बीमा के प्रकार - type of insurance
बीमा के प्रकार - type of insurance
बीमा के अनुबंध दो प्रकार की श्रेणियों में विभाजित किए जा सकते हैं। वे अनुबंध जिनमें क्षतिपूर्ति का उत्तरदायित्व होता है और वे जिनमें क्षतिपूर्ति का प्रश्न नहीं होता वरन् एक निश्चित धनराशि अदा करने का अनुबंध होता है। क्षतिपूर्ति विषयक बीमा सामुद्रीय (मैरीन इंश्योरेंस) भी हो सकता है और गैरसामुद्रीय भी। पहले का उदाहरण समुद्र द्वारा विदेशों को भेजे जानेवाले समान की सुरक्षा का बीमा है और दूसरे का उदाहरण अग्निभय अथवा मोटर का बीमा है। क्षतिपूर्ति के अनुबंध में केवल क्षति की पूर्ति की जाती है। यदि एक ही वस्तु का बीमा एक से अधिक स्थानों (बीमा संस्थानों) में है तो भी बीमा करानेवाले को क्षतिपूर्ति की ही धनराशि उपलब्ध होती है।
हाँ, वे बीमा कंपनियाँ आपस में अदायगी की धनराशि का भाग निश्चित कर लेती हैं। अतः क्षतिपूर्ति अनुबंध का यह सिद्धांत जीवन बीमा तथा दुर्घटना बीमा पर लागू नहीं होता। अतः जीवन बीमा तथा दुर्घटना बीमा कितनी भी धनराशि के लिए किया गया है, बीमा करानेवाले को (यदि वह जीवित है) अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति को वह पूरी रकम उपलब्ध होती है।
बाकी विषय वस्तु अथवा प्रकृति के आधार पर बीमा को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है 1. जीवन बीमा 2. अग्नि बीमा 3. सामुद्रिक बीमा 4 अन्य प्रकार के बीमा
1. जीवन बीमा
मानव जीवन अनिश्चितताओं से भरा होता है। जीवन यापन के लिए मनुष्य को अनेक क्रियाएं करनी होती है,
जिनमें कदम-कदम पर जोखिम होते हैं। किसी दुर्घटना या बीमारी से असमय मृत्यु हो सकती है। ऐसी स्थिति में मृतक के परिवार को वित्तीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार बुढापे मे व्यक्ति के पास आराम से जीवन यापन करने, चिकित्सा कराने के लिए पर्याप्त धन नहीं होता है। अपने बच्चों के विवाह या उसे उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है। जीवन बीमा के द्वारा हमें भविष्य की इन परिस्थितियों से सुरक्षा प्राप्त हो सकती है। इसमें बीमाकार एक निश्चित राशि बीमित व्यक्ति की मृत्यु अथवा एक निश्चित अवधि की समाप्ति पर देने का वचन देता है। इसके बदले मे बीमाकार (बीमा कंपनी) किश्तों में एक निश्चित प्रीमियम राशि लेता है. अब क्योकिं बीमित जोखिम का घटित होना सुनिश्चित है। अतः बीमित व्यक्ति को बीमा राशि देर-सबेर प्राप्त होना भी सुनिश्चित है. बीमित व्यक्ति अपने को सुरक्षित महसूस करता है अतः जीवन बीमा को जीवन आश्वासन भी कहा जाता है।
जीवन बीमा जीवन की अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रारंभ किया गया था। लेकिन धीरे-धीरे इसके क्षेत्र को स्वास्थ्य बीमा, विकलांगता बीमा, पेंशन योजना आदि तक बढ़ा दिया गया है। मूल रूप से जीवन बीमा पालिसियां दो प्रकार की होती हैं। क. आजीवन बीमा पालिसी एवं ख. बंदोबस्ती बीमा पालिसी आजीवन बीमा पालिसी में प्रीमियम की राशि का भुगतान बीमित को आजीवन अथवा एक निश्चित अवधि के लिए नियमित रूप से करना होता है. बीमा राशि बीमित के उतराधिकारियों को उसकी मृत्यु के पश्चात देय होती है। यह पालिसी ऐसे व्यक्ति द्वारा ली जाती है जो अपनी मृत्यु के पश्चात अपने पर आश्रित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता पहुंचाना चाहता है। दूसरी ओर बंदोबस्ती बीमा पालिसी एक निश्चित अवधि के लिए होती है अर्थात् बीमित व्यक्ति द्वारा एक निश्चित आयु को प्राप्त करने अथवा उस आयु को प्राप्ति करने से पूर्व उसकी मृत्यु की स्थिति में, बीमा कंपनी द्वारा बीमा राशि का भुगतान किया जाता हैं। आजीवन और बंदोबस्ती पालिसियों के अतिरिक्त कई अन्य पालिसियाँ भी शुरू की गई।
