उपभोक्ता बाजार का खंडीकरण - segmentation of the consumer market

उपभोक्ता बाजार का खंडीकरण - segmentation of the consumer market


उपभोक्ता बाजार को विभाजित करने के लिए दो आकारों के समूह को प्रयुक्त किया जाता है। कुछ अनुसंधानकर्ता विशिष्टका, जैसे भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, मानसिक ग्राफ इत्यादि पर बाजार का खंडीकरण कर सकते है। अन्य समंक उनकी विचारधाराओं जैसे ग्राहक का हितकारी समर्थन, सटीक परिस्थिति या ब्रांडों का प्रतिचयन है। बाजार के खंडीकरण के लिए अनेक समंकों का प्रयोग किया जाता है ताकि ग्राहकों के अंतरंग अन्तरों का चिंहित किया जा सके और विपणन प्रोग्रामों को एक लाभप्रद स्थिति में स्थापित किया जा सके।


भौगोलिक खंडीकरण


विभिन्न उपभोक्ता समूह बनानें के लिए बाजार की इकाइयों का भौगोलक ढंग से खंडीकरण किया जाता है।

प्रान्तीय विपणन कार्य को विशेष पोस्टल कोड का इस्तेमाल करते हुए उनको सही दिशा में अभिव्यक्त किया जाता है। भौगोलिक खंडीकरण का अभिप्राय एक बाजार को भौगोलिक स्तर पर विभाजित करने से है।


जनसांख्यिकीय खंडीकरण


जनसांख्यिकीय खंडीकरण प्रक्रिया में बाजार को उपभोक्ता करों के आधार पर (जैसे- आयु, परिवार आकार, पारिवारिक जीवन चक्र, लिंग, आय, व्यवसाय, शिक्षा स्तर, पीढ़ी, राष्ट्रीयता, सामाजिक श्रेणी आवश्यकताएं व अपेक्षाऐं प्रयोग दर और उत्पाद का ब्रांड, गुणवत्ता को अपेक्षा आदि पर जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ संबंधित किया जाता है। जनसांख्यिकीय खंडीकरण परिवर्तनों को आसानी से निम्न प्रकार से मापा जा सकता है।


उम्र व जीवन चक्र


ग्राहकों की आवश्यकताएं और योग्यताए उनकी उम्र के बदलाव से साथ बदलती है। उदाहारणार्थ, छोटी उम्र के बच्चों के लिए खरीदे गये उत्पाद, जैसे- जन्मघुट्टी, बेबी पाउडर, डाईपर, इत्यादि 5 वर्ष कि आयु के बाद आवश्यक नहीं होते हैं। इसी तरह बडी उम्र में कुछ दवाईयां, तेल, दर्द निवारक जैल इत्यादि खरीदे जाते हैं।


जीवन अवस्था


समान जीवन चक्र में रहने वाले लोग भी जीवन अवस्था में भिन्न हो सके है। जीवन अवस्था किसी व्यक्ति विशेष के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है।

ये जीवन अवस्थाएं विपणनकर्ताओं के लिए उपभोक्ताओं के अपनी अवस्था को सहने में सहायक होते हैं, जैसे एक नौजवान नौकरी के लिए अपने घर से दूर अकेला रहता है। विपणनकर्ता उस अवस्था के लिए रेडीमेड स्नैक्स छोटी पैकिंग में उत्पाद आदि का प्रचार कर उसकी अवस्था को सहायक बनाते हैं।


लिंग


पुरुष एवं स्त्रीयां में भिन्न-भिन्न व्यवहारिक व व्यक्तिगत लक्षण होते हैं जो उनके लिंगीय और सामजिकता के आधार पर होते हैं। कुछ पुरुष प्रधान बाजारों की परम्पराओं में भिन्न विपणन एवं प्रचार हो सकता है। लिंगीय खंडीकरण और उनमें बदलाव के लक्ष्णों के अनुसार विपणन प्रक्रिया को अमल में लाया जाता है। एक जीन्स बनाने वाली कंपनी अपने बाजार में लिंग के आधार पर वर्गीकृत कर सकती है।


आय


उत्पाद या सेवा की श्रेणियों के मद्देनज़र आय को वर्गीकृत पद्धति के लिए अपनाया जाता है। हालांकि ग्राहक की आय विपणन प्रक्रिया का उत्पाद के क्रय पद्धति को परिवर्तित या प्रभावित करने का कोई सही माप नहीं है। किन्तु विपणनकर्ता अपने उत्पाद या सेवा का रेट तय कर किसी आय के स्तर को लक्षित कर सकता है। आय के आधार पर एक मार्केट को निम्न आय, मध्यमवर्गीय एवं विशिष्ट आय में विभाजित किया जा सकता है। उदाहारणार्थ, कपड़े धोने का पाउडर विपणन करने वाली कंपनी इस आधार का प्रयोग कर सकती हैं।


