विक्रय नियन्त्रण तकनीक - Sales Control Techniques

विक्रय नियन्त्रण तकनीक - Sales Control Techniques


एक व्यवसाय के लिए विक्रय नियन्त्रण आवश्यक है। इस नियन्त्रण को करने की कई तकनीक है। विक्रय को नियन्त्रण करने के तीन ढंग है। 1. लेखा तकनीक 2. विक्रय विश्लेषण तकनीक 3. वितरण लागत विश्लेषण तकनीक।


1. लेखा तकनीक - इस पद्धति से विक्रय नियन्त्रण करने के लिए उन लेखा पुस्तकों का सहारा लिया जाता है जो कि व्यवसाय में विद्यमान हैं, लेकिन कभी-कभी पुस्तकों से ऐसा नही मिल पाता जो विक्रय नियन्त्रण के लिए आवश्यक होता है। इसके लिये दो तरीके काम में लाये जाते है। 1. विवरण विश्लेषण तथा 2. बजट तकनीक।


1. विवरण विश्लेषण प्रत्येक संस्था दो प्रकार का विवरण तैयार करती है- एक तो आर्थिक विवरण और दूसरा लाभ-हानि विवरण । इन दोनों का विश्लेषण विक्रय कार्य की कुशलता को आंकने का आधार बनाते है। और भविष्य के लिए इसके आधार पर योजना बनाई जाती है। इन विवरणों में कुल बिक्री, शुद्ध लाभ, विक्रय-व्यय विज्ञापन व्यय, संवर्द्धन व्यय, स्टॉक आदि का उल्लेख होता है। इसका विश्लेषण कर इसके पिछले वर्षों के आकड़े से तुलना करके आगे के लिए विक्रय नियन्त्रण किया जा सकता है।


इन विवरणों का अध्ययन करके विक्रय की प्रवृत्ति व्ययों एवं उनसे लाभ को भी आंका जा सकता है। इन विवरणों से और अच्छे निष्कर्ष निकालने के लिए प्रतिशत और अनुपात का प्रयोग किया जा सकता है।

इसके लिए कुल विक्रय का कितना प्रतिशत विक्रय पर व्यय हुआ यह जाना जा सकता है। यदि व्ययों में कमी होती हैं तो यह उन्नति का एक अच्छा चिन्ह है, लेकिन इसके विपरीत यदि व्ययों में वृद्धि होती है या व्ययो का प्रतिशत बढ़ता है तो अच्छी प्रवृत्ति नही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन विवरणों का विश्लेषण विक्रय नियन्त्रण का एक प्रभावशाली ढंग है।


2. बजट तकनीक - विक्रय कार्यों के नियन्त्रण में लेखा तकनीक के अर्न्तगत दुसरा तरीका बजट तकनीक है। विक्रय नियन्त्रण के उद्देश्य से साधारणतया विक्रय व्यय बजट, बिक्रय मात्रा बजट, विज्ञापन बजट तथा विक्रय आय बजट बनाये जाते है। विक्रय व्यय बजट आगामी वर्ष के व्ययो का एक सम्भावित अनुमान है जबकि विक्रय मात्रा बजट सम्भावित बिक्री का अनुमान है।

कभी कभी एक विक्रय मात्रा बजट को ग्राहको क्षेत्रो, वस्तुओं, विक्रयकर्ताओं आदि में बांट दिया जाता है। बहुत सी संस्थायें विज्ञापन बजट बनाती है जिसमें आगामी वर्ष में विज्ञापन पर होने वाले व्यय का अनुमान होता है। इस अनुमान को विभिन्न वस्तुओं, क्षेत्रो व विज्ञापन साधनों में बाट दिया जाता है। विक्रय बजट उस समय अधिक प्रभावशाली होते है जबकि विक्रय-व्यय अनुमान व विक्रय आय अनुमान दोनो को एक साथ एक ही बजट में विक्रय आय-व्यय बजट के रूप में रखा जाता है। छोटी संस्थायें बजट तकनीक को नहीं अपनाती है जबकि बड़ी बड़ी संस्थायें इसको अपनाती है। जो संस्थायें बहुत बड़ी होती है वे अपने बजट बहुत विस्तृत रूप से बनाती है।


विक्रय नियन्त्रण को प्रभावशाली बनाने के लिए मात्रा बजट प्रथम चरण या सीढ़ी है।

यदि संस्था कई वस्तुओं को बेचती है तो इस कुल विक्रय की मात्रा को वस्तुओं, ग्राहको व क्षेत्रों के अनुसार बांट दिया जाना चाहिए एक संस्था जितना अधिक नियन्त्रण करना चाहती है उतना ही अधिक उसको बजट का विश्लेषण करना होगा लेकिन यह विश्लेषण उस संस्था के आर्थिक साधन व लेखा सुविधा पर निर्भर करेगा। विक्रय व्यय बजट का उद्देश्य व्यय किये गये प्रत्येक रुपये पर अधिक लाभ प्राप्त करना है। II. विक्रय विश्लेषण तकनीक -


इसमें संस्था के विक्रय रिकार्ड का व्यवस्थित ढंग से एवं गहराई से अध्ययन किया जाता है कि ऐसी सूचनायें इनसे प्राप्त की जायं जिन्हें नियोजन, निर्देशन एवं विक्रय कार्य सम्पादन के संबंध में काम में लाया जा सके।

विक्रय विश्लेषण तकनीक से विक्रय क्रियाओं पर नियन्त्रण नहीं किया जा सकता है। विक्रय विश्लेषण तकनीक उन विभिन्न कारणों के प्रभाव को मापने के लिए किया जाता है जिनका विक्रय की मात्रा लागत व लाभ पर प्रभाव पड़ता है, वास्तव में विक्रय विश्लेषण तकनीक का प्रमुख कार्य प्रबन्धको को विक्रय प्रयत्नों व्ययो के संबंध में निर्देशन देने में सहायता करना है।


विक्रय विश्लेषण तकनीक के अनुसार, नियन्त्रण करने के लिए सूचनाएं संस्था के बीजक, ग्राहक आर्डर फार्म विक्रय नियन्त्रण रिकार्ड, विक्रयकर्ता रिपोर्ट, आदि से प्राप्त की जाती है। जिससे विक्रयकर्ता, डीलर, वितरक, शाखा प्रबन्धक आदि से बातचीत करने व उनमें सुधार करने का आधार मिल जाता है। जिससे उनके प्रशिक्षण व पुन: प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है। विक्रय विश्लेषण तकनीक के अर्न्तगत अन्य तरीके जैसे, क्षेत्रीय विश्लेषण, वस्तु पंक्ति विश्लेषण ग्राहक विश्लेषण व विक्रयकर्ता कार्य विश्लेषण आते है।