जिनका उद्देश्य ग्राहकों को राशि निवेश हेतु प्रोत्साहन देना है। जोखिमों से सुरक्षा और बचत का लाभ साथ-साथ मिलने से इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। कुछ पालिसियों का संक्षिप्त विवरण
1. संयुक्त जीवन बीमा पालिसी
यह पालिसी दो या दो से अधिक व्यक्तियों के जीवन को संयुक्त रूप से बीमित करती है। उनमें से किसी एक की मृत्यु होने पर जीवित व्यक्ति/व्यक्तियों को बीमा राशि देय होती है। सामान्यतः यह पालिसी पति पत्नी के जीवन पर अथवा दो साझेदारों के जीवन पर संयुक्त रूप से की जाती है।
2. धनवापसी (Money Back) पालिसी
इस योजना में पालिसीधारक को कुछ समय के अंतराल पर भुगतान किया जता है। यह सामान्य स्थायी निधि बीमा पालिसी से हटकर हैं जिसमें जीवित रहने पर कुल भुगतान का लाभ केवल एक निश्चित आयु की प्राप्ति के बाद ही मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि धनवापसी पालिसी 20 वर्ष के लिए ली गई है तो बीमित राशि का 20 प्रतिशत प्रति पाँच वर्ष, 10 वर्ष, 15 वर्ष एवं शेष 40 प्रतिशत बोनस सहित 20 वें वर्ष के पश्चात देय हो जाता है।
3. पेंशन योजना
इस योजना के अंतर्गत पालिसी की अवधि के पश्चात ही जीवित रहने पर पालिसी धारक को पालिसी की राशि का भुगतान किया जाता है।
बीमित राशि अथवा पालिसी की राशि का भुगतान जैसे- मासिक, छमाई अथवा वार्षिक किस्तों पर किया जाता है। उन लोगों के लिए उपयोगी है जो एक निश्चित आयु के पश्चात नियमित आय चाहते हैं। 4. यूनिट योजनाएं
यह योजनाएं दोहरे लाभ अर्थात निवेश एवं बीमा दोनों का लाभ प्रदान करती हैं। पालिसी धारक द्वारा जिस प्रीमियम की राशि का भुगतान किया जाता है उसे विभिन्न कंपनियों के अंशों एवं ऋण पत्रों के क्रय पर खर्च किया जाता है। परिपक्वता राशि मुख्य रूप से निवेश के बाजार मूल्य पर निर्भर करती है।
5. सामूहिक बीमा
सामूहिक बीमा योजनाएं कुछ व्यक्तियों कुछ व्यक्तियों के समूह को कम लागत पर जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान करने के लिए होती है।
यह योजना किसी भी व्यावसायिक इकाई अथवा कार्यालय के कर्मचारियों के समूह के लिए उपयोगी है। हमारे देश में जीवन बीमा का भारतीय जीवन बीमा निगम करती है। जिसका 19 जनवरी 1956 को राष्ट्रीयकरण किया गया था। अब बहुत सारी निजी कंपनियां भी जीवन बीमा व्यवसाय से आ गई है।
2. अग्नि बीमा
आग से होने वाली हानियों से सुरक्षा प्राप्त करने अग्नि बीमा कराया जाता है। अग्नि बीमा एक ऐसा अनुबंध है जिसमें बीमाकार प्रीमियम के बदले में अग्नि से होने वाली हानि की राशि या क्षतिपूर्ति करने का वचन देता है।
अग्नि बीमा सामान्यतः एक वर्ष के लिए किया जाता है। इसका हर वर्ष नवीनीकरण भी कराया जा सकता है।
अग्नि से होने वाली हानि का भुगतान दो शर्तों के पूरा होने पर ही किया जाता है।
1. आग वास्तव में लगी हो, एवं
2. आग जानबूझ नहीं लगाई गई हो बल्कि दुर्घटनावश लगी हो यहाँ आग लगने का कारण महत्व नहीं रखता।
अग्नि बीमा अनुबंध क्षतिपूर्ति का अनुबंध है अर्थात बीमित सम्पत्ति की कीमत, अग्नि से क्षति अथवा पालि राशि तीनों में से जो भी कम हो, से अधिक राशि का दावा नहीं कर सकता।