पीढ़ी


प्रत्येक पीढ़ी उस क्षण या युग से प्रभावित होती है जिसमें उसका मुख्य समय व्यतीत हुआ हो। वे कुछ समरुप दृष्टि से दिखने वाले मूल्यों में समानता रखते हैं।

विपणनकर्ता आम तौर पर ऐसे सहगुणित समूहों में प्रमुखतः दृश्यों का उपयोग कर अपने ब्राण्ड के प्रति प्रचार के द्वारा उपभोक्ता मूल्य बना सकते हैं। उदाहरणार्थ, पतंजली आयुर्वेद के सभी उत्पाद भारत के एक युग आयुर्वेद के आधार पर प्रचार करता है। वृद्धिगत, कंपनियां समयानुसार आकार में ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुरुप अपनी विपणन पद्धतियों मे परिवर्तन करती रहती है।


सामाजिक श्रेणी


समाजिक श्रेणी ग्राहकों की उन्मुकताओं पर विशेष ध्यान रखती हैं। कई कम्पनियां सामाजिक श्रेणी के आधार पर ग्राहकों के लिए विशिष्ट उत्पाद एवं सेवाएं प्रदान करती हैं,

जैसे- कोई गाड़ी बनाने वाली कंपनी एक छोटी गाड़ी में बड़ी गाड़ी के कुछ गुण डालकर उच्च सामाजिक श्रेणी को लक्षित कर सकती है।


मनोवैज्ञानिक खंडीकरण


ग्राहकों की आवश्यकताओं एक अपेक्षाओं के अध्ययन करने के लिए मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति जांचने का यह सर्वात्तम साधन है। मनोवैज्ञानिक खंडीकरण में क्रेताओं के समूह को उनके जीवन शैली या व्यक्तित्व के आधार पर विभिन्न भागों मे बांटा जाता है।


उच्च साधनों, सोचनीय, सफल और अनुभव वाले चारों समूहों की प्राथमिकताएं ।

सोचनीय एवं परिवर्तनतीय हैं- चारों ज्ञान, स्वभाव, उपयोगिता एवं प्रतिक्रियाओं के आधार पर उनकी मानसिकता का पैमाना मापा जाता है।


उनके ज्ञान व्यक्तित्व,


व्यावहारिक खंडीकरण


व्यावहारिक खंडीकरण की अवस्था में क्रेताओं को


मनोवृत्ति गुणवत्ता. या प्रतिक्रियाओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।



सबसे बड़े त्यौहार दिवाली पर घर में पेंट कराना पसंद करते हैं

जबकि ईसाई क्रिसमस या कुछ उपभोक्ता घर में शादी से पहले सफेदी व रंगाई करवाते हैं।


→ लाभ:


ग्राहकों का उत्पाद के प्रति उनके अपेक्षित लाभ के अनुरुप वर्गीकृत किया जा सकता है। किसी उपभोक्ता को टूथपेस्ट दांत चमकाने के लिए चाहिए व कुछ को मसूडों को सड़न से बचाने के लिए।


→ उपयोग दर :


बाजारों को अल्म, मध्यम एवं भारी उत्पाद प्रयोगकर्ताओं के हिसाब से वर्गीकृत किया जा सकता है,

विशेषकर उन उत्पादों को जिनका उपयोग भारी मात्रा में किया जाता है। उदाहरण के लिए चाय या कॉफी के विक्रेता अपने उत्पाद के लिए इस आधार को प्रयोग कर बाजार को वर्गीकृत कर सकते हैं।


→ क्रेता कि तैयारी स्थिति :


बाजार विभिन्न व्यक्तियों के क्रय तैयारी के आधार पर भी विभाजित होता है। कुछ व्यक्तियों को उत्पाद के बारे में अनभिज्ञता होती है, कुछ जानकार होते हैं और कुछ उन्हें खरीदने के इच्छुक होते हैं। विक्रेता इन आधारों पर मार्के को विभाजित कर उस खंड को चुन सकता है जिस को आयानी से अपना ब्राण्ड बेचने में सक्षम है। → निष्ठता स्थिति :


क्रेताओं को उनकी निष्ठानुसार चार भागों में बांटा जा सकता है।


. सर्वाधिक सक्रिय


विभक्त निष्ठा


स्थानान्तरित निष्ठा


परिवर्तनीय


एक संस्था इन चरों को मापन से बहुत कुछ सीख सकती है। किसी उपभोक्ता की निष्ठा के आधार पर बाजार का खंडीकरण किया जा सकता है।


→ मनोवृत्ति एवं दृष्टिकोण


उपभोक्ता की मनोवृत्ति को पांच खंडों में विभाजित किया जा सकता है


उमंगी, उत्साही


रचनात्मक, सकारात्मक


उदासीन


. परस्पर विरोधी


प्रतिकूल स्वभाव वाला