बीमा की उपयोगिता - usefulness of insurance

बीमा की उपयोगिता - usefulness of insurance


बीमा की उपयोगिता का सामान्यतः अध्ययन-व्यक्तिगत उपयोगिता व्यवसायिक, और सामाजिक लाभों के अन्तगर्त किया जा सकता है जो इस प्रकार है


(क) बीमा सुरक्षा दान करता है


बीमा निर्धारित जोखिम से होनें वाली हानि के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। जीवन बीमा में मृत्यु या जीवन से घटित घटना पर बीमित रकम का भुगतान कर दिया जाता है। जीवन के अनेक आवश्यकताओ के लिये अलग अलग प्रकार के बीमापात्र खरीदे जाते हैं जो बीमित व्यक्ति से सम्बन्धित होते है।

इसी प्रकार सम्पत्ति बीमा की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं जोखिम से सम्बन्धित है। बीमित जोखिम घटित होने पर भुगतान का दिया जाता है, सम्पत्ति के नष्ट होने पर या हानि होने पर हानि का भुगतान समान्य बीमा द्वारा किया जाता है।


(ख) बीमा व्यक्ति को चिन्ता से मुक्त करता है


सुरक्षा मनुष्य का मुख्य प्ररेक है। यदि व्यक्ति का भविष्य जोखिम से असुरक्षित है तो उसे हमेशा चिन्ता लगी रहती है और कार्य करने में मन नहीं लगता परन्तु हानि के प्रति सुरक्षा रहने पर व्यक्ति उस से चिन्ता मुक्त हो जाता है।

क्योकि वह समझाता है कि जोखिम उसके परिवार को कोई हानि नहीं देगा क्योकि हानि का भुगतान बीमा द्वारा कर दिया जाता है। यह हानि सम्पत्ति, जीवन और दायित्व के सम्बन्ध में हो सकती है। जिसके लिये बीमा विभिन्न स्वरूपों में मौजूद है। जोखिम से सुरक्षा न रहने पर मनुष्य को चिनता, हतोत्साह, मानसिक कमजोरी आदि रहती है।


(ग) बीमा बन्धक सम्पत्ति में सुरक्षित करता है


बीमा बन्धक सम्पत्ति को सुरक्षित रखता है व्यक्ति की मृत्यु से बंधक पर रखी गयी सम्पत्ति ऋणदाता की हो जाती हैं, और परिवार को कष्ट होता है।

दूसरी ओर ऋणदाता ऋण देने के पहले सम्पत्ति को बीमित करने के लिये बल देता है क्योंकि सम्पत्ति के नष्ट होने पर क्षति पहुँचने, चोरी होने आदि के कारण बन्धक ऋण का भुगतान प्राप्त करना संभव नही रहता है। और ग्रहणदाता को हानि होती है। यदि सम्पत्तियों का बीमा होता, तो क्षतिग्रस्त सम्पत्ति के होने से चोरी आदि हो जाने पर ऋण का भुगतान ऋणदाता को बीमा होने के कारण बंधक सम्पत्ति का दिया जाता है।


(घ) बीमा सहायक के रूप में कार्य करता है


बीमा यदि हुआ है तो चाहे परिवार के मुखिया की मृत्यु हो या सम्पत्ति को हानि हो दोनो के प्रति चिन्ता करने की आवश्यकता नही होती,

क्यो कि क्षति पहुँचने की स्थिति में बीमा कार्य करती है। बीमा उन सभी कठिनाई से मुक्त प्रदान करता है जो ऐसी समास्याओं को दूर करती है, जो व्यक्ति के लिये मुसीबत हो सकती है, क्योकि जोखिम होने की स्थित में आर्थिक कठिनाइयों से राहत प्रदान करती है।


(ड़) बीमा बचत को प्रोत्साहित करता है एवं लाभकारी विनियोग में सहायक है


जीवन बीमा बचत एवं सुरक्षा दोनो प्रदान करता है जबकि अन्य बीमा में केवल सुरक्षा सन्निहित रहती है। जीवन बीमा में बचत एवं विनियोग का लाभ मिलता है।

बचत करके व्यक्ति वृद्धावस्था की कठिनाईयों से सुरक्षित हो जाता है यदि मृत्यु आकस्मिक हो भी जाती है तो इसमें सहायता मिलता है। क्योंकि उस दशा में एक निश्चित रकम का भुगतान कर दिया जाता है और इसके साथ ही साथ अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं क्योंकि बीमित रकम का भुगतान केवल एक निश्चत समय एवं घटना के घटित होने पर ही किया जाता है। जीवन बीमा के बीमित रकम के साथ ही साथ बोनस का भी भुगतान होता है क्योकि बीमाकारी अपने एकत्रितकोष को विनियोजित करता रहता है। और प्राप्त हुयी आय से खर्चे और संचय निकालकर शेष रकम बीमापत्र धारी दे देता है। बीमा सुरक्षा के साथ साथ लाभकारी विनियोग का भी कार्य करती है।


