विक्रय कोटा के प्रकार - Types of Sales Quotas

विक्रय कोटा के प्रकार - Types of Sales Quotas


विक्रय कोटा कितने प्रकार का है यह निश्चित नही है। विभिन्न संस्थायें विभिन्न प्रकार के कोटो का उपयोग करती है। साधारणतया कोटे तीन प्रकार के होते है


1. विक्रयकर्ता का कोटा- ऐसा कोटा निर्धारित करने की परम्परा व्यवसाय में बहुत ही अधिक पायी जाती है। इसमें प्रत्येक विक्रयकर्ता का विक्रय कोटा निर्धारित कर दिया जाता है जिसको पूरा करना सेवाओं को चालू रखने के लिए आवश्यक होता है। कभी कभी प्रत्येक विक्रयकर्ता का कोटा उसके वेतन और भत्तो के आधार पर निर्धारित कर दिया जाता है। यदि वेतन और भत्ते कम होते है तो कोटा कम होता है, लेकिन इसके विपरीत यदि वेतन और भत्ते अधिक होते है तो कोटा भी अधिक होता है।


2. डीलर या वितरक कोटा - जब एक निर्माता अपनी वस्तु के विक्रय के लिए अपने डीलर या वितरक का कोटा निर्धारित कर देता है तो ऐसे कोटे को डीलर या वितरक का कोटा कहते है। ऐसे डीलर या वितरक के लिए डीलरशिप या डिस्ट्रीब्यूटरशिप को चालू रखने के लिए अपना कोटा पूरा करना आवश्यक होता है।


 3. शाखा का कोटा - जब एक शाखा की एक निर्धारित समय में एक पूर्व निर्धारित मात्रा का विक्रय करना आवश्यक होता है तो ऐसा कोटा शाखा का कोटा कहलाता है। शाखा प्रबन्धक इस कोटे की पूर्ति अपने विक्रयकर्ताओं के माध्यम से करता है। इसी प्रकार यदि निर्माता का मण्डलीय कार्यालय है तो मण्डल के आधार पर भी मण्डलीय कोटा निर्धारित किया जाता है।


इसके विपरीत, यदि विक्रय संगठन जिला व राज्य आधार पर है तो जिले का कोटा और राज्य का कोटा निर्धारित किया जा सकता है।


आमतौर पर कोटों के तीन स्वरूप होते है (1.) रूपयो में (2.) इकाइयों में (3.) बिन्दुओं में। कोटे को रुपयो व इकाइयों में व्यक्त करना बहुत आसान है: जैसे, एक लाख की बिक्री प्रतिमाह करने का कोटा या 10 कुण्टल माल प्रति माह बेचने का कोटा या 100 इकाई प्रति माह बेचने का कोटा। लेकिन बिन्दु में प्रत्येक क्रिया पर बिन्दु दिये जाते है और एक विक्रयकर्ता को कुछ पूर्व निर्धारित बिन्दु प्राप्त करना आवश्यक होता है जो कोटा कहलाता है।