विक्रयकला की प्रमुख विशेषताएँ - salient features of salesmanship
विक्रयकला की प्रमुख विशेषताएँ - salient features of salesmanship
विक्रयकला की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है
1. ग्राहकों की क्रय समस्याओं का समाधान करने की कला विक्रयकला ग्राहकों की क्रय समस्याओं का समाधान करने की एक योग्यता है। इसके माध्यम से एक कुशल विक्रेता अपने कौशल, अनुभव एवं दूरदर्शिता से ग्राहकों की उत्पाद से सम्बन्धित समस्याओं का निपटारा करता है। इसके अन्तर्गत बाजार में उपलब्ध वैकल्पिक उत्पादों के गुणों के आधार पर व्यापक विश्लेषण के द्वारा उपयुक्त उत्पाद के चयन का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
2. भावनाओं एवं विचारों का विक्रय-विक्रयकला मत, विचार या दृष्टिकोण का विक्रय है। इस कला के प्रभाव से ग्राहक विक्रेता के विचारों के अनुसार ही उत्पाद क्रय का निर्णय लेता है।
इसके कला के अन्तर्गत विक्रेता अपने तार्किक कौशल द्वारा ग्राहक की मस्तिष्क को प्रभावित करता है जिसके परिणामस्वरूप खरीद क्रिया सम्पन्न होती है।
3. संभावित ग्राहकों को प्रोत्साहित करना- विक्रयकला विद्यमान ग्राहकों पर ही ध्यान नही देती बल्कि संभावित ग्राहक तैयार करने पर भी लगातार बल देती है जिससे ग्राहकों की संख्या में निरन्तर वृद्धि होती रहें।
4. वैयक्तिक गुण एवं योग्यता- विक्रयकला एक ऐसा गुण है जो उत्पाद के प्रति चेतना तथा ग्राहक के मस्तिष्क में उसे क्रय करने की प्रेरणा को उजागर कर देता है।
5. विक्रयकला विज्ञान एवं कला दोनों है-विक्रयकला में विज्ञान एवं कला दोनों के रूप में देखा जा सकता है। कला के माध्यम से ग्राहकों के मस्तिष्क में यह भावना पैदा की जाती है कि वस्तु खरीदने मात्र से ही उसे संतुष्टि मिलेगी। विज्ञान के रूप में यह कहा जा सकता है कि विक्रयकला के कुछ आधारभूत सिद्धान्त है जिसके प्रयोग के द्वारा विक्रेता अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
6. ग्राहकों की भावनाओं को जरूरतों में परिवर्तित करना विक्रयकला के माध्यम से एक विक्रेता अपने उत्पाद की विशेषता एवं लाभदायकता के बारे में क्रेता को जानकारी देकर उनकी दबी इच्छाओं को आवश्यकताओं में बदलकर क्रय के लिये प्रेरित करता है।
7. क्रय अभिप्रेरणा - विक्रयकला के द्वारा ग्राहकों के क्रय करने के लिये अभिप्रेरित किया जा सकता है। इसके द्वारा ग्राहकों की इच्छा को जागृत करके आवश्यक बना दिया जाता है।
8. पारस्परिक हितों एवं लाभों में अभिवृद्धि – यह ग्राहक एवं विक्रेता दोनों को लाभ पहुँचाता है। विक्रेता ग्राहक हित को ध्यान में रखकर अपने विक्रय को पूर्ण करता है। इससे ग्राहक विश्वास तथा ब्रांड प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है जो ग्राहक संतुष्टि को जन्म देती है। ग्राहक संतुष्टि विक्रेता के लाभों का आधार बनती है।
9. ग्राहक संदेह का निर्वारण आधुनिक विक्रयकला "विश्वास करो संदेह नही" पर आधारित है। इसे मोलभाव का कोई स्थान नहीं क्योंकि मोलभाव की प्रवृत्ति अनेक संदेहों को जन्म देती है। आधुनिक विक्रयकला एक मूल्य की नीति को अपनाकर ग्राहक का विश्वास कायम रखती है।
10. ग्राहकों को आकर्षित करने की कला एक विक्रकता में कई आधारभूत गुणों का होना आवश्यक है जिससे कि वह अपने उत्पाद को ऐसे आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करें कि ग्राहक उत्पाद क्रय किये बिना नहीं रह पायें। अपने मोहक व्यक्तित्व के द्वारा विक्रेता अपने उत्पाद को ग्राहकों के लिये आवश्यक बना देता है।
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