1. व्यवसायिक उपयोगिता


(क) व्यक्तिगत हानियों की अनिश्चितता कम हो जाती है


बीमा अनेक जोखिमों से होने वाली हानि को पूरा करता है जिनके लिये बीमा की सुविधाये प्रदान की जाती है। व्यवसायिक जगत में अत्यधिक मानवीय और भौतिक सम्पत्ति का उपयोग किया जाता है और थोड़ी सी चूक के कारण अरबो की सम्पत्ति क्षणभर में नष्ट हो जाती है। इन जोखिमों से निजात पाने के लिये व्यसायिक जगत में बीमा भी अवश्यकता एवं भूमिका महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि बीमा से इस हानियों को पूरा किया जाता है और ऐसी अनिश्चिता को दूर किया जात हैं और भुगतान किया जाता है जिससे व्यापार वृद्धि में सहायता मिलती है।


(ख) बीमा से व्यवसायिक दक्षता में वृद्धि और साख में वृद्धि होती है -


बीमा होने से व्यवसायी हानियों के प्रति स्वतन्त्र हो जाते है

और मन लगाकर कार्य करते है। व्यवासाय में संलग्न व्यक्ति सम्पत्ति आदि के बारे बीमा रहने पर चिंता नही करते क्योकि बीमा द्वारा पूर्णक्षति की पूर्ति कर दी जाती है। जिससे व्यसासय की निरन्तरता बनी रहती है। बीमा रखने पर साख में वृद्धि हो जाती हैं, क्योंकि ऋणदाता यह समझते है कि यदि ऋणी की मृत्यु या बन्धक पर रखी गयी सम्पत्ति नष्ट हो जाने पर खो जाने पर भी उन्हें भुगतान बीमा के माध्यम से किया जायेगा इसलिये बीमा होने से साख में और अधिक वृद्धि हो सकती है।


(ग) महत्वपूर्ण कर्मचारी की बीमा एवं कर्मचारी कल्याण की सुविधा:


अधिक महत्वपूर्ण कर्मचारी वह है

जिसके जीवित रहने पर व्यापार को लाभ-हानि को तुरन्त पूरा न किया जा सके। महत्वपूर्ण कर्मचारी का बीमा करा लेने पर उसकी मृत्यु पर व्यवसाय बन्द होने या हानि होने की संभावना समाप्त हो जाती है। कर्मचारी के मृत्यु पर उनके परिवार को कुछ रकम देनी पड़ती है, जिसके लिये बीमा खरीदार उन्हे भुगतान किया जा सकता है। कर्मचारियों के निवास स्थान आदि के प्रबन्ध के लिये बीमा से ऋण भी मिल जाता है।


2. सामाजिक उपयोगिता


(क) समाज की मानवीय एवं भौतिक सम्पित्त की सुरक्षा


समाज की मानवीय एवं भौतिक सम्पित्त की सुरक्षा जीवन बीमा एवं सम्पित्ा बीमा से ही सकती है।

जीवन बीमा में यह संभावना रहती है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति अपने भविष्य को जोखिम के प्रति स्वतन्त्र रखते हैं, क्योंकि उसके भौतिक सम्पित्त का बीमा रहने पर सम्पित्ा की सुरक्षा आदि रहती है। यदि वह नष्ट होती है तो हानि का पूर्ण भुगतान बीमा द्वारा किया जायेगा। बीमा होने से कृषि, उद्योग, व्यापार, यातायात आदि में प्रगति होती है, और मानवीय एवं भौतिक सम्पिता को सुरक्षा प्राप्त होती है।


(ख) राष्ट्र प्रगति मे सहायक एवं मुद्रा प्रसार में कमी


राष्ट्र प्रगति में बीमा का महत्वपूर्ण योगदान रहता है

क्योंकि बीमा के माध्यम से देश की सम्पत्ति सुरक्षित रहती है, और विनियोग के लिये पर्याप्त रकम मिल जाती है। बीमा मुद्रा प्रसार में कमी दो प्रकार की होती है


1. प्रीमियम की रकम एकत्रित करके मुद्रापूर्ति में कमी पूरा करता है। राष्ट्र में मुद्रा की मात्रा कम हो जाने से मुद्रा प्रसार में कमी आ जाती है उसको भी पूरा करता है।


2. एकत्रित प्रीमियम को विनियोजित करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती हैं बीमा के समाजिक लाभ के तरीके महत्वपूर्ण है। क्योकि बीमा समाज के व्यवस्थित अस्थिरता से मुक्ति दिलाता है, और साथ ही साथ जीवन स्तर भी स्थिरता को बढ़ाता है और पूजी निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।