बिक्री बल का मुआवजा - sales force compensation

बिक्री बल का मुआवजा - sales force compensation


अभिप्रेरणा की परीभाषाये इस प्रकार है


मैक्फार लैंड के अनुसार - "अभिप्रेरणा का सम्बन्ध किसी कर्मचारी या अधिनस्थ के मन मस्तिष्ठ में कार्य कर रही उन शक्तियों से है जो उसे किसी कार्य को निश्चित विधियों से करने या नही करने के लिए प्रेरित करती है।" बीच के अनुसार “अभिप्रेरणा एक लक्ष्य या परिणाम को प्राप्त करने के लिए शक्ति के विस्तार की इच्छा है।"


अभिप्रेरणा का अर्थ एवं परिभाषा अभिप्रेरणा एक आन्तरिक इच्छा या भावना है जो किसी व्यक्ति को पूर्व निश्चित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्प्रेरित करती है।

यह किसी व्यक्ति की उन इच्छाओं, आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को समझने की प्रक्रिया है जो उसे किसी कार्य के लिए गति शक्ति एवं उत्साह प्रदान करती है। अभिप्रेरणा के उद्देश्य - अभिप्रेरणा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को कार्य करने के लिए अभिप्रेरित करना है। सामान्यत: अभिप्रेरणा की प्रक्रिया के निम्नलिखित उद्देश्य होते है।


1. विक्रेताओं को अधिक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना।


2. कार्यक्षमता में वृद्धि करने हेतु प्रेरित करना । 


3. विक्रेताओं को कार्य या सेवा के तरीको में सुधार करने के लिए प्रेरित करना।


4. विक्रेताओं का पूर्ण सहयोग प्राप्त करना ।


5. विक्रेताओं का आपस में अच्छे सम्बन्धों का विकास करना ।


6. विक्रेताओं के मनोबल को बढ़ाना।


7. विक्रेताओं एवं प्रबन्धकों में अच्छे सम्बन्ध स्थापित करना ।


8. विक्रेताओं की आर्थिक सामाजिक और मानसिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करना।

अभिप्रेरण प्रक्रिया विक्रेताओं को अभिप्रेरित करने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनायी जाती है। इसमें निम्नलिखित चरण है।


1. उद्देश्यों का निर्धारण विक्रेताओं के अभिप्रेरित करने की प्रक्रिया में सर्वप्रथम उद्देश्यों का निर्धारण हो जाने के पश्चात अभिप्रेरणा के स्तर, साधनो, विधियों, दिशा आदि के सम्बन्ध में उपयुक्त निर्णय लिए जा सकते है। अतः प्रबन्धको को यह निश्चित कर लेना चाहिए कि किन विक्रेताओं को किन कारणों से अभिप्रेरित किया जाना चाहिए।


2. अभिप्रेरक उपकरणों का निर्धारण अभिप्रेरक उपकरणों का निर्धारण देश,

काल, समाज एवं विक्रेताओं की आवश्यकताओं तथा संस्था की वित्तीय स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए। इससे ये जाना जा सकता है कि व्यक्ति विशेष या समूह की आवश्यकताएँ क्या है और उसे किस अभिप्रेरणाओं के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।


3. सम्प्रेषण अभिप्रेरण को सफल बनाने के लिए यह जरुरी है कि प्रबन्धक अभिप्रेरणा के सन्देश को विक्रेताओं तक पहुचायें तथा विक्रेता की प्रतिक्रिया पर ध्यान दे। आपसी विचार विनिमय एवं संदेश की पुष्टि अभिप्रेरण प्रक्रिया का एक आवश्यक चरण है।


4. सहायक वातावरण का सृजन - विक्रेताओं की अभिप्रेरण में सहायक वातावरण का सृजन करना जरुरी है।

इसमें कार्य दशाओं एवं भौतिक वातावरण का भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अतः विक्रेताओं को साधन, सुविधाओं एवं प्रशिक्षण उपलब्ध करा के सहायक वातावरण का निर्माण करना चाहिए।


5. हित संयोजन अभिप्रेरण की प्रक्रिया विक्रेताओं के पारस्परिक हितो के संयोजन पर आधारित हों।


अभिप्रेरण के साधनों, उपकरणों एवं विधियों के निर्धारण में संस्था एवं विक्रेताओं के व्यक्तिक हितों में


इस प्रकार से सामन्जस्य किया जाना चाहिए कि विक्रेताओं को अधिक से अधिक प्रेरणा मिल सके।


6. उपयुक्त अभिप्रेरक का चयन एवं प्रयुक्ति अभिप्रेरण योजना का चयन अत्यन्त सर्तकता के साथ - किया जाना चाहिए अभिप्रेरकों के चयन के समय अभिप्रेरण योजनाओं के पिछले परिणामों एवं भावी सम्भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, अभिप्रेरण योजनाओं को लागू करने के समय पद्धति का भी निर्धारण किया जाना चाहिए।


7. समूह भावना का विकास अभिप्रेरण प्रक्रिया का एक अंग समूह भावना का विकास भी है। विक्रेताओं को कार्य एवं प्रयत्न संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए होने चाहिए। समूह भावना को विकसित करने के लिए व्यक्ति के स्थान पर समूह या संस्था के महत्व को स्वीकार किया जाना चाहिए।


8. अनुवर्तन इस चरण में लागू की गई अभिप्रेरण योजनाओं की जाँच की जाती है। तथा उनसे उत्पन्न परिणामों की पूर्व निश्चित परिणामों से तुलना की जाती है। अभिप्रेरण योजनाओं से आवश्यक परिणाम न प्राप्त होने पर उनके कारणों का पता लगाकर उनको दूर करने की कार्यवाही की जाती है। इस चरण से अभिप्रेरण योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है ताकि भावी योजनाओं का विकास एवं क्रियान्वयन सही प्रकार के किया जा सके।