अर्थव्यवस्था में सेवाओं की भूमिका - role of services in the economy

अर्थव्यवस्था में सेवाओं की भूमिका - role of services in the economy


आधुनिक अर्थशास्त्र के पिता एडम स्मिथ ने कहा है कि 'सेवाएं अनुत्पादक हैं' लेकिन समय बदल गया है और अब सेवाएं अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र के रूप में उभरा है। दुसरे महायुद्ध के बाद जागतिक बाजार में बड़ा बदलाव आया। संसाधन, मानवशक्ति, उद्योग एन शेत्रो पर महायुद्ध का परिणाम देखा गया इसके साथ ही औद्योगीकरण ने भी सेवा क्षेत्र में नई पहल की सुरुवात की और गिरती हुई अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया। जापान जैसे देशो ने दुनिया के सामने एक नया उधाहरण रखा जो अपने सिमित संसाधन के साथ बेहतरीन उत्पाद बनाने लगे साथ ही दुनुया की अच्छी से अच्छी सेवाए दुनिया को उपभोग के लिए सादर करने लगे।


भारत वर्ष में १९९० के बाद अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कुछ कदम उठाये गए जिसे हम लोग उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण के नाम से जानते है। इस कारन भारत में वर्तमान स्थिति यह है कि सेवाओं की वृद्धि दर कृषि और उद्योग दोनों से आगे निकल गई है और अब यह जीडीपी का ५०% से अधिक है। सेवा क्षेत्र की उच्चतम वृद्धि दर है और कम से कम अस्थिर क्षेत्र है। विकास विशेष रूप से सार्वजनिक सेवाओं, आईटी और वित्तीय सेवाओं में चिह्नित किया गया है। मोबाइल क्षेत्रों के उपयोग में बढ़ोतरी के कारण कुछ क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र की विकास दर ४०-५० % है। सामान्य रूप में आप निन्मलिखित स्केच मॉडल से अर्थव्यवस्था में सेवाओं की भूमिका जान सकते है।