विक्रय संगठन के प्रकार - type of sales organization
विक्रय संगठन के प्रकार - type of sales organization
एक विक्रय संगठन के निम्नलिखित सिद्धान्त है
1. उद्देश्य का सिद्धान्त - विक्रय संगठन के उद्देश्य संस्था के उद्देश्य के अनुरूप होने चाहिये । विक्रय संगठन सम्पूर्ण संगठन का एक भाग होता है, अतः इसके उद्देश्य संस्था के मूल उद्देश्यों के अनुरूप होने चाहिये।
2. अनुरूपता का सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार विक्रय विभाग के समस्त कर्मचारियों के अधिकार को इस तरह से निर्धारित किया जाना चाहिये जिससे आपस में विवाद न हो।
3. विशिष्टीकरण का सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार किसी व्यक्ति को कोई एक विशेष कार्य का दायित्व ही सौंपा जाना चाहिये। इससे एक कार्य विशेष में विशिष्ट योग्यता होने पर व्यक्ति की कार्य क्षमता बढ़ जाती है।
4. समन्वय का सिद्धान्त विक्रय संगठन के विभिन्न कर्मचारियों तथा संस्था के अन्य कर्मचारियों में समन्वय स्थापित होना चाहिये। समन्वय के अभाव में संगठन सुचारू रूप से कार्य नहीं कर सकता है।
5. उत्तरदायित्व का सिद्धान्त संगठन में वरिष्ठ अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों के
प्रति पूर्ण उत्तरदायी रहना चाहिये।
6. नियंत्रण के विस्तार का सिद्धान्त-नियंत्रण के विस्तार से आशय अधीनस्थ कर्मचारियों की उस संख्या से है जिसे एक अधिकारी सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकता है। विक्रय संगठन में भी एक वरिष्ठ ● अधिकारी के अन्तर्गत अधीनस्थो की संख्या उतनी ही होनी चाहिये जिस पर वह प्रभावशाली नियंत्रण रख सके।
7. व्याख्या का सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार विक्रय संगठन के प्रत्येक पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति
के अधिकार एवं कर्तव्य स्पष्ट रूप से परिभाषित कर देने चाहिये जिससे अनावश्यक टकराव उत्पन्न न हो
सके।
8. आदेश का सौपानिक सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार एक विक्रय संगठन में अधिकारियों एवं सहायकों के औपचारिक सम्बन्ध स्पष्ट होने चाहिये कि कौन व्यक्ति किसके अधीन कार्य करेगा। 9. आदेश की एकरुपता का सिद्धान्त - इस सिद्धान्त के अनुसार एक व्यक्ति को एक ही अधिकारी से आदेश मिलने चाहिये। एक से अधिक अधिकारियो से आदेश मिलने पर न तो उनका ठीक से पालन होगा और न ही अनुशासन रहेगा।
10. अधिकार एवं दायित्व का सिद्धान्त इसके अन्तर्गत संगठन के कर्मचारियों तथा अधिकारियों का उत्तरदायित्व सौंपने के साथ-साथ अधिकार भी सौंपने चाहिये। अधिकारों से रहित दायित्व को कर्मचारी पूरा नही कर सकता तथा दायित्व रहित अधिकारों का दुरुपयोग हो सकता है।
विभिन्न विद्वानों ने विक्रय संगठन की संरचना को निर्धारित करने वाले विभिन्न घटक बताये है उनमें से प्रमुख घटक निम्नलिखित है।
1. वस्तु का स्वभाव वस्तु के स्वभाव का भी संगठन संरचना पर प्रभाव पड़ता है। यदि वस्तु औद्योगिक उपयोग की है तो उसके ग्राहकों की संख्या भी कम होगी। इसके विपरीत स्थिति में वस्तु सामान्य उपयोगी होने पर उसके क्रेताओं की संख्या अधिक होगी जिससे बड़ा संगठन बनाना आवश्यक होगा।
2. इकाई का आकार विक्रय संगठन की संरचना इकाई के आकार पर भी निर्भर करती है।
यदि संख्या बड़ी है तो उसका उत्पादन एवं विक्रय भी बड़े स्तर का होगा तथा छोटी संस्था का विक्रय भी कम होगा।
3. विपणन योजना एवं क्षेत्र वस्तु का विपणन क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रान्तीय या स्थानीय हो सकता है। क्षेत्र जितना बड़ा होगा उसके लिए विक्रय संगठन संरचना भी उतनी ही बड़ी करनी होगी।
4. विक्रय नीति संस्था की विक्रय नीति संगठन संरचना को प्रभावित करती है। यदि संस्था अपने सारे मालको एकाकी विक्रय प्रतिनिधी के माध्यम से बेचती है तो छोटे विक्रय संगठन से ही कार्य सुविधा से हो सकता है। इसके विपरीत यदि निर्माता अपनी दुकान के माध्यम से माल बेचता है तो बड़े संगठन की संरचना करनी होगी जैसे- टाटा ग्रुप की मिल, केलिकों मिल, मफत लाल ग्रुप की मिल आदि।
5. योग्य कर्मचारियों की उपलब्धिता - यदि संस्था के पास प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध होते है तो संगठन का आकार बढ़ाया जा सकता है। अनुभवी एवं योग्य कर्मचारी निर्णय लेने तथा अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने में कुशल होते हैं।
6. उत्पादो की संख्या - यदि संस्था के द्वारा विक्रय की जाने वाली वस्तुओं की संख्या बहुत अधिक है तो विक्रय संगठन की संरचना भी बड़ी होगी, जबकि उत्पादों की संख्या एक या दो होने पर विक्रय संगठन अपेक्षाकृत छोटा होगा।
7. उत्पाद का मूल्य वस्तु का मूल्य संरचना को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है। यदि उत्पाद का मूल्य कम हो तो उसकी मांग और उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा होगी।
फलस्वरूप ऐसे उत्पाद के विक्रय के लिए एक बड़े विक्रय संगठन की आवश्यकता होगी। लेकिन वस्तु का मूल्य अधिक होने पर जैसे- मोटर कार, कूलर, रेफ्रीजरेटर, टीवी आदि का होता है, अपेक्षाकृत एक छोटे विक्रय संगठन के द्वारा भी व्यवसाय का संचालन किया जा सकता है।
8. बाजार की प्रकृति - यदि किसी वस्तु का बाजार के वल स्थानीय होता है उत्पादित वस्तु की खपत बहुत कम होगी और उसका विक्रय संगठन छोटा होगा। किन्तु यदि निर्मित वस्तु की मांग राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती है तो ऐसे उपक्रम का विक्रय संगठन विस्तृत होगा।
9. वित्तीय साधन-जिन संस्थाओं के पास वित्तीय साधन पर्याप्त होते हैं वे अपने माल का विक्रय सीधे उपभोक्ता को करने की भी व्यवस्था कर सकते है जिसके लिए एक बड़े संगठन का निर्माण करना होगा। वित्तीय साधन कम होने पर विक्रय मध्यस्थों के द्वारा किये जाने पर अपेक्षाकृत छोटा संगठन भी पर्याप्त होगा।
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