बिक्री कोटा - sales quota

बिक्री कोटा - sales quota


कोटा से आशय


वस्तुओं के विक्रय क्षेत्रों का निर्धारण एवं कोटा दो ऐसे उपकरण है जिनका उपयोग प्रत्येक प्रगतिशील उद्योगपति के द्वारा किया जाता है। “कोटा से अर्थ विक्रय लक्ष्य के उस भाग से है जिसको एक विशिष्ट दुकानदार या विक्रयकर्ता या डीलर के द्वारा एक निश्चित अवधि में पूरा करना पड़ता है।" यह कोटा रुपयों की मात्रा, वस्तुओं या इकाईयों की संख्या या शुद्ध लाभ की मात्रा में निर्धारित किया जाता है। कोटा के क्षेत्र में कुछ विद्वानों की परिभाषायें इस प्रकार है


1. जे. आर. डॉबमैन के अनुसार, कोटा एक निष्पादन है जिसकी यथोचित रीति से आशा की जाती है। विशेष रूप से यह विक्रय की एक अनुमानित मात्रा है जिसको उद्देश्य के रूप में पूर्व निर्धारीत समय में प्राप्त किया जाता है।"


2. कण्डिफ व स्टिल के अनुसार “कोटा एक परिणाम रूप में वर्णित लक्ष्य है जिसको एक विशिष्ट विपणन इकाई जैसे विक्रयकर्ता या क्षेत्र को दिया जाता है।"


3. अमरीकन मार्केटिंग एसोशियसन ने विक्रय कोटा का अर्थ "एक विक्रय लक्ष्य से लगाया है जो


विक्रय प्रयत्नो के प्रबन्ध के व्यवहार में एक विपणन इकाई को दिया गया है।"


इन परिभाषाओं से यह अर्थ निकलता है कि विक्रय क्षेत्र में कोटा


(1.) संस्था की कुल अनुमानित बिक्री का एक हिस्सा है जो 


(2.) एक विक्रयकर्ता, शाखा, डीलर, वितरक आदि को एक निर्धारित समय में बेचने के लिए दिया जाता है। 


(3.) यह एक लक्ष्य है जिसको पूरा करने का उनका उत्तरदायित्व होता है।


विक्रय कोटा निर्धारण को प्रभावित करने वाले घटक


विक्रय कोटा निर्धारण में बहुत से घटक प्रभाव डालते है। यह घटक निम्न प्रकार से है -


1. गत वर्ष की बिक्री,


2. भावी विक्रय अनुमान


3. बाजार सम्भाव्यताएँ


4. वस्तु सुधार


5. विज्ञापन एवं विक्रय संवर्द्धन बजट


6. उत्पादन मात्रा


7. प्रतियोगिता


8. उपभोक्ता की क्रय शक्ति आदि।