अग्नि से हानि अथवा क्षति में हानि को कम करने के लिए की गई कोशिशों से होने वाली हानि अथवा क्षति भी सम्मिलित होती है।
3. सामुद्रिक बीमा
आज सामुद्रिक व्यापार काफी बढ़ गया है, साथ ही साथ इसके खतरे भी बढ़ गये है। सामुद्रिक बीमा एक ऐसा अनुबंध है जिसमें बीमा कंपनी जहाज अथवा जहाजी माल को समुदीर यात्रा के दरम्यान होने वाले जोखिम से क्षति की पूर्ति का आवश्वासन देती है। समुद्री यात्रा के मध्य जहाज को विभिन्न प्रकार का जोखिम होता है, तुफान, चट्टान या किसी अन्य जहाज से टकरा जाना आदि। सामुद्रिक हानियां तीन प्रकार की हो सकती हैं 1. जहाज को हानि 2. जहाजी माल की हानि एवं 3. माल भाड़े की हानि इन हानियों का पृथक-पृथक बीमा किया जाता है।
जहाज के बीमा को हल बीमा, माल के बीमा को माल बीमा (कार्गो) और भाड़े के बीमे को भाडा बीमा कहते हैं। अग्नि बीमा और समुद्री बीमा, सामान्य बीमे के अंतर्गत आते है. सामान्य बीमा का राष्ट्रीयकरण 13 मई 1971 को किया गया।
4. अन्य प्रकार के बीमा
साधारण बीमा कंपनियां कई अन्य जोखिमों का बीमा का बीमा करती हैं जिनमें से कुछ बीमा पालिसियों का संक्षिप्त विवरण है:
1. वाहन बीमा
यात्री कार, वैन, मोटर साइकिल, स्कूटर आदि का बीमा दुर्घटना से वाहन को होने वाली क्षति,
चोरी से होने वाली हानि तथा दुर्घटना के कारण तीसरे पक्ष को चोट पहुँचने अथवा मृत्यु हो जाने से उत्पन्न देनदारी के विरूद्ध बीमा है। वास्तव में वाहन का तीसरे पक्ष के संबंध में बीमा अनिवार्य है।
2. स्वास्थ्य बीमा
यह पालिसी धारक को बीमारी अथवा चोट लगने आदि से होने वाले इलाज पर व्यय से सुरक्षा प्रदान करती है। इससे चिकित्सा दावा बीमा अथवा मैडीक्लेम बीमा कहते हैं। आजकल यह सर्वाधिक लोकप्रिय बीमा है।
3. फसल का बीमा
यह सूखा अथवा बाढ़ के कारण फसल हो होने वाली हानि से किसानों को संरक्षण प्रदान करता है।
4. रोकड़ का बीमा
यह बैंक एक अन्य व्यावसायिक सस् थानों को नकदी एक स्थान से दसू रे स्थान पर ले जाते समय रास्ते में चोरी या किसी अन्य कारण से होने वाली हानि के विरूद्ध संरक्षण प्रदान करता है।
5. पशुओ का बीमा -
यह गायें भैसें, बैल आदि के दुर्घटनावश बीमारी आदि से मृत्यु के कारण होने वाली हानि के जोखिम का बीमा है। 6. राजेश्वरी महिला कल्याण बीमा योजना
यह योजना बीमित महिला की मृत्यु अथवा उसके विकलांग हो जाने पर परिवार के सदस्यों को राहत पहुंचाती है।
7. अमत्र्य शिक्षा योजना बीमा पालिसी
यह आश्रित बच्चों की शिक्षा के लिए ली जाने वाली पालिसी है। यदि बीमित व्यक्ति को कोई शारीरिक चोट पहुंचती है जिसके का कारण उसकी मृत्यु हो जाती है
अथवा वह स्थाई रूप से विकलांग हो जाता है तो बीमा कम्पनी बीमित अविभावकों को आश्रित बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करेगी।
8. चोरी से क्षति का बीमा
इस प्रकार के बीमे में बीमा कम्पनी बीमित को चोरी से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति का वचन देती है। चोरी या डकैती से हानि का अर्थ है चल संपत्ति की लूटपात, चोरी आदि से हानि।
9. विश्वसनीयता का बीमा
कर्मचारियों के द्वारा रोकड़ (नकदी) का घोटाला या फिर वस्तुओं के दुरूपयोग से हानि के जोखिम से संरक्षण के लिए व्यवसायी उन कर्मचारियों की, जो रोकड़ को संभालते हैं या फिर स्टोर के प्रभारी हैं, बेइमानी अथवा धोखे से होने वाली हानि के जोखिम के विरूद्ध बीमा कराता है। इसे विश्वसनीयता का बीमा कहते हैं।
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