager
विक्रय प्रबन्धक के दायित्व - Responsibilities of the sales manager
विक्रय प्रबन्धक का निम्नलिखित के प्रति उत्तरदायित्व होता है :
1. स्वयं के प्रति
2. संगठन के प्रति
3. ग्राहकों के प्रति तथा
4. विक्रयकर्ताओं के प्रति
1. स्वयं के प्रति दायित्व -
विक्रय प्रबन्धक का प्रथम दायित्व उसके स्वयं के प्रति होता है। उसके स्वयं के प्रति दायित्व निम्नानुसार हो सकते हैं :
1. विक्रय योग्यता एवं चातुर्य में वृद्धि करना ।
2. प्रबन्धीय कौशल का विकास करना।
3. स्वयं को विक्रय परिवर्तनों एवं विकास के अनुरूप सिद्ध करना ।
4. वस्तुओं, विक्रय नीतियों, कार्यप्रणालियों आदि का अध्ययन करके नवीनतम जानकारी प्राप्त करना । 5. माल, विक्रय व बाजार के सम्बन्ध में नवीन विचारों के प्रति जागरूक रहना।
6. आत्म-विकास करना ताकि चुनौतियों का पूरी क्षमता के साथ सामना किया जा सके।
7. स्वयं को एक अच्छे विक्रय प्रबन्धक के रूप में सिद्ध एवं प्रदर्शित करना।
8. मानवीय चेतना बनाये रखना।
9. अपनी कमजोरियों एवं क्षमताओं का विश्लेषण करके उनमें सुधार करते रहना।
2. संस्था के प्रति
एक विक्रय प्रबन्धक का अपनी संस्था के प्रति भी उत्तरदायित्व होता है। ये उत्तरदायित्व निम्न प्रकार हो सकते
8:
1. संस्था के प्रति गर्व अनुभव करना ।
2. सभी ग्राहकों में संस्था के प्रति निष्ठा बनाये रखना।
3. विक्रय के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों तथा विकास की उच्च अधिकारियों को जानकारी देना ।
4. वस्तुओं की माँग एवं प्रवाह को नियन्त्रित करना।
5. विक्रय लागतों में कमी लाने के प्रयास करना।
6. सभी अभिलेखों व रिपोर्टों पर शीघ्र ध्यान देना।
7. विक्रय लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रयास करना। 8. विक्रय नीतियों के निर्माण में उच्च अधिकारियों के साथ सहयोग करना।
9. प्रतिस्पर्धी संस्थाओं की क्रियाओं की उच्च अधिकारियों को जानकारी देना।
10. संस्था के अन्य विभागों के साथ सहयोग करना।
3. ग्राहकों के दायित्व
ग्राहकों की सन्तुष्टि ही विक्रय प्रबन्ध का आधार है। अतः विक्रय प्रबन्धक के ग्राहकों के प्रति अनेक
उत्तरदायित्व होते हैं। कुछ प्रमुख दायित्व निम्न हैं:
1. ग्राहकों के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध बनाना।
2. ग्राहकों को अपनी संस्था के साथ सम्बन्ध बनाये रखने के लाभ बताना। 3. ग्राहकों को विक्रय क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी देना।
4. विज्ञापन एवं विक्रय संवर्द्धन साधनों के द्वारा उत्पाद के बारे में विविध जानकारी देना ।
5. ग्राहकों को उत्पाद के नये मॉडलों व नवीन परिवर्तनों की जानकारी देना।
6. उनकी शिकायतों को कुशलतापूर्वक दूर करना।
7. विक्रय की नवीन तकनीकों को प्रयोग में लाना ताकि ग्राहकों की सन्तुष्टि में वृद्धि की जा सके।
8. अपनी वस्तुओं के लिए ग्राहकों को प्रेरित करना तथा उनकी रुचि बनाये रखना।
9. ग्राहकों के लिए प्रभावकारी विक्रय प्रदर्शन करवाना।
10. ग्राहकों की अधिकतम सन्तुष्टि के लिए उत्पाद के प्रस्तुतीकरण की नवीन विधि बताना। 11. ग्राहक नीतियों में उचित परिवर्तन करना।
12. ग्राहकों में संस्था के प्रति गर्व की भावना प्रेरित करना।
4. विक्रयकर्ताओं के प्रति दायित्व
विक्रयकर्ताओं के सहयोग से ही विक्रय विभाग का संचालन सम्भव होता है। अतः उनके प्रति विक्रय प्रबन्ध
के क प्रमुख उत्तरदायित्व निम्नानुसार हैं:
1. विक्रयकर्ताओं को विक्रय नीतियों एवं कार्यक्रमों की पर्याप्त जानकारी देना।
2. विक्रयकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करना तथा प्रशिक्षण की नवीन तकनीकों को प्रयोग में लाना।
3. उत्पाद के प्रस्तुतीकरण के लिए आवश्यक साधन एवं उपकरण उपलब्ध करना।
4. विक्रय आदेशों की तत्काल पूर्ति करने की व्यवस्था करना। 5. ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने में सहयोग करना ।
6. उत्पाद के विक्रय में आने वाली समस्याओं के निराकरण में सहायता करना। 7. विक्रय नीतियों में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी देना ।
8. पारिश्रमिक की दरों में समयानुसार संशोधन करना | 9. विक्रय कमीशन, भत्तों व बोनस के भुगतान की व्यवस्था करना।
10. विक्रयकर्ताओं के लिए पदोन्नति नीति बनाना तथा पदोन्नति के उचित अवसर प्रदान करना।
11. उत्पाद की आपूर्ति को नियमित बनाये रखना।
12. विक्रयकर्ताओं की मानसिक व सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति में योगदान देना ।
13. उनकी पारिवारिक समस्याओं के समाधान में सहायता देना।
14. संस्था की ख्याति के निर्माण में सहयोग देना।
15. विक्रयकर्ताओं के कार्यों का सही ढंग से मूल्यांकन करके उन्हें उसका लाभ देना ।
16. विक्रयकर्ताओं के भ्रमण काल में आने वाली समस्याओं का निराकरण करना।
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