राष्ट्रीय दृष्टि से बीमा का उपादेयता - Utility of insurance from national point of view

राष्ट्रीय दृष्टि से बीमा का उपादेयता - Utility of insurance from national point of view


बीमा से केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को लाभ होता है। जिसका विवरण इस प्रकार है।


1. राष्ट्रीय बचत में वृद्धि - बीमा करवाने हेतु प्रत्येक व्यक्ति बचत करता है। ये छोटी-छोटी बचतें कुल राष्ट्रीय बचत में वृद्धि करती है।


2. मुद्रा बाजार के विकास में योगदान बीमा प्रीमियमों की बड़ी राशि से देश के मुद्रा बाजार के विकास में भी योगदान मिलता है। फलत: अल्पकालीन व दीर्घकालीन प्रतिभूतियों का ले नदे न आसान हो जाता है। सरकारी बैंक तथा कम्पनियां, सभी अपनी आवश्यकतानुसार मुद्रा तत्काल प्राप्त व विनियोग भी कर सकती है।


3. प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा बीमा सुविधा से ही अर्थव्यवस्था के सभी घटकों को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा उपलब्ध हो रही है। बीमा कम्पनियां अग्नि, अतिवृष्टि, समुद्री मार्ग की जोखिमों, तटीय क्षेत्रों की जोखिमों आदि का बीमा करती है और उन लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा प्रदान करती है और राष्ट्र के आर्थिक विकास की गति को आगे बढ़ाने में योगदान देती है। 4. मुद्रा स्फीति पर नियन्त्रण - बीमा प्रीमियम के रूप में एकत्रित धन बाजार में मुद्रा प्रसार को रोकता है, बाद में


इसी धन का उद्योगों के विकास में उपयोग किया जाता है। भारत में कुल प्रचलित मुद्रा का लगभग 5 प्रतिशत भाग


बीमा प्रीमियम के रूप में एकत्रित होता है।


5. विनियोग को प्रोत्साहन बीमा के द्वारा व्यक्ति छोटी-छोटी बचतें एकत्रित कर के विभिन्न प्रकार के बीमापत्रों को खरीदता है उस प्रीमियम राशि का निश्चित प्रतिशत भाग उद्योगों में विनियोजित किया जाता है।


6. विदेशी मुद्रा कोष में योगदान बीमा संस्थाओं द्वारा विदेश में भी बीमा व्यवसाय किया जाता है। विदेशों में बीमा व्यवसाय से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।


7. स्कन्ध विनियम केन्द्रों का विकास बीमा कम्पनी अपने से चय कोषों का एक भाग स्कन्ध विनिमय केन्द्रों में भी विनियोग करती है व निरन्तर सक्रियता से अंश विनिमय व्यवसाय में हिस्सा ले ती है अतः स्कन्ध विनियम केन्द्रों का भी विकास होता है।


8. वृहत पैमाने के उद्योगों को पूंजी की उपलब्धता - बीमा कम्पनियां अपने संचय कोषों से उद्योगों के अंश व ऋणपत्रों को क्रय करती है जिससे इन उद्योगों को भारी मात्रा में दीर्घकालीन व अल्पकालीन दोनों ही प्रकार की अंशपूंजी प्राप्त होती है।


9. सरकारी प्रतिभू तियों में निवेश द्वारा आर्थिक परियोजनाओं में योगदान - बीमा संस्थाओं ने केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकारों की प्रतिभूतियों तथा इनके द्वारा गारन्टी युक्त अन्य प्रतिभूतियों में निवेश कर देश के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इन प्रतिभूतियों में निवेशित राशि देश की आर्थिक परियोजनाओं को पूरा करने में व्यय की जाती है। जिससे देश का आर्थिक विकास होता है।


10. मध्यम व लघु व्यवसायों को प्रोत्साहन - ये संस्थाएं सम्पूर्ण व्यवसाय का बीमा करवा कर व्यवसाय के कुशल संचालन पर पूर्ण ध्यान दे सकती है। बैंक व वित्तीय संस्थाएं भी बीमा के आधार पर ऋण उपलब्ध करवाती है। ये लघु व मध्यम व्यवसायी देशी व विदेशी व्यापार को योगदान के साथ ही कुल राष्ट्रीय उत्पादन व आय में वृद्धि भी करते हैं।


11. देश में रोजगार को बढ़ावा बीमा कम्पनी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से देश में रोजगार को बढ़ावा देती है। वह स्वयं कई व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करती है व इनके द्वारा बीमित संस्थाएं भी रोजगार का सृजन कर कुल राष्ट्रीय आय में वृद्धि कर रही है।


12. राष्ट्रीय महत्व के जोखिम युक्त कार्यों को प्रोत्साहन बीमा ने ऐसे कई कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहन दिया है जिनमें बहुत अधिक जोखिम विद्यमान होती है। उदाहरण विश्वस्तरीय खेलकू द प्रतियोगिताओं, आधुनिक सैनिक उपकरणों का परीक्षण, अन्तरिक्ष यान एवं प्रयोगशालाएं आदि जोखिमयुक्त कार्यों में बीमा सहयोग कर रहा है।


13. राष्ट्रीय आय व उत्पादन में भी निरन्तरता राष्ट्रीय आय की निरन्तरता को बनाये रखने में भी बीमा का योगदान है। अनेक प्राकृतिक व मनुष्यकृत कारणों से प्रतिवर्ष कई उद्योगों व्यवसाय, जहाज आदि नष्ट होते हे जिनसे सरकार को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों की प्राप्ति होती है,

लाखों लोगों को रोजगार व करोडों रूपये के माल व सेवाओं का उत्पादन होता है, यदि इनका बीमा न हो तो इनमें से अधिकांश इकाईयां पुनःस्थापित नहीं हो सकेगी व बेरोजगारी फैल जायेगी। परन्तु बीमा के कारण ये उद्योग पुनः स्थापित हो जाते है व राष्ट्रीय आय व उत्पादन में निरन्तरता बनी रहती है।


14. सम्पूर्ण राष्ट्रीय विकास में योगदान उद्योगों के विकास, रोजगार अवसरों के विकास, अधिक बचत व पूंजी निर्माण आदि सभी घटक सम्पूर्ण राष्ट्रीय विकास में योगदान करते हैं। बीमा के उपरोक्त लाभों व महत्व को दे खकर हम कह सकते हैं कि बीमा में दया समान गुण होते हैं। इसमें बीमाकर्ता व बीमित दोनों सौभाग्यशाली होते हैं तथा बीमा जन्म से ले कर मृत्यु तक सहायक सिद्ध होता